India Foreign Policy: भारत ने किन किन देशों को बांटा हुआ है कर्ज, किस देश पर सबसे ज्यादा उधार है पैसा?
India Foreign Policy: भारत कई देशों को कर्ज देता है, जिनमें भूटान, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं. वही हाल ही में मालदीव ने भारत का 5 करोड़ डॉलर कर्ज लौटाया, जिससे रिश्ते ओर मजबूत हुए है.

India Foreign Policy: दुनिया में हर देश एक-दूसरे की मदद करता है, लेकिन यह मदद सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रहती है, बल्कि यह कूटनीति और रिश्तों को मजबूत करने का तरीका भी होती है. इसके साथ ही भारत भी पिछले कई सालों से कई देशों को कर्ज और आर्थिक मदद देता आ रहा है. हाल ही में एक बड़ी खबर सामने आई जब मालदीव ने भारत के 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 5 करोड़ डॉलर (लगभग 425 करोड़ रुपये) के दूसरे ट्रेजरी बिल का भुगतान 11 मई 2026 को कर दिया है. यह पैसा मालदीव ने बाहरी कर्ज के बोझ को कम करने के प्रयासों के तहत चुकाया है.
आपको बता दें कि ये कर्ज 2019 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से ट्रेजरी बिल के रूप में लिया गया था. वही भारत ने समय-समय पर इसे रोल ओवर यानी समय बढ़ाने की सुविधा भी दी थी ताकि मालदीव पर अचानक आर्थिक दबाव न पड़े. कुल 150 मिलियन डॉलर (लगभग 12.5 करोड़ डॉलर) के इस कर्ज में से मालदीव ने अब तक 100 मिलियन डॉलर चुका दिए हैं. पहली किश्त जनवरी 2024 में 50 मिलियन डॉलर की दी गई थी और दूसरी किश्त 11 मई 2026 को 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 5 करोड़ डॉलर की दी गई है. अब तीसरी और अंतिम 50 मिलियन डॉलर की किश्त सितंबर 2026 में देनी की संभावना जताई जा रही है. यह पूरा मामला भारत और मालदीव के बीच मजबूत भरोसे और वित्तीय सहयोग को दिखाता है.
भारत किन-किन देशों को देता है कर्ज?
भारत समय-समय पर अपने पड़ोसी देशों और विकासशील देशों को आर्थिक मदद देता है. पड़ोसी देशों से लेकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक भारत की वित्तीय मदद उसकी विदेश नीति का एक मजबूत हिस्सा बन गई है. साथ ही इनमें नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और अफ्रीका के कई देश शामिल हैं. केंद्रीय बजट 2024-25 के अनुसार विदेश मंत्रालय के लिए 22,155 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो पिछले साल से ज्यादा है. वहीं विदेशी देशों को दी जाने वाली सहायता का अनुमान 5,667.56 करोड़ रुपये रखा गया है. इसका मतलब है कि भारत हर साल अलग-अलग देशों की विकास परियोजनाओं और आर्थिक मदद पर बड़ा खर्च करता है. ह मदद सड़क, बिजली, रेलवे और अस्पताल जैसी परियोजनाओं के लिए दी जाती है ताकि वहां विकास तेजी से हो सके. इसका मकसद सिर्फ पैसा देना नहीं बल्कि विकास में साझेदारी करना भी होता है.
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किस देश पर सबसे ज्यादा बकाया है कर्ज?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत से सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता भूटान को दी जाती है. वित्त वर्ष 2024-25 में भूटान को करीब 2,068.56 करोड़ रुपये की मदद मिलने का अनुमान है. वही इसके बाद नेपाल, मालदीव और मॉरीशस जैसे देश भी भारत की सहायता सूची में आते हैं. जिसमें नेपाल को लगभग 700 करोड़ रुपये, वही मालदीव को करीब 400 करोड़ रुपये और मॉरीशस को 370 करोड़ रुपये की सहायता दी जाती है. इसके अलावा म्यांमार, श्रीलंका, अफगानिस्तान, अफ्रीकी देश, बांग्लादेश, सेशेल्स और लैटिन अमेरिकी देश भी इस सूची में है जिनको अलग-अलग राशि में आर्थिक मदद दी जाती है. जिसमें श्रीलंका को करीब 245 करोड़ रुपये, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों को लगभग 200-200 करोड़ रुपये, बांग्लादेश को 120 करोड़ रुपये, सेशेल्स को 40 करोड़ रुपये और लैटिन अमेरिकी देशों को लगभग 30 करोड़ रुपये की सहायता दीया जाता है.
भारत खुद भी कई देशों का कर्जदार
अगर बात भारत कि करें तो जहां भारत कई देशों को मदद देता है, वहीं भारत खुद भी कई देशों से कर्ज लेता भी है. मार्च 2020 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज करीब 558.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. इसमें वाणिज्यिक उधार और एनआरआई डिपॉजिट्स की बड़ी भूमिका रही है. साथ ही करोना महामारी के दौरान भारत ने वर्ल्ड बैंक और एशियाई विकास बैंक से भी कर्ज लिया ताकि स्वास्थ्य, एमएसएमई और शिक्षा जैसे जरूरी सेक्टर को संभाला जा सके. आज भारत 65 से ज्यादा देशों को अलग-अलग रूपों में आर्थिक सहायता देता है और वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बना चुका है.
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