Independence Day 2026: देश इस साल आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर रहा है. 15 अगस्त 1947 से शुरू हुआ आजाद भारत का सफर सिर्फ तारीखों और सालों का सफर नहीं है, बल्कि यह उन आंदोलनों और संघर्षों की याद भी दिलाता है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी. इन्हीं ऐतिहासिक घटनाओं में महात्मा गांधी का दांडी मार्च भी शामिल है.

Continues below advertisement

महात्मा गांधी की दांडी यात्रा साल 1930 में नमक कानून के विरोध में शुरू हुई. आज भी इस रास्ते को दांडी पथ के रूप में ऐतिहासिक महत्व के साथ देखा जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि महात्मा गांधी ने कहां से कहां तक दांडी मार्च किया था और आज वो रूट कैसा है. 

महात्मा गांधी ने कहां से कहां तक किया था दांडी मार्च?

Continues below advertisement

महात्मा गांधी ने दांडी मार्च साबरमती आश्रम से दांडी के समुद्र तट तक किया था. महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से दांडी मार्च की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य अंग्रेजों के लगाए गए नमक कर और नमक कानून का विरोध करना था. उस समय नमक हर व्यक्ति की जरूरत थी और गांधीजी का मानना था कि नमक पर लगाया गया कर आम लोगों, खासकर गरीबों के लिए अन्यायपूर्ण था. गांधीजी ने समुद्र के किनारे स्थित दांडी पहुंचकर खुद नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून तोड़ने का फैसला किया था. इस यात्रा को नमक सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है. 

करीब 390 किलोमीटर का था सफर

दांडी मार्च के दौरान गांधी जी और उनके साथ चलने वाले लोगों ने करीब 390 किलोमीटर की दूरी तय की थी. यात्रा 12 मार्च को शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़ा गया. इस दौरान रोजाना करीब 24 किलोमीटर तक पैदल चलने की जानकारी दी गई है. इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान गांधीजी ने रास्ते में कई जगहों पर लोगों से मुलाकात की. उन्होंने खादी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया, नशा मुक्ति और छुआछूत के खिलाफ संदेश दिया और कई स्थानों पर सभाएं भी कीं. 

यह भी पढ़ें -Pakistan Independence Day: पाकिस्तान को 14 अगस्त को आजादी क्यों मिली, क्या थी इसकी वजह?

आज कैसा है दांडी मार्च का रूट?

आज साबरमती आश्रम से दांडी तक का ऐतिहासिक मार्ग दांडी पथ के रूप में विकसित किया गया है. इस रास्ते पर 21 ऐतिहासिक स्थान हैं, जहां गांधीजी ने यात्रा के दौरान रुककर लोगों से मुलाकात की थी. इन जगहों पर स्मारक, गांधी आश्रम और यात्रियों के ठहरने की सुविधाएं भी मौजूद हैं. गुजरात टूरिस्ट की ओर से इस ऐतिहासिक रास्ते को लोगों के लिए एक्सपीरियंस करने का अवसर दिया गया है. आज लोग दांडी पथ पर पैदल चलने, साइकिल चलाने, कार या बस से यात्रा करने का एक्सपीरियंस ले सकते हैं. रास्ते में ठहरने और खाने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं. 

दांडी पथ पर आज भी होती हैं एक्टिविटी

दांडी पथ के 21 स्थानों पर मेले, त्योहार और अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ बच्चे, विद्यार्थी, युवा और दूसरे लोग भी हिस्सा लेते हैं. यह रास्ता गांधीजी के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समझने का माध्यम भी बना हुआ है. 

यह भी पढ़ें -ब्रिटिश सरकार से अपना कर्ज कैसे वापस ले सकता है रुठिया परिवार? जानें तरीका