Poverty in India: गरीबी कम करने में भारत की प्रगति कैसी दिखती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे मापने के लिए किस इनकम सीमा का इस्तेमाल किया गया है. अक्टूबर 2026 में जारी विश्व बैंक की इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ में देश की स्थिति का आकलन करने के लिए इनकम पर आधारित गरीबी के तीन मानक तय किए गए हैं. यह मानक 2021 की परचेजिंग पावर पैरिटी वैल्यू का इस्तेमाल करते हैं और इनमें अलग-अलग इनकम स्तर शामिल हैं. काफी ज्यादा गरीबी से लेकर उच्च मध्यम आय वाले देशों के लिए लागू होने वाले मानक तक. 

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इन पैमानों से पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में सुधार हुआ है. खासकर कम इनकम स्तर पर. हालांकि ये यह भी बताते हैं कि जब उच्च इनकम मानकों के आधार पर मापा जाता है तो गरीबी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. 

अत्यधिक गरीबी 

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पहला मानक अत्यधिक गरीबी को इस तरह बताता है कि कोई व्यक्ति हर दिन $3 से कम पर गुजारा कर रहा हो. 2021 की परचेसिंग पावर पैरिटी वैल्यू के आधार पर भारतीय मुद्रा में यह लगभग ₹58 प्रतिदिन के बराबर है. भारत में इस सीमा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आई है. 2011 में काफी ज्यादा गरीबी की दर 27.1% थी. 2023 तक यह घटकर 2.6% रह गई. इस कमी के बावजूद देश की बड़ी आबादी को देखते हुए लगभग 35 मिलियन लोग अभी भी अत्यधिक गरीबी रेखा के नीचे हैं. यह आंकड़े सबसे निचले इनकम स्तर के मामले में बड़ी प्रगति को दर्शाते हैं. लेकिन साथ ही यह भी बताते हैं कि लाखों लोग अभी भी घोर अभाव का सामना कर रहे हैं. 

निम्न मध्यम आय वर्ग में गरीबी 

दूसरा मानक गरीबी रेखा को 4.20 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से कम इनकम पर तय करता है. यह भारतीय मुद्रा में लगभग ₹350 से ₹400 के बराबर है. विश्व बैंक इस मानक को भारत जैसे विकासशील और निम्न मध्यम इनकम वाले देशों के लिए खास तौर से उपयुक्त मानता है. इस रेखा से नीचे रहने वाली भारत की आबादी का हिस्सा 2011 में 57.7% से घटकर 2023 में 16.1 प्रतिशत हो गया. रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक 12 सालों में लगभग 496 मिलियन लोग यानी करीब 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए.

यह पैमाना अत्यधिक गरीबी रेखा की तुलना में एक बड़ा नजरिया देता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें दैनिक इनकम की एक उच्च सीमा का इस्तेमाल किया गया है. इस वजह से इसमें आई कमी आबादी के एक काफी बड़े हिस्से में हुए सुधार को दर्शाती है. हालांकि 2023 में भी 16.1% लोग इस मानक से नीचे थे. 

उच्च मध्यम आय वाली गरीबी 

तीसरे मानक में प्रतीक व्यक्ति 8.30 की दैनिक इनकम सीमा का इस्तेमाल किया गया है. यह गरीबी को मापने के लिए एक उच्च मानक देता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही भारत में अत्यधिक गरीबी लगभग खत्म होने की कगार पर हो लेकिन जब इस उच्च मध्यम आय वाली सीमख के आधार पर मापा जाता है तो गरीबी दर अभी भी काफी ज्यादा बनी हुई है.  यह अंतर जरूरी है. कोई व्यक्ति अत्यधिक गरीबी रेखा से ऊपर तो हो सकता है लेकिन आय के एक उच्च मानक वाले पैमाने के हिसाब से वह अभी भी गरीबी रेखा के नीचे आ सकता है. 

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आय से परे गरीबी 

गरीबी को मापने का एकमात्र तरीका सिर्फ इनकम नहीं है. बहुआयामी गरीबी सूचकांक तीन क्षेत्रों में अभाव को ध्यान में रखता है. स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर. यह सिर्फ लोगों की मौद्रिक इनकम पर निर्भर रहने के बजाय यह दिखाता है कि क्या उनके पास बुनियादी सुविधा और जरूरी जीवन स्थितियों तक पहुंच है. 

ऑक्सफोर्ड और विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के आधार पर मापी गई गरीबी 2005-6 में 53.8 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 15.5% हो गई. इन सुविधाओं में पक्का घर, बिजली, साफ पानी, स्वच्छता और खाना पकाने के लिए गैस जैसी चीजें शामिल हैं.

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