UP Bhawan Tender: उत्तर प्रदेश भवन में कैंटीन का कॉन्ट्रैक्ट अनौपचारिक रूप से नहीं दिया जाता. इसे एक व्यवस्थित सरकारी टेंडर प्रक्रिया के जरिए दिया जाता है. लेकिन खास बात यह है कि कोई भी आम आदमी इसके लिए आवेदन कर सकता है. बस शर्त यह है कि वह कोई रजिस्टर्ड बिजनेस चलाता हो और अधिकारियों द्वारा तय किए गए पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो. आसान शब्दों में कहें तो यह जान पहचान पर कम और नियमों के पालन, दस्तावेज और बोली पर ज्यादा निर्भर होता है.
टेंडर प्रक्रिया
यह कॉन्ट्रैक्ट संबंधित विभाग द्वारा ई टेंडर प्रणाली के जरिए से जारी किया जाता है. Government E marketplace और Uttar Pradesh E procurement वेबसाइट जैसे आधिकारिक पोर्टल पर समय-समय पर सूचनाएं जारी की जाती हैं. इच्छुक आवेदक इन प्लेटफार्म पर नियमित रूप से नजर बनाए रखते हैं. क्योंकि अवसर सीमित समय के लिए ही खुले रहते हैं. एक बार टेंडर जारी हो जाने के बाद आवेदकों को पोर्टल पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण करना होता है. इसी के साथ निर्धारित समय सीमा के अंदर अपनी बोलियां ऑनलाइन जमा करनी होती हैं.
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दो बोली प्रणाली
चयन प्रक्रिया दो चरणों वाले मूल्यांकन के आधार पर होती है. तकनीकी बोली में अधिकारी बिजनेस पंजीकरण, पिछले अनुभव, लाइसेंस और वित्तीय क्षमता जैसे दस्तावेजों की जांच करते हैं. सिर्फ वही आवेदक अगले चरण में पहुंचते हैं जो इस चरण में योग्य पाए जाते हैं.
वित्तीय बोली में आवेदक अपनी कीमतें बताते हैं. कॉन्ट्रैक्ट आमतौर पर उस बोलीदाता को दिया जाता है जो सभी तकनीकी जरूरतों को पूरा करता है और सबसे ज्यादा कॉम्पिटेटिव बोली लगाता है.
कौन आवेदन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति या फिर फर्म चाहे वह एकल स्वामित्व, साझेदारी या फिर कंपनी हो आवेदन कर सकता है. बस शर्त यह है कि वह कोई वैध कैटरिंग या फिर हॉस्पिटैलिटी बिजनेस चलाता हो. हालांकि उचित दस्तावेजों या फिर अनुभव के बिना आवेदन करने वाले सामान्य आवेदकों के योग्य पाए जाने की संभावना काफी कम होती है.
कौन से दस्तावेज होने चाहिए?
आवेदन पर विचार किए जाने के लिए आवेदकों के पास बिजनेस पंजीकरण प्रमाण पत्र, जीएसटी और पैन विवरण और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण से मिला हुआ एक वैध लाइसेंस होना चाहिए.
इसके अलावा आवेदकों से आमतौर पर कैंटीन चलाने का 2 से 3 साल का अनुभव दिखाने के भी उम्मीद की जाती है. इसी के साथ टर्नओवर प्रमाण पत्र और आयकर रिटर्न जैसे वित्तीय रिकॉर्ड भी मांगे जाते हैं. साथ ही आवेदन करते समय आवेदकों को एक बयाना राशि भी जमा करनी होती है. यह आमतौर पर 50000 या फिर उससे ज्यादा की होती है. यह राशि एक सुरक्षा राशि के तौर पर काम करती है. जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलता उन्हें राशि वापस कर दी जाती है.
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