जहां एक ओर महिलाएं दुनिया की सबसे ऊंची कुर्सियों तक पहुंच चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर एशिया के कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां महिला नेतृत्व की कल्पना तक करना नामुमकिन लगता है. ये वो जगहें हैं जहां कानून, परंपराएं और समाज की सोच आज भी महिलाओं को सत्ता की चौखट पर रुकने को मजबूर करती हैं. सवाल ये है कि जब दुनिया बराबरी की बात कर रही है, तब भी एशिया के इन देशों में प्रधानमंत्री की कुर्सी सिर्फ पुरुषों के नाम क्यों लिखी गई है? चलिए जानते हैं.
सऊदी अरब और कतर जैसे देश
सऊदी अरब, कतर, और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में संविधान या शासन प्रणाली महिलाओं को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की अनुमति ही नहीं देती है. इन देशों में राजशाही का शासन है, जहां सत्ता का हस्तांतरण केवल पुरुष शाही परिवारों के भीतर होता है. महिलाएं यहां कुछ मंत्रिपदों तक जरूर पहुंची हैं, लेकिन देश की सर्वोच्च कार्यकारी कुर्सी से अभी भी बहुत दूर हैं.
उत्तर कोरिया और चीन
उत्तर कोरिया में किम परिवार की सत्ता ने किसी महिला को अब तक नेतृत्व का मौका नहीं दिया है. देश की सत्तारूढ़ पार्टी में महिलाएं मौजूद हैं, पर उनका प्रभाव सीमित है. वहीं चीन में भी अब तक कोई महिला प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बनी है. हालांकि कई महिलाओं ने कम्युनिस्ट पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, पर सत्ता के असली केंद्र से वे हमेशा दूर रखी गई हैं.
जापान और दक्षिण कोरिया की स्थिति
जापान ने हाल ही में साने ताकाइची के रूप में पहली महिला प्रधानमंत्री पाकर इतिहास रचा, लेकिन इससे पहले लंबे समय तक देश में पुरुष वर्चस्व ही कायम था. इसके विपरीत दक्षिण कोरिया में एक समय पार्क ग्यून-हे राष्ट्रपति बनी थीं, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा. इस घटना ने कोरिया में महिला नेतृत्व की छवि को भी झटका मिला था.
अफगानिस्तान और ईरान जैसे देश
अफगानिस्तान और ईरान में महिलाओं के लिए राजनीति लगभग निषिद्ध क्षेत्र है. तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान में महिलाएं न तो शिक्षा के अधिकार का पूरा उपयोग कर पाती हैं, न ही राजनीतिक भागीदारी की स्वतंत्रता रखती हैं. ईरान में भी धार्मिक कानून महिलाओं को शीर्ष राजनीतिक पदों तक पहुंचने से रोकते हैं.
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