Pakistan Education Board: भारत में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन स्कूल एजुकेशन को चलाने वाले सबसे जाने माने नेशनल लेवल के बोर्ड में से एक है. इसी तरह पाकिस्तान में फेडरल लेवल के एजुकेशन बोर्ड की भूमिका फेडरल बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन निभाता है.  आइए जानते हैं कि वहां पर एग्जाम कैसे होते हैं और उनका बोर्ड सिस्टम कैसे काम करता है.

पाकिस्तान में बड़े एजुकेशन बोर्ड 

पाकिस्तान का एजुकेशन सिस्टम मुख्य रूप से फेडरल और प्रोविंशियल बोर्ड में बांटा हुआ है. फेडरल बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन का हैडक्वाटर इस्लामाबाद में है और यह फेडरल सरकार के अंदर काम करता है. यह फेडरल टेरिटरी, कैंटोनमेंट एरिया और विदेशों में पाकिस्तानी इंस्टीट्यूशन में मौजूद स्कूलों की देखरेख करता है. स्ट्रक्चर और रेपुटेशन में इसकी तुलना अक्सर भारत के सीबीएसई से की जाती है. 

फेडरल बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन के साथ हर प्रोविंस का अपना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन होता है. जैसे पंजाब में बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन लाहौर है. इसी के साथ सिंध में बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन कराची है. इसके अलावा आगा खान यूनिवर्सिटी एग्जामिनेशन बोर्ड जैसे प्राइवेट एग्जामिनेशन बोर्ड भी हैं. इनका मकसद ज्यादा कॉन्सेप्ट बेस्ड एसेसमेंट को बढ़ावा देना है. 

एजुकेशन लेवल 

पाकिस्तान में स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई  मोटे तौर पर दो बड़े एग्जामिनेशन लेवल पर बंटी हुई है. पहला स्टेज सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट है जिसे आमतौर पर मैट्रिकुलेशन के नाम से जाना जाता है. इसमें ग्रेड 9 और 10 शामिल हैं.

दूसरा स्टेज हायर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट है. इसे इंटरमीडिएट या F.Sc. भी कहा जाता है. इसमें ग्रेड 11 और 12 शामिल हैं. यह स्टेज यूनिवर्सिटी एडमिशन और मेडिसिन और इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल फील्ड के लिए काफी जरूरी है. 

एग्जामिनेशन पैटर्न और मार्किंग सिस्टम 

ज्यादातर पाकिस्तानी बॉर्डर सालाना एग्जाम कंडक्ट करते हैं. यह आमतौर पर मार्च और मई के बीच होते हैं. सप्लीमेंट्री एग्जाम भी उन स्टूडेंट के लिए ऑर्गेनाइज किए जाते हैं जो एक या ज्यादा सब्जेक्ट में फेल हो जाते हैं. पारंपरिक तौर से मैट्रिक और इंटरमीडिएट एग्जाम की यह कहकर आलोचना की जाती है कि वह रट्टा मारने वाले होते हैं. इनमें टेक्स्टबुक का कंटेंट याद करने पर ज्यादा जोर दिया जाता है. कुछ सालों में खासकर फेडरल और कुछ प्रांतीय सुधारों के तहत ज्यादा कॉन्सेप्चुअल और एनालिटिकल सवाल लाने की कोशिश की गई है. इतना ही नहीं बल्कि मार्किंग सिस्टम भी भारत जैसा ही है. विद्यार्थियों को एक तय टोटल में से मार्क्स मिलते हैं. अक्सर एसएससी या एचएसएससी के लिए लगभग 1100 मार्क्स और मेरिट पोजीशन ओवरऑल परफॉर्मेंस के आधार पर दी जाती है.

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