अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को कड़ा संदेश दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कनाडा चीन के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार समझौता करता है, तो अमेरिका उसके ऊपर पूरी तरह से 100% टैरिफ लागू कर देगा. अमेरिका की ये तानाशाही लगभग ज्यादातर देशों के साथ हो रही है. वो किसी देश को तेल का व्यापार करने से रोकता है, तो कभी किसी देश पर कुछ और प्रतिबंध लगा देता है. आइए जानें कि अगर अमेरिका और चीन में सीधी टक्कर हो जाती है तो कौन किसपर भारी पड़ेगा.
दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना
अमेरिका हमेशा से मिलिट्री ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता में दुनिया के सबसे आगे रहा है. ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार अमेरिका की आर्मी, एयरफोर्स और नेवी किसी भी देश के मुकाबले सबसे मजबूत हैं. वर्तमान में अमेरिका की आर्मी में लगभग 14 लाख जवान तैनात हैं, जबकि एयरफोर्स में 7 लाख और नेवी में लगभग 6 लाख से ज्यादा सैनिक हैं.
अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 1,790 फाइटर जेट और 5,000 हेलीकॉप्टर शामिल हैं. इसके अलावा, अमेरिकी आर्मी अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, जिसमें ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और अत्याधुनिक टैंक शामिल हैं. अमेरिका परमाणु हथियारों में भी शीर्ष स्तर पर है, जिसका अर्थ है कि देश में संघर्ष होने पर क्षति का स्तर अत्यधिक होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ताकत सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और वैश्विक युद्ध रणनीतियों में भी है. अमेरिका की नौसेना, दुनिया के किसी भी महासागर में तैनात होने और संचालन करने में सक्षम है, इसलिए अमेरिका को सीधे टकराव में चुनौती देना बेहद कठिन काम है.
ड्रैगन भी किसी से कम नहीं
ताकत के मामले में चीन भी पीछे नहीं है. ग्लोबल फायर पॉवर के अनुसार चीन की सेना तीसरे स्थान पर है और इसे 0.0788 पॉवर इंडेक्स अंक मिला है. चीन की आर्मी में 25 लाख से ज्यादा जवान हैं, एयरफोर्स में 4 लाख से अधिक और नौसेना में लगभग 3.8 लाख सैनिक तैनात हैं.
चीन के पास 3,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट, 1,212 फाइटर जेट और 281 अटैक हेलीकॉप्टर हैं. चीन की सेना आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस है. इसके अलावा, चीन भी परमाणु संपन्न देश है और हाल के वर्षों में अपनी मिसाइल प्रणाली और समुद्री ताकत में काफी सुधार कर रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की शक्ति सिर्फ संख्या में ही नहीं, बल्कि उसकी रणनीति और क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर दी गई तैयारी में भी है. चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय विवादों और सीमाओं पर शक्ति प्रदर्शन करता रहा है. यह उसकी वैश्विक दबदबे की नीति का हिस्सा है.
अगर जंग हुई तो क्या होगा?
दुनिया की दो महाशक्तियां, अमेरिका और चीन, यदि सीधे युद्ध में उतरें तो यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहेगी. इसका असर वैश्विक बाजार, तेल की कीमतों, खाद्य आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा. दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने के कारण टकराव की स्थिति बेहद विनाशकारी होगी.
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