आजकल बढ़ती महंगाई में घर का बजट संभालना काफी कठिन हो गया है. अगर परिवार में कमाने वाला केवल एक ही सदस्य हो, तो हर महीने के खर्चों को पूरा करना और भी चुनौती भरा हो जाता है. ऐसे में बिजली के बिल से जुड़ी एक अहम खबर आई है. तेलंगाना इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (TGERC) ने बिजली लागत से जुड़े ट्रू-अप चार्ज को हरी झंडी दे दी है. इसका सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ेगा. इस फैसले के बाद देश भर में बिजली की खपत और खर्च को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. आइए समझते हैं कि पूरे देश में हर महीने कितनी बिजली इस्तेमाल होती है और उस पर औसतन कितना खर्च बैठता है.
देश भर में बिजली खपत का हाल
हालिया सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में हर महीने बिजली की कुल खपत करीब 160 से 169 अरब यूनिट के आसपास बनी रहती है. अकेले अगस्त 2026 के आंकड़ों को देखें तो इस दौरान पूरे देश में कुल 169.01 अरब यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई थी. हालांकि, पूरे देश का कुल बिजली बिल एक निश्चित राशि के रूप में जारी नहीं किया जाता है. इसकी मुख्य वजह यह है कि हर राज्य में बिजली के रेट अलग-अलग तय होते हैं.
अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग रेट
देश भर में बिजली का बिल उपयोग के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें घरेलू उपयोग, व्यावसायिक (कमर्शियल), औद्योगिक और कृषि कार्य शामिल हैं. भारत में घरेलू उपयोग के लिए औसत दर लगभग 6.86 रुपये प्रति यूनिट आती है. वहीं दुकानों, दफ्तरों और व्यावसायिक जगहों के लिए कमर्शियल बिजली की औसत कीमत करीब 10.28 रुपये प्रति यूनिट के आसपास रहती है. इसके अलावा प्रति यूनिट स्लैब के हिसाब से भी बिल की दरें बदलती रहती हैं.
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एक आम परिवार का औसतन कितना आता है बिल?
अलग-अलग राज्यों की टैरिफ नीतियों और मौसम के मिजाज को देखते हुए हर घर का बिजली बिल भिन्न होता है. एक सामान्य भारतीय परिवार का मासिक बिजली बिल आमतौर पर 500 रुपये से लेकर 2,500 रुपये के बीच आता है. यह अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि घर में कुल कितने उपकरण चल रहे हैं और किस राज्य में बिजली की प्रति यूनिट दर क्या तय की गई है.
मौसम के मिजाज से बढ़ा बिजली का इस्तेमाल
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में देश की बिजली खपत में पिछले साल की तुलना में 12.85 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है. अगस्त 2025 में जहां कुल बिजली खपत 149.76 अरब यूनिट थी, वहीं अगले साल यह बढ़कर 169.01 अरब यूनिट तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में उमस और नमी अधिक होने के कारण लोगों ने एयर कंडीशनर और कूलिंग डिवाइस का ज्यादा इस्तेमाल किया, जिससे मांग तेजी से बढ़ी.
पीक डिमांड में दर्ज की गई बढ़त
गर्मी और उमस के कारण बिजली की अधिकतम मांग में भी काफी इजाफा हुआ. अगस्त 2025 में जहां अधिकतम मांग 229.72 गीगावाट दर्ज की गई थी, वहीं बाद में यह बढ़कर 258.27 गीगावाट तक पहुंच गई. हालांकि, यह आंकड़ा मई महीने में दर्ज किए गए 270.82 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम रहा. वहीं जून 2025 में गर्मी के दौरान अधिकतम मांग 242.77 गीगावाट रही थी, जो सरकार के अनुमानित 277 गीगावाट के आंकड़े से कम थी.
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