दुनिया इस वक्त एक अजीब दौर से गुजर रही है. कहीं युद्ध की आग सुलग रही है तो कहीं कूटनीति की तलवारें खिंची हुई हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वर्ल्ड वॉर-3 होगा या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि अगर हुआ तो इसकी पहली चिंगारी कहां से उठेगी? क्या यूरोप फिर युद्धभूमि बनेगा, या एशिया से दुनिया हिल जाएगी? यहां जानिए.

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वर्ल्ड वॉर-3 की आशंका क्यों जताई जा रही है?

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक राजनीति में तनाव लगातार बढ़ा है. रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष, चीन-ताइवान विवाद और नाटो बनाम रूस की तल्खी ने दुनिया को दो गुटों में बांट दिया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब बड़े देश सीधे या परोक्ष रूप से आमने-सामने खड़े हों, तब एक छोटी घटना भी बड़े युद्ध की वजह बन सकती है. इसी कारण तीसरे विश्व युद्ध की चर्चा बार-बार सामने आती है.

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नाटो और रूस के बीच सबसे बड़ा खतरा

अगर इतिहास देखें तो पहले और दूसरे विश्व युद्ध की जड़ें भी यूरोप में ही थीं. आज भी पूर्वी यूरोप सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जा रहा है. यूक्रेन युद्ध में अमेरिका और नाटो देश खुले तौर पर यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं, जबकि रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है. यदि नाटो और रूस के बीच सीधा सैन्य टकराव हुआ, तो यह वर्ल्ड वॉर-3 की शुरुआत मानी जा सकती है. कई एक्सपर्ट्स के अनुसार बाल्टिक देश और पोलैंड जैसे इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में हैं.

पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा इलाका

मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया को लंबे समय से संघर्ष का केंद्र माना जाता है. इजरायल, ईरान, अमेरिका और अरब देशों के बीच तनाव कभी भी भड़क सकता है. अगर इजरायल-ईरान के बीच सीधा युद्ध हुआ और अमेरिका इसमें कूद पड़ा, तो हालात तेजी से वैश्विक युद्ध में बदल सकते हैं. तेल, धार्मिक टकराव और सामरिक ठिकाने इस क्षेत्र को और भी संवेदनशील बनाते हैं. 

कौन सा एरिया बन सकता है पिन पॉइंट?

आज की तारीख में कई रणनीतिक जानकार मानते हैं कि वर्ल्ड वॉर-3 की सबसे मजबूत आशंका एशिया-प्रशांत क्षेत्र से है. खासकर ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा का समर्थन करता है. अगर चीन ने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की, तो अमेरिका, जापान और अन्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं. यही टकराव वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है.

कौन-कौन से देश हो सकते हैं आमने-सामने? 

रिपोर्ट्स की मानें तो एक गुट में अमेरिका, नाटो देश, यूरोपीय ताकतें और उनके सहयोगी होंगे. दूसरे गुट में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और कुछ मध्य-पूर्वी देश शामिल हो सकते हैं. यह टकराव सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष तक फैल सकता है. परमाणु हथियारों की मौजूदगी इस खतरे को और गंभीर बना देती है. 

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