मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है. तेल की कीमतों से लेकर, शिपिंग, व्यापार और महंगाई तक हर सेक्टर दबाव में है. लेकिन इसी वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच एक ऐसा देश भी है जो इस संकट से नुकसान के बजाय आर्थिक फायदा उठा रहा है, यह देश नॉर्वे हैं. जहां दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने लगी है, वहीं नॉर्वे की कमाई लगातार बढ़ रही है. यूरोप को ऊर्जा सप्लाई करने वाला यह देश अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच तेल और गैस की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है. यही वजह है कि अब नॉर्वे को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि वह इस पूरे तेल संकट को दूर बैठकर फायदे में बदल रहा है. 

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पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा के बीच बढ़ी चर्चा 

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा भी चर्चा में रही. ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया. पीएम मोदी ने कहा है कि दुनिया इस समय अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. ऐसे समय में भारत और यूरोप अपने रिश्तों के नए स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहे हैं. दोनों देशों ने हरित ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई. 

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अमेरिका-ईरान तनाव से क्यों चमकी नॉर्वे की किस्मत 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर पड़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बड़े खतरे के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है. जैसे ही यहां संघर्ष बढ़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछल गई. इसका सीधा फायदा नॉर्वे को मिला, क्योंकि रूस यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोप के लिए नॉर्वे सबसे बड़ा गैस सप्लायर बन चुका है. रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों की वजह से नॉर्वे हर दिन अरबों क्रोन (नॉर्वे की मुद्रा) एक्स्ट्रा कमा रहा है. नॉर्वे के बैंकिंग आंकड़ाें के अनुमान के अनुसार केवल गैस आयात से नॉर्वे रोजाना करीब 1.4 अरब क्राेन एक्स्ट्रा आय हो रही है, जबकि तेल को मिलाकर यह आंकड़ा दो अब क्रोनर से भी ऊपर पहुंच रहा है. 

दुनिया परेशान, लेकिन नॉर्वे की अर्थव्यवस्था मजबूत 

जहां कई देशों में महंगाई बढ़ने का डर है, वहीं नॉर्वे की स्थिति अलग दिखाई दे रही है. देश की सरकार बिजली सब्सिडी और मजबूत ऊर्जा निर्यात के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए हुए. हालांकि वहां भी पेट्रोल डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई, लेकिन ऊर्जा निर्यात से होने वाली कमाई ने सरकार की आय को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल और गैस के बढ़ते दाम नॉर्वे की अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सकते हैं.

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