Putin Security: जिस तरह भारत एसपीजी पर निर्भर करता है और अमेरिका सीक्रेट सर्विस पर इसी तरह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक शक्तिशाली एजेंसी पर है. इस एजेंसी को फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस के नाम से जाना जाता है. इस संगठन को आमतौर पर एफएसओ कहा जाता है. यह दुनिया की सबसे गुप्त और एडवांस्ड सुरक्षा बलों में से एक है. इसका काम न सिर्फ राष्ट्रपति की बल्कि प्रमुख सरकारी संस्थाओं की भी सुरक्षा करना है. 

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पुतिन की निजी सुरक्षा 

पुतिन की सुरक्षा के लिए एक खास डिवीजन है जिसे प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस कहा जाता है. यह फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस के तहत काम करता है. यह खास यूनिट हर समय राष्ट्रपति की निजी सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होती है. अब भले ही वे क्रेमलिन में हों, यात्रा कर रहे हों या फिर सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हों. उनके ऑपरेशन काफी गोपनीय होते हैं.

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मस्कटियर्स और उनके हथियार 

पुतिन के निजी अंगरक्षकों को अक्सर मस्कटियर्स कहा जाता है. ये काफी ज्यादा प्रशिक्षित कमांडो होते हैं जो 9mm SR-1 Vektor पिस्टल जैसे एडवांस्ड हथियारों से लैस होते हैं. उनका प्रशिक्षण सिर्फ युद्ध कौशल तक ही सीमित नहीं है. वे निकट सुरक्षा, क्विक रिस्पांस और जरूरत पड़ने पर अपने शरीर से राष्ट्रपति को बचाने के लिए भी तैयार रहते हैं. 

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चार स्तरीय सुरक्षा कवच 

पुतिन की सुरक्षा को एक बहु स्तरीय रक्षा प्रणाली के रूप में डिजाइन किया गया है. इसे भेदना काफी ज्यादा मुश्किल है. पहली परत में उनके तत्काल अंगरक्षक शामिल होते हैं. इसके बाद भीड़ के बीच तैनात गुप्त एजेंट आते हैं. तीसरी परत में रणनीतिक स्थानों पर तैनात स्नाइपर शामिल होते हैं. वहीं सबसे बाहरी परत में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों होती हैं. जैसे रिमोट हमलों को रोकने के लिए सिगनल जैमर. यह अदृश्य घेरा इस बात को पक्का करता है कि खतरे करीब आने से पहले ही बेअसर कर दिए जाएं.

परमाणु प्रणालियों पर नियंत्रण 

फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस की भूमिका सिर्फ भौतिक सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है. यह रूस के परमाणु ब्रीफकेस का भी प्रबंधन करता है. इसे Cheget के नाम से जाना जाता है. यह उपकरण देश की परमाणु कमान प्रणाली का हिस्सा है और इसका इस्तेमाल वैश्विक संघर्ष जैसे मुश्किल हालातों में किया जाता है.

काफी मुश्किल चयन प्रक्रिया 

पुतिन की सुरक्षा टीम का हिस्सा बनना काफी ज्यादा मुश्किल है. उम्मीदवारों को कठोर शारीरिक मानकों को पूरा करना होता है. उन्हें चरम स्थितियों में काम करने में सक्षम होना होता है. विदेश यात्राओं के दौरान भी पुतिन को परोसे जाने वाले भोजन की पहले सुरक्षा कर्मियों द्वारा जांच की जाती है. ऐसा इसलिए ताकि जहर दिए जाने के किसी भी जोखिम को खत्म किया जा सके.

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