Earth Water Origin: यह सुनने में काफी अजीब लग सकता है कि पृथ्वी पर मौजूद पानी खुद सूरज से भी पुराना कैसे हो सकता है. दरअसल ऐसा कहा जाता है कि सूरज की उम्र पृथ्वी से भी ज्यादा है, वहीं पृथ्वी पर मौजूद पानी सूरज से भी पुराना है. तो आखिर यह संभव कैसे है? आधुनिक खगोल भौतिकी के मुताबिक पृथ्वी के पानी का एक बड़ा हिस्सा असल में हमारे सौरमंडल के जन्म से भी पहले का है.

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सौर मंडल से पहले का पानी 

सूरज के बनने से काफी पहले अंतरिक्ष का वह क्षेत्र जहां अब हमारा सौरमंडल मौजूद है, गैस और धूल के बड़े बादलों से भरा हुआ था. इन्हें मॉलेक्युलर क्लाउड्स के नाम से जाना जाता है. इनमें जमी हुई बर्फ के रूप में पानी मौजूद था. इसका मतलब है कि सूरज के जलने से अरबों साल पहले ही अंतरिक्ष में पानी के अणु मौजूद थे.

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क्या है हैवी वॉटर?

वैज्ञानिकों ने हैवी वॉटर नाम के एक खास तरह के अणु का इस्तेमाल करके पानी की उम्र का पता लगाया है.  इसमें ड्यूटेरियम शामिल होता है, जो हाइड्रोजन का एक भारी रूप है. अंतरिक्ष के काफी ठंडे वातावरण में बनने वाले पानी में इसकी मात्रा ज्यादा होती है. जब शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के पानी की तुलना इंटरस्टेलर आइस से की तो उन्हें एक जैसे रासायनिक निशान मिले. 

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सूरज के जन्म ने सब कुछ नष्ट नहीं किया 

लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के आपस में सिमटने से सूरज का निर्माण हुआ था. इस प्रक्रिया से जबरदस्त गर्मी पैदा हुई जो आसपास के पानी को नष्ट कर सकती थी. हालांकि स्टडीज से यह पता चलता है कि इस प्राचीन बर्फ का 30% से 50% हिस्सा बच गया और सूरज के निर्माण के दौरान नष्ट होने से बच निकला.

यह प्राचीन पानी पृथ्वी तक कैसे पहुंचा?

बची हुई इंटरस्टेलर आइस धूमकेतु, क्षुद्रग्रह और ग्रहों के पदार्थ का हिस्सा बन गई. समय के साथ ये पिंड शुरुआती पृथ्वी से टकराए और अपने साथ वह पानी ले आए जो इस ग्रह के बनने से काफी पहले मौजूद था. आज पृथ्वी के महासागरों में मौजूद पानी का एक हिस्सा असल में अंतरिक्ष से ही आया है. 

यह विचार के पृथ्वी का पानी सूरज से भी पुराना है इस बात को बताता है कि हमारा ब्रह्मांड कितना प्राचीन और आपस में जुड़ा हुआ है. इससे पता चलता है कि जीवन के मूल तत्व पृथ्वी पर शुरू नहीं हुए थे बल्कि वे गहरे अंतरिक्ष से आए थे.

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