Maldives Religion Laws: हिंद महासागर में भारत के सबसे करीबी पड़ोसियों में से एक मालदीव अपने शानदार रिसोर्ट और खूबसूरत समुद्र तटों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इस देश में धर्म से जुड़े दुनिया के कुछ सबसे कड़े कानून भी लागू हैं. यहां के कानूनी ढांचे के मुताबिक इस्लाम के अलावा दूसरे धर्म का सार्वजनिक रूप से पालन करने पर पूरी तरह रोक है और गैर इस्लामी पूजा स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं है. यही वजह है कि विदेशी निवासियों और पर्यटकों को यहां रहने के दौरान धार्मिक गतिविधि से जुड़े कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है. 

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गैर इस्लामी धार्मिक प्रथाओं पर कड़े कानून 

मालदीव इस्लाम को अपना राजकीय धर्म मानता है. साथ ही इसका संविधान दूसरे धर्म के सार्वजनिक पालन पर रोक लगाता है. देश के कानून के तहत सार्वजनिक पूजा, धार्मिक सभाओं और गैर इस्लामी धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. यह नियम सिर्फ नागरिकों पर ही नहीं बल्कि मालदीव में रहने वाले या फिर काम करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी लागू होते हैं. 

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मंदिरों के निर्माण पर रोक 

मालदीव में हिंदू मंदिरों और चर्चों के साथ गैर इस्लामिक पूजा स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं है. दूसरे धर्म से जुड़ी धार्मिक गतिविधि सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम नहीं की जा सकती. 

विदेशी नागरिकों और पर्यटकों से स्थानीय धार्मिक कानून का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है. सार्वजनिक रूप से धार्मिक समारोह आयोजित करने या फिर गैर इस्लामी धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शित करने पर मालदीव के कानून के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है. उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर सजा में हिरासत, जुर्माना या फिर जेल की सजा भी शामिल हो सकती है.

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नागरिकता धर्म से जुड़ी है 

मालदीव के कानून के तहत नागरिकता के लिए इस्लाम का पालन करना जरूरी है. देश का संविधान यह प्रावधान करता है कि सिर्फ मुसलमान ही मालदीव के नागरिक हो सकते हैं. 

हजारों भारतीय और श्रीलंकाई नागरिक जिनमें कुछ हिंदू में शामिल हैं मालदीव में हेल्थ केयर, शिक्षा, निर्माण, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं. उन्हें आमतौर पर अपने घरों या फिर रहने की जगह पर निजी तौर पर अपने धर्म का पालन करने की अनुमति होती है. हालांकि ये धार्मिक गतिविधि निजी होनी चाहिए और इनमें सार्वजनिक सभाएं, प्रदर्शन या फिर समारोह शामिल नहीं होने चाहिए.

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