18 karat Gold Price: अगर आप 18 कैरेट सोने के कड़े खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको बता दें कि फाइनल कीमत तीन मुख्य बातों पर निर्भर करती है. सोने का रेट, वजन और मेकिंग चार्ज, साथ ही जीएसटी और हॉल मार्किंग फीस. क्योंकि कड़ों को कारीगरी वाली ज्वेलरी माना जाता है इस वजह से इनकी कीमत रोजाना के सोने के रेट से काफी ज्यादा होती है. आइए जानते हैं की दो कड़ों की कीमत आखिर कितनी होगी.

Continues below advertisement

18 कैरेट सोने की कीमत 

18 कैरेट सोने का औसत बाजार भाव लगभग ₹11,760 प्रति ग्राम है. महिलाओं के कड़े आमतौर पर जोड़े में खरीदे जाते हैं और उनका कुल वजन 20 ग्राम से 40 ग्राम के बीच होता है. अगर हम दो कड़ों के लिए 25 ग्राम का एक सामान्य और आम विकल्प चुने तो सिर्फ सोने की कीमत ₹2,94,000 होगी. अगर आप 20 ग्राम वजन वाले थोड़े हल्के कड़े चुनते हैं तो सोने की कीमत लगभग ₹2,35,200 हो जाएगी. इस रकम में कारीगरी या फिर टैक्स शामिल नहीं है. 

Continues below advertisement

क्या होगा मेकिंग चार्ज 

मेकिंग चार्ज ज्वेलरी के फाइनल बिल का एक बड़ा हिस्सा होता है. क्योंकि महिलाओं के कड़े आमतौर पर नक्काशी, डिजाइन या फिर डिजाइनर एलिमेंट होते हैं, इस वजह से ज्वेलर्स सादी ज्वेलरी की तुलना में ज्यादा  कारीगरी की फीस लेते हैं.

ज्यादातर ज्वैलरी स्टोर में मेकिंग चार्ज सोने की कीमत का 8% से 18% तक होता है. यह डिजाइन की जटिलता पर निर्भर करता है. 25 ग्राम के कड़ों पर 12% मेकिंग चार्ज लगभग ₹35,280 का होगा.

जीएसटी और हॉलमार्क चार्ज 

भारत में सोने की ज्वेलरी पर 3% जीएसटी लगता है. स्टैंडर्ड मेकिंग चार्ज वाले 25 ग्राम के कड़ों के जोड़े के लिए सिर्फ जीएसटी का हिस्सा लगभग ₹9,878 का होगा. इसके अलावा सोने की शुद्धता को सर्टिफाई करने के लिए हॉलमार्किंग चार्ज भी लगाए जाते हैं. यह चार्ज 45 रुपये प्रति पीस, यानी कि दो कड़ों के लिए लगभग ₹90 होंगे.

क्या होगी कुल कीमत 

सभी कॉम्पोनेंट्स को मिलाकर अगर आप 12% मेकिंग चार्ज के साथ कुल 25 ग्राम वजन के दो 18 कैरेट के सोने के कड़े खरीदते हैं तो फाइनल बिल लगभग ₹3,39,158 का होगा.  अगर आप वजन कम कर के 20 ग्राम करवाते हैं तो यह कीमत 2,70,000 से 2,75,000 तक हो सकती है. अपनी खरीदारी फाइनल करने से पहले हमेशा कीमत का पूरा ब्रेकअप पूछें. इसमें सोने के रेट, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और हॉलमार्किंग शामिल हो. नॉन ब्रांडेड स्टोर पर मेकिंग चार्ज अक्सर मोलभाव करके कम किए जा सकते हैं और फेस्टिवल डिस्काउंट से कुल कीमत और भी कम हो सकती है.

ये भी पढ़ें: राजस्व और गैर-राजस्व जिलों में क्या होता है अंतर, ये एक-दूसरे से कितने होते हैं अलग?