India Hydrogen Train: भारत ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में अपने प्रयास के तहत अपनी पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन शुरू की है. जबकि ट्रेन ने काफी रुचि पैदा की है कई लोग यह मानते हैं कि यह पारंपरिक एक्सप्रेस ट्रेन की तुलना में काफी तेज है. असल में हाइड्रोजन ट्रेन को मुख्य रूप से उच्च गति सेवा के बजाय डीजल से चलने वाली लोकल ट्रेन के पर्यावरण अनुकूल प्रतिस्थापन के रूप में डिजाइन किया गया है. आइए जानते हैं कि नियमित ट्रेन की तुलना में इसकी रफ्तार कैसी है और यह कितनी तेजी से दो किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है.

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हाइड्रोजन ट्रेन एक्सप्रेस ट्रेन से तेज नहीं 

भारत की पहले हाइड्रोजन ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस या शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम एक्सप्रेस सेवाओं से तेज नहीं है. इसकी सामान्य परिचालन रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा है जबकि इसकी अधिकतम डिजाइन रफ्तार 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच है. इस ट्रेन को उच्च शीर्ष रफ्तार के बजाय क्लीनर तकनीक और शून्य उत्सर्जन की पेशकश करके डिजिटल संचालित डेमू ट्रेनों को बदलने के लिए विकसित किया गया है. 

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2 किलोमीटर की दूरी तय करने में कितना समय? 

75 किलोमीटर प्रति घंटा की अपनी सामान्य परिचालन रफ्तार पर हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ 1 मिनट और 36 सेकंड में 2 किलोमीटर की दूरी तय करती है. अगर वह 110 किलोमीटर प्रति घंटा की अपनी अधिकतम डिजाइन रफ्तार पर चलती है तो यह समान दूरी लगभग 1 मिनट और 5 सेकंड में पूरी करती है. 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाले चर्म परीक्षण के दौरान यह ठीक 1 मिनट में 2 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है. 

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दूसरी ट्रेनों से तुलना 

हालांकि हाइड्रोजन ट्रेन एक प्रमुख तकनीकी प्रगति को दर्शाती है लेकिन इसका उद्देश्य भारत की सबसे तेज यात्री ट्रेन के साथ प्रतिस्पर्धा करना नहीं है. उदाहरण के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. यह इसे हाइड्रोजन ट्रेन की तुलना में काफी तेज बनाती है. 

हालांकि पारंपरिक डीजल लोकल ट्रेन की तुलना में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन बेहतर परिचालन दक्षता देती है. भारतीय रेलवे के मुताबिक यह है 89 किलोमीटर के जींद सोनीपत रास्ते को लगभग 2 घंटे में पूरा करती है.

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