Deputy CM Salary: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद राज्य की पहली भाजपा सरकार में संभावित कैबिनेट नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो चुकी हैं. जिन नामों पर सबसे ज्यादा ध्यान जा रहा है उनमें रूपा गांगुली का नाम भी शामिल है. कुछ ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसी बीच आइए जानते हैं कि उपमुख्यमंत्री को कितनी सैलरी और भत्ते मिलते हैं और क्या यह विधायक की कमाई से ज्यादा होती है या फिर कम.

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उपमुख्यमंत्री की कमाई 

पश्चिम बंगाल में एक उपमुख्यमंत्री की सैलरी और भत्ते एक आम विधायक की तुलना में काफी ज्यादा होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को विधायकों की तय सैलरी के अलावा कुछ एक्स्ट्रा भत्ते, सरकारी सुविधा और आधिकारिक लाभ भी दिए जाते हैं.

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उपमुख्यमंत्री की मासिक आय 

राज्य की सैलरी संरचना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में किसी मंत्री या फिर उप मुख्यमंत्री की कुल मासिक कमाई भत्ते और आधिकारिक लाभों को मिलाकर लगभग 1.5 लाख से 2 लाख के बीच हो सकती है. हालांकि पश्चिम बंगाल सैलरी और भत्ते अधिनियम के मूल प्रावधानों के तहत आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध मूल सैलरी काफी कम है. यह मंत्रियों के लिए लगभग ₹11000 प्रति माह है. लेकिन कई भत्ते और सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधा को जोड़ने के बाद उनका कुल वित्तीय पैकेज काफी बड़ा हो जाता है.

अतिरिक्त लाभ 

एक उपमुख्यमंत्री को कई ऐसे विशेषाधिकार मिलते हैं जो आम विधायकों को नहीं मिलते. इनमें ₹4000 प्रति माह का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, ₹3300 प्रति माह का आतिथ्य भत्ता, आधिकारिक सरकारी आवास या फिर बंगला, सरकारी गाड़ी और परिवहन सुविधा, सुरक्षा घेरा और सहायक कर्मचारी और दफ्तरी मदद शामिल हैं.

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एक विधायक कितना कमाता है? 

इसकी तुलना में पश्चिम बंगाल में एक विधायक का मौजूदा कुल मासिक वेतन लगभग 1.1 लाख से 1.25 लाख के बीच होता है. इस राशि में मूल सैलरी के अलावा कई दूसरे घटक भी शामिल होते हैं. 

 एक विधायक की मूल सैलरी ₹50000 प्रति माह है. पहले यह रकम सिर्फ ₹10000 थी. लेकिन 2023 में मंजूर हुए और 2024 में गवर्नर की समिति के बाद लागू हुए संशोधन के बाद इस रकम को बढ़ा दिया गया.

विधायकों को और क्या मिलता है? 

विधायकों को अपने चुनाव क्षेत्र के लिए लगभग 10000 से 15000 का भत्ता, विधानसभा या फिर समिति बैठकों में शामिल होने के लिए लगभग ₹2000 का रोजाना का भत्ता, मेडिकल, यात्रा और संचार के लिए भत्ते दिए जाते हैं. इन सबको मिलकर उनकी कुल मासिक आमदनी 1.2 लाख से ज्यादा हो जाती है.

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