प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पश्चिम एशिया की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है. गाजा, कूटनीति और नए समीकरणों के बीच भारत-इजरायल रिश्तों पर सबकी नजर है, लेकिन इस राजनीतिक चर्चा के साथ एक आर्थिक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इजरायल की मुद्रा भारतीय रुपये से कितनी मजबूत है? क्या वजह है कि छोटी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद उसका शेकेल दुनिया की मजबूत करेंसी में गिना जाता है?

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मोदी का इजरायल दौरा और कूटनीतिक माहौल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते बुधवार को इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने गाजा के पुनर्निर्माण को लेकर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक की थी. भारत इस पहल में सदस्य नहीं बना, लेकिन ऑब्जर्वर के रूप में जुड़ा रहा. 

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इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में भारत के साथ रिश्तों की खुलकर तारीफ की और पीएम मोदी को करीबी दोस्त बताया. दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, पानी प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है. राजनीतिक चर्चा के बीच अब आर्थिक पहलू भी ध्यान खींच रहा है, खासकर इजरायली की मुद्रा की ताकत. 

क्या है इजरायल की करेंसी?

इजरायल की आधिकारिक मुद्रा इजराइली न्यू शेकेल है. जिसे आम तौर पर शेकेल कहा जाता है. मौजूदा विनिमय दर के अनुसार 1 इजराइली शेकेल की कीमत लगभग 29 रुपये के आसपास है. यानी भारतीय रुपये की तुलना में शेकेल काफी मजबूत माना जाता है. मजबूती का मतलब यह नहीं कि इजरायल की अर्थव्यवस्था भारत से बड़ी है. असल में भारत की अर्थव्यवस्था आकार में कहीं ज्यादा बड़ी है, लेकिन मुद्रा की ताकत कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है. 

शेकेल मजबूत क्यों है?

इजरायल की अर्थव्यवस्था तकनीक पर आधारित है. साइबर सिक्योरिटी, डिफेंस टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कृषि नवाचार जैसे क्षेत्रों में उसने खास पहचान बनाई है. विदेशी निवेश भी वहां लगातार आता है. 

मुद्रा की मजबूती का एक बड़ा कारण वहां की नियंत्रित महंगाई दर है. जब किसी देश में महंगाई कम और स्थिर रहती है, तो उसकी मुद्रा की क्रय शक्ति बनी रहती है. इजरायल में महंगाई को संतुलित रखने के लिए केंद्रीय बैंक सक्रिय भूमिका निभाता है. Bank of Israel मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के जरिए बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है. यही वजह है कि शेकेल में बहुत ज्यादा अस्थिरता देखने को नहीं मिलती है.

रुपया और शेकेल का फर्क

भारतीय रुपया एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था की मुद्रा है. भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था जरूर है, लेकिन यहां महंगाई, आयात-निर्यात संतुलन और वैश्विक बाजार की स्थितियां मुद्रा को प्रभावित करती हैं. अगर तुलना करें तो 1 शेकेल लगभग 29 रुपये के बराबर है. इसका मतलब यह है कि इजरायल में भारतीय पर्यटकों को खर्च ज्यादा महसूस हो सकता है. होटल, खाना और स्थानीय सेवाएं रुपये में बदलने पर महंगी लगती हैं. 

हालांकि, मुद्रा की मजबूती को सीधे देश की ताकत से जोड़कर नहीं देखा जाता है. कई बार छोटी अर्थव्यवस्था की मुद्रा भी ज्यादा मजबूत हो सकती है, अगर वहां आर्थिक स्थिरता और कम महंगाई हो तो. 

व्यापार और निवेश का असर

भारत और इजरायल के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है. रक्षा सौदों से लेकर कृषि तकनीक तक, दोनों देशों के बीच सहयोग गहरा हुआ है. मजबूत मुद्रा विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाती है. शेकेल की स्थिरता का असर यह भी है कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसेमंद वित्तीय छवि बनाए रखता है. वहीं भारत का रुपया भी धीरे-धीरे वैश्विक लेनदेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

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