सोने की चमक सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत ढाल होती है. एक वक्त पर भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन फिर विदेशी हमलावरों ने यहां का सोना भर-भरकर लूटा और सब सोना खाली कर दिया. लेकिन आज भी लोग संकट के समय सोने को बड़ा हथियार मानते हैं. वैसे तो आज के दौर में डॉलर सबसे बड़ी करेंसी है, लेकिन मुसीबत के वक्त असली सहारा सोना ही होता है. इसीलिए दुनिया के तमाम देश अपना सोना सुरक्षित तिजोरियों में जमा कराते हैं. दिलचस्प बात यह है कि भारत ने न सिर्फ अपना सोना विदेशों में सुरक्षित रखा है, बल्कि दुनिया के कुछ देश ऐसे भी हैं, जो कि भारत की साथ पर भरोसा करके अपना सोना हमारे पास जमा कराते हैं, चलिए उनके बारे में जानें.

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कहां सुरक्षित है हिंदुस्तान का खजाना?

भारत के पास मौजूद कुल स्वर्ण भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा देश के अंदर ही बेहद सुरक्षित तिजोरियों में रखा हुआ है. आंकड़ों की मानें तो आरबीआई अपने सोने का कुल लगभग 77 फीसदी हिस्सा घरेलू वॉल्ट्स में रखता है, जो कि मुंबई में स्थित है. इसके अलावा बाकी का बचा हुआ सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन जरूरतों और व्यापारिक सहूलियतों के लिए विदेशी सरजमीं पर जमा किया जाता है. भारत अपना यह विदेशी सोना मुख्य रूप से ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक यानि बैंक ऑफ इंग्लैंड की सुरक्षित तिजोरियों में रखता है.

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भारत की तिजोरी में किन देशों का सोना?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या भारत भी दुनिया के दूसरे देशों के सोने का रखवाला है? तो इसका जवाब है, हां. दुनिया के कुछ छोटे और मित्र देश भारत की सुरक्षा व्यवस्था और हमारी साख पर पूरा भरोसा करते हैं. इन देशों में मालदीव, फिजी और सेशेल्स जैसे नाम शामिल हैं, जो अपने राष्ट्रीय स्वर्ण भंडार का एक हिस्सा भारत की तिजोरियों में सुरक्षित रखते हैं. इन देशों को लगता है कि भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भारत में उनका सोना रखना पूरी तरह से सुरक्षित और आर्थिक रूप से फायदेमंद है.

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किन नियमों के तहत होती है विदेशी सोने की सुरक्षा?

विदेशी देशों के सोने को अपने पास रखने और उसकी सुरक्षा करने के लिए बेहद कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम बनाए गए हैं. भारत में इस पूरे सोने का प्रबंध और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक के पास होती है. आरबीआई ही यह तय करता है कि देश के अंदर और बाहर रखे सोने को किस कानूनी ढांचे के तहत संभाला जाएगा. केंद्रीय बैंक ही यह सुनिश्चित करता है कि यहां रखा एक-एक ग्राम सोना पूरी तरह से सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर संबंधित देश बिना किसी कानूनी अड़चन के अपने सोने का इस्तेमाल या निकासी कर सकें.

विदेशी लेन-देन को बनाता है आसान

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे के पास सोना रखने की यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे कई बड़े व्यापारिक हित शामिल होते हैं. जब कोई देश किसी दूसरे देश में अपना सोना रखता है, तो उसे वैश्विक बाजार में आयात-निर्यात और बड़े भुगतानों के निपटारे में काफी आसानी हो जाती है. इसके अलावा अगर किसी देश में अचानक राजनीतिक अस्थिरता या युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो दूसरे सुरक्षित देश में रखा उनका सोना उनकी अर्थव्यवस्था को डूबने से बचा लेता है. यही वजह है कि सोने को बचत से ज्यादा बचाव का साधन कहते हैं.

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