चीनी उद्योग भारत के सबसे बड़े कृषि आधारित उद्योगों में गिना जाता है, और गन्ना उत्पादक राज्यों में कई किसान अपनी खुद की शुगर मिल खोलने का सपना देखते हैं. हालांकि यह कोई सामान्य फैक्ट्री लगाने जैसा आसान काम नहीं है, क्योंकि चीनी को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत एक नियंत्रित वस्तु माना जाता है. इसका मतलब है कि इसकी उत्पादन क्षमता, दाम और बिक्री, सभी पर सरकार की नजर रहती है. अगस्त 1998 से चीनी उद्योग को लाइसेंस मुक्त कर दिया गया था, यानी अब कोई भी इच्छुक व्यक्ति कुछ शर्तें पूरी करके शुगर मिल लगा सकता है. आइए जानते हैं कि इसके लिए पूरी प्रक्रिया क्या है.

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जमीन और लोकेशन का चुनाव

सबसे पहले सही जगह और जमीन का चुनाव करना होता है, जो गन्ने के खेतों के करीब हो और जहां पानी, बिजली व परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से मिल सकें. जमीन खरीदने या लीज पर लेने के बाद स्थानीय प्रशासन से जरूरी मंजूरी और परमिट भी लेने होते हैं.

कहां करना होता है आवेदन?

शुगर मिल लगाने की अनुमति के लिए संबंधित राज्य के गन्ना आयुक्त यानी केन कमिश्नर और चीनी निदेशक के कार्यालय में आवेदन करना होता है. इस आवेदन के साथ आवेदक को अपने बिजनेस प्लान, कंपनी की डिटेल्स और अगर पहले से चीनी उद्योग में कोई अनुभव है, तो उसकी जानकारी भी जमा करनी होती है. इसके अलावा सर्वे ऑफ इंडिया से एक डिस्टेंस सर्टिफिकेट भी लेना पड़ता है, जो यह साबित करता है कि नई मिल तय दूरी के नियम का पालन कर रही है. इसी आधार पर केंद्र सरकार को इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर मेमोरेंडम यानी IEM के लिए आवेदन भेजा जाता है.

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कौन-कौन से लाइसेंस हैं जरूरी?

शुगर मिल शुरू करने के लिए सबसे पहले कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जो प्राइवेट लिमिटेड जैसे किसी भी उपयुक्त रूप में हो सकता है. इसके बाद इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट 1951 के तहत इंडस्ट्रियल लाइसेंस, फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत फैक्ट्री लाइसेंस और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण मंजूरी भी लेनी अनिवार्य है. इसके साथ ही FSSAI से फूड सेफ्टी लाइसेंस, स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस और बैंक गारंटी जमा करने जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं.

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बैंक गारंटी के बाद मिलती है मंजूरी

जरूरी दस्तावेज और बैंक गारंटी जमा करने के बाद सरकार आवेदक को एक एक्सेप्टेंस ऑर्डर जारी करती है, जिसमें यह दर्ज होता है कि उसकी मिल को नई चीनी फैक्ट्री के रूप में मान्यता दे दी गई है. इसके बाद केंद्र सरकार से IEM और उद्योग मित्र पोर्टल से मंजूरी मिलने पर ही मिल का निर्माण और संचालन शुरू किया जा सकता है.

हर सीजन में लेना होता है पेराई लाइसेंस

मिल तैयार होने के बाद भी हर साल गन्ना पेराई सीजन शुरू करने से पहले संबंधित राज्य के चीनी आयुक्त कार्यालय से अलग से क्रशिंग लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है. इसके लिए मिलों को तय समयसीमा में ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, पेराई लाइसेंस शुल्क और सुरक्षा जमा राशि जमा करनी होती है, साथ ही पिछले सीजन के गन्ने का पूरा भुगतान भी किसानों को किया गया होना चाहिए. बिना इस लाइसेंस के पेराई शुरू करने पर मिल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी हो सकती है.

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