मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में जनआक्रोश तेजी से उफान पर है और लोग अपनी विभिन्न मांगों को लेकर खुलकर सड़कों पर उतर रहे हैं. भारत में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनावी सुधारों को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है, तो वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई मुल्कों में राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है. खास बात यह है कि दुनिया के कम से कम सात प्रमुख देशों में इस वक्त बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जहां कहीं सरकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं तो कहीं शिक्षा का अधिकार और व्यवस्था मुख्य मुद्दा बन चुकी है.
भारत में मतदाता सूची और चुनावी सुधारों पर घमासान
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी भारत में इन दिनों राजनीति का पारा पूरी तरह चढ़ा हुआ है. देश की राजधानी दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. विपक्ष के प्रमुख नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा से जुड़ी हुई है. इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें भी सामने आई हैं, जिसके चलते देश का राजनीतिक माहौल काफी गर्म चल रहा है.
पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल और आपातकाल के हालात
भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में राजनीतिक हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनकी पार्टी के नेताओं पर हो रही कार्रवाई के विरोध में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है. स्थिति को नियंत्रित करने और विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में गवर्नेंस और व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. आम जनता और राजनीतिक कार्यकर्ता वर्तमान हुकूमत के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
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यूरोप के फ्रांस में शिक्षा प्रणाली को लेकर सुलगता असंतोष
यूरोपीय देशों में शुमार फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत तमाम बड़े शहरों में पिछले काफी समय से शिक्षा सुधारों को लेकर कड़ा विरोध देखने को मिल रहा है. छात्र और शिक्षक समुदाय का एक बड़ा वर्ग मौजूदा अकादमिक व्यवस्था और नीतियों में बदलाव की मांग कर रहा है. जानकारों का मानना है कि शिक्षा के स्तर और प्रशासनिक सुधारों को लेकर उठ रही इन आवाजों ने यूरोपीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यहां विरोध का यह तरीका लगातार व्यापक रूप लेता जा रहा है.
स्पेन और ब्रिटेन में आवास संकट और अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर बवाल
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में इन दिनों आवास की भारी किल्लत और नागरिकों की बेदखली के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर साफ नजर आ रहा है. इस गंभीर सामाजिक संकट और बढ़ते दबाव के कारण देश की राजनीतिक स्थिरता पर भी असर पड़ा है. दूसरी ओर, यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों विशेषकर फिलिस्तीन के समर्थन और विरोध में विभिन्न समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं. इसके अलावा दक्षिणपंथी संगठनों की सक्रियता ने ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था के सामने भी नई चुनौतियां पेश कर दी हैं.
लैटिन अमेरिकी देश चिली और पश्चिम एशिया के इजराइल में सुलगता आक्रोश
लैटिन अमेरिका के चिली देश में छात्रों ने शिक्षा बजट में की गई भारी कटौती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे परिसरों से लेकर सड़कों तक हलचल तेज हो गई है. ठीक इसी प्रकार, पश्चिम एशिया के इजराइल में तेल अवीव शहर के भीतर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों और सुरक्षा विफलताओं के खिलाफ जनता लगातार विरोध दर्ज करा रही है. देश के भीतर राजनीतिक नेतृत्व पर उठ रहे इन सवालों के बीच चुनावी माहौल और ज्यादा गर्माता जा रहा है.
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