Canteen In Tihar Jail: जेल और जुर्म का चोली-दामन का साथ है और जब भी देश की सबसे हाई-प्रोफाइल जेलों का जिक्र होता है तो तिहाड़ जेल का नाम सबसे पहले लिया जाता है. सलाखों के पीछे कैदी कैसी जिंदगी जीते हैं, एक आम आदमी को इसे जानने की बहुत उत्सुकता होती है. जेल में हजारों की संख्या में कैदी रहते हैं और उनके रोजमर्रा के सामानों के लिए जेल के अंदर कैंटीन भी चलाई जाती है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या एक आम नागरिक जेल के अंदर कैंटीन खोल सकता है कि नहीं. अगर ऐसा है तो इसकी क्या प्रक्रिया है, चलिए जानें.

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निजी दुकानों पर पाबंदी

अगर आप सोच रहे हैं कि पब्लिक मार्केट की तरह तिहाड़ जेल के अंदर कोई भी जाकर अपनी कॉमर्शियल कैंटीन खोल लेगा, तो आप बिल्कुल गलत हैं. तिहाड़ जेल प्रशासन किसी भी बाहरी शख्स या किसी निजी व्यवसायी को जेल परिसर के अंदर सीधे तौर पर किसी भी तरह की दुकानदारी की इजाजत नहीं देता है. सुरक्षा कारणों और सरकारी नियमों के चलते जेल के अंदर की पूरी व्यवस्था संभालने का जिम्मा सिर्फ सरकार के पास है.

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तिहाड़ के अंदर कौन चलाता है कैंटीन?

दरअसल तिहाड़ जेल के अंदर चलने वाली कैंटीन और उसमें होने वाली बिक्री पूरी तरह से दिल्ली जेल विभाग के द्वारा संचालित की जाती है. यह सब कैदियों के सुधार और पुनर्वास का एक हिस्सा है. जेल के अंदर मौजूद फैक्ट्रियों और बेकिंग के लिए सजा काट रहे कैदी खुद बेकरी का सामान, बिस्कुट, नमकीन, सरसों का तेल और फिनाइल आदि जैसी चीजें तैयार करते हैं. ऐसे में कैदियों को काम तो मिलता ही है, साथ ही साथ वे हुनर भी सीखते हैं.

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जेल में कैसे खुलती है कैंटीन?

अब सवाल है कि क्या कोई भी बाहरी शख्स या व्यवसायी जेल विभाग के साथ किसी तरह का बिजनेस कर सकता है कि नहीं. इसका जवाब है हां. अगर आप जेल फैक्ट्रियों के लिए कच्चा माल, बेकरी का कच्चा सामान, पैकेज्ड फूड सप्लाई करना चाहते हैं तो उसके लिए सरकारी टेंडर की प्रक्रिया होती है. इसके लिए दिल्ली जेल विभाग समय-समय पर अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर ई-टेंडर और सर्कुलर जारी करता है. 

वेंडर बनने की प्रक्रिया

अगर कोई इस सरकारी सिस्टम का हिस्सा बनना चाहता है तो उसके लिए कारोबारियों को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर एक वेंडर के रूप में रजिस्टर करना होता है. केवल रजिस्टर और योग्य ठेकेदार ही इस टेंडर में बोली लगाने के पात्र होते हैं. अगर आपके कागजात सही हैं और जेल प्रशासन की शर्तों पर खरे उतरते हैं तो जेल विभाग आपको वहां सामान सप्लाई करने का ठेका दे सकता है, लेकिन दुकान हमेशा जेल प्रशासन की ही होगी. 

जेल में कैदी करते हैं सामान की खरीद?

अब बाहर तो किसी भी सामान को खरीदने के लिए कैश या यूपीआई के जरिए पेमेंट कर सकते हैं, लेकिन जेल में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पैसों के लेन-देन का तरीका एकदम अलग होता है. तिहाड़ जेल के अंदर कोई भी कैदी भारतीय रुपये या किसी भी तरह क नकद लेन-देन नहीं कर सकता है. कैदियों को सामान खरीदने के लिए स्मार्ट कार्ड या टोकन की सुविधा दी जाती है. इसी टोकन को देकर वे जेल के अंदर सामान ले सकते हैं.

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