Operation sindoor: भारत ने पाकिस्तान पर लगातार आग बरसाना शुरू कर दिया है. 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भारत ने बदला लिया है भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर मिसाइल से एयर स्ट्राइक की है. इसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकियों के 9 ठिकानों पर मिसाइल से हमला किया है. आतंकियों पर किए इस ऑपरेशन का नाम भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर रखा है. इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की तरफ से हैमर, स्कैल्प मिसाइलें और राफेल का यूज किया गया.

इसके अलावा बताया जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 को तबाह कर दिया है. इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध की खबरें भी तेज हो गई हैं. वहीं भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के पास परमाणु शक्ति भी है. परमाणु बम दुनिया के सबसे शक्तिशाली बमों में से एक है. यह इतना खतरनाक होता है कि केवल एक परमाणु बम सैकड़ों लोगों को मार सकता है. हांलांकि दुनिया में एक बार परमाणु बम गिराए जा चुके हैं. यह बम अमेरिका ने जापान पर गिराये थे. ऐसे में चलिए हम इस बारे में बताते हैं कि अमेरिका ने जापान पर क्यों गिराये थे परमाणु बम और इसका सबसे बड़ा कारण क्या था. 

अमेरिका ने जापान पर क्यों गिराये थे परमाणु बम?

अमेरिका और जापान के बीच 1945 में हालात काफी बिगड़ चुके थे. जापान ने कई एशियाई इलाकों पर कब्जा कर लिया था, जिससे अमेरिका नाराज था. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन को परमाणु बम यूज करने का अधिकार मिल चुका था ताकि जापान को सरेंडर  करने पर मजबूर किया जा सके. ट्रूमैन ने जापान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने हार नहीं मानी, तो अमेरिका जापान के किसी भी शहर को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है. जब जापान नहीं झुका, तो अमेरिका ने बम गिराने का फैसला किया. इसके बाद जापानी सेना ने पीछे हटना शुरू कर दिया और एक हफ्ते के अंदर जापान ने अमेरिका समेत बाकी मित्र देशों के सामने सरेंडर कर दिया. परमाणु बम 1945 में जापानी शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए थे. 1945 के अंत तक, परमाणु बमबारी ने हिरोशिमा में करीब 140,000 लोग और नागासाकी में 74,000 लोग मारे गए थे. 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया था. वहीं इसके सिर्फ तीन दिन बाद, 9 अगस्त को अमेरिका ने एक और बम नागासाकी पर गिराया था. इन बम धमाकों के बाद, एशिया में चल रहा द्वितीय विश्व युद्ध लगभग खत्म हो गया. 

अमेरिका और जापान की लड़ाई 

1942 से ही अमेरिका जापान के शहरों पर बमबारी कर रहा था. मार्च 1945 में टोक्यो पर एक बड़ा हमला हुआ, जिसमें 80 हजार लोग मारे गएलेकिन फिर भी जापान ने हार नहीं मानी. जिसके बाद अमेरिका को लगा कि सिर्फ बमबारी से जापान सरेंडर नहीं करेगा. इसके बाद इवो जीमा और ओकिनावा की लड़ाइयों में हजारों अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. जिसमें अमेरिका का मानना था कि जापान पर जमीनी हमला भी आसान नहीं है.

आखिर में अमेरिका ने फैसला किया कि जापान के किसी बड़े शहर पर परमाणु बम बम गिराया जाए. जिसके बाद अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी को चुना, इन दोनों शहरों को इसलिए चुना गया, क्योंकि इनका राजनीतिक और सैन्य महत्व बहुत था. हिरोशिमा जापान का सबसे बड़ा शहर था, वहां सेना का मुख्यालय और बड़ा सैन्य गोदाम था. ट्रूमैन ऐसे ही शहरों को निशाना बनाना चाहते थे जिससे जापान की युद्ध क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचे. इस परमाणु हमले के बाद अमेरिका की खूब आलोचना हुई थी, हालांकि यही वो कारण था जिससे जापान ने विश्व युद्ध में सरेंडर करने का फैसला किया. 

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