Operation Sindoor: भारतीय सेना ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लिया है. भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकियों के 9 ठिकानों पर मिसाइल से हमला किया है. आतंकियों पर किए इस ऑपरेशन का नाम भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर रखा है. इसी बीच पाकिस्तान के जिन 9 ठिकानों पर मिसाइल हमला किया गया, उनमें कुख्यात आतंकी मसूद अजहर का ठिकाना भी शामिल था. यह वही आतंकी है, जिसे साल 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक होने के बाद भारत को छोड़ना पड़ा था.

इसी बीच बताया जा रहा है कि कुख्यात आतंकी मसूद अजहर का ठिकाना भी खत्म कर दिया गया है और उस ठिकाने में मौजूद मसूद अजहर का पूरा परिवार भी खत्म हो गया है. इसके अलावा बताया जा रहा है कि मसूद अजहर के ठिकाने पर 14 लोगों की मृत्यु हुई है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि मौलाना मसूद अजहर को भारत ने कैसे गिरफ्तार किया था और फिर कंधार हाईजैक की साजिश रची गई. 

कौन है आतंकी मसूद अजहर?मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है. जैश-ए-मोहम्मद वहीं संगठन है, जिसने साल 2019 में भारत के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इसके अलावा मसूद अजहर के बहावलपुर और पीओके में कई टेरर कैंप हैं. मसूद भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादियों में शामिल भी है. मसूद अजहर पर ही पठानकोट में आतंकी हमले कराने का आरोप लगा था. आतंकी मसूद अजहर का जन्म 1968 में हुआ था. उसका पूरा नाम मौलाना मसूद अजहर है. उसने पाकिस्तान में बैठकर भारत में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है.

इस कुख्यात आतंकी मसूद अजहर का नाम कई बड़े मामलों से जुड़ा है. जैसे 2000 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला, 26/11 मुंबई हमला, भारतीय संसद हमला, पठानकोट एयरबेस पर हमला और पुलवामा हमला. ऐसे में मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने भी ग्लोबल आतंकी घोषित किया है. 

मसूद अजहर कब पकड़ा गया था?29 जनवरी 1994 को मसूद अजहर पुर्तगाली पासपोर्ट पर ढाका से दिल्ली पहुंचा था. मसूद अजहर पर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर ड्यूटी अफसर को शक हुआ, लेकिन जब मसूद ने कहा कि वो गुजराती मूल का है, तो उसे बिना ज्यादा जांच किए पासपोर्ट पर मुहर लगा दी. इसके बाद मसूद श्रीनगर की गलियों में दिखने लगा. जिसमें वह भाषण देते, अलगाववादी संगठनों के बीच मतभेद सुलझाते और कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद की तरफ उकसाता था. इसके बाद मसूद अजहर अनंतनाग में साथी सज्जाद अफगानी के साथ एक ऑटो में बैठते समय गिरफ्तार किया गया. सेना के जवानों ने उसे रोका. ऑटो में सवार दोनों लोग उतरकर भागने लगे, लेकिन जवानों ने उन्हें वहीं पकड़ लिया. हालांकि जेल में रहते हुए मसूद अक्सर यह दावा करता था कि भारत सरकार ज्यादा समय तक उसे जेल में नहीं रख पाएगी. 

मसूद अजहर को छुड़ाने की कोशिशमसूद की गिरफ्तारी के 10 महीने के अंदर आतंकियों ने दिल्ली में कुछ विदेशियों का अपहरण कर उसकी रिहाई की मांग की, लेकिन ये मुहिम असफल हो गई, क्योंकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस सहारनपुर से बंधकों को छुड़ाने में सफल हो गई. वहीं इसके एक साल बाद फिर से विदेशियों का अपहरण कर उन्हें छुड़ाने की कोशिश की गई, लेकिन यह कोशिश भी नाकाम रही. 1999 में जम्मू की जेल से मसूद को छुड़ाने के लिए सुरंग खोदी गई, लेकिन तब भी मसूद पकड़ा गया. इसके कुछ महीनों बाद दिसंबर, 1999 में भारतीय विमान के अपहरण के चलते मसूद अजहर को छोड़ना पड़ा था. 

कैसे छूटा था आतंकी मसूददिसंबर 1999 में कुछ आतंकी एक भारतीय विमान (IC-814) का अपहरण कर उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए. 1999 को आतंकियों ने 178 यात्रियों के साथ IC-814 प्लेन को हाईजैक कर लिया था. यात्रियों की रिहाई के बदले आतंकियों ने मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों की रिहाई की मांग की. जिसके बाद भारत सरकार ने मसूद, जरगर और उमर शेख को छोड़ने का फैसला किया. इसमें जम्मू और श्रीनगर की जेलों से इन आतंकियों को लाकर दिल्ली में विमान में बैठाया गया. इसके बाद जसवंत सिंह, अजीत डोभाल और दूसरे अधिकारी आतंकियों को लेकर कंधार पहुंचे. 

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