UPI ने भारत में पैसों के लेनदेन को इतना आसान बना दिया है कि अब सब्जी वाले से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह लोग सिर्फ एक क्लिक में पेमेंट कर देते हैं. यह सुविधा जितनी काम की है, उतनी ही यह जाने-अनजाने जेब पर भी असर डालती है. एक सर्वे के मुताबिक करीब 81 प्रतिशत लोग रोजाना UPI का इस्तेमाल करते हैं, और औसतन हर व्यक्ति रोजाना करीब 200 रुपये तक UPI से खर्च कर देता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह UPI का इस्तेमाल बंद कर दे और सिर्फ कैश में लेनदेन करे, तो क्या इससे उसकी हर महीने अच्छी-खासी बचत हो सकती है.

Continues below advertisement

क्यों UPI बढ़ाता है खर्च करने की आदत?

हालिया रिपोर्ट में भी यह बात सामने आ चुकी है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम लोगों में इम्पल्सिव यानी बिना सोचे-समझे खर्च करने की आदत बढ़ा देता है. जब पेमेंट सिर्फ एक क्लिक में हो जाती है, तो दिमाग को यह महसूस ही नहीं होता कि असल में पैसा खर्च हो रहा है, जबकि कैश में नोट गिनकर देने पर यह एहसास साफ बना रहता है. यही वजह है कि UPI लाइट जैसी सुविधाओं के आने के बाद अब लोग 5 से 10 रुपये जैसे बेहद छोटे पेमेंट भी डिजिटल तरीके से करने लगे हैं, जो पहले शायद इतनी आसानी से खर्च नहीं होते थे.

हर महीने कितनी हो सकती है बचत?

अगर औसतन कोई व्यक्ति रोजाना 200 रुपये यूपीआई से खर्च करता है, तो महीने के हिसाब से यह रकम करीब 6,000 रुपये तक पहुंच जाती है. अगर यह मान लिया जाए कि इसमें से 15 से 20 प्रतिशत खर्च सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि पेमेंट करना बेहद आसान है, यानी असल जरूरत के बिना किया गया खर्च, तो सिर्फ इसी हिस्से को रोककर हर महीने करीब 900 से 1,200 रुपये तक की बचत की जा सकती है. सालभर के हिसाब से देखा जाए तो यह रकम 10,000 से 14,000 रुपये तक पहुंच सकती है, जो किसी इमरजेंसी फंड या छोटी बचत योजना के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है.

Continues below advertisement

यह भी पढ़ें: UPI या Cash, किससे ज्यादा होती है पैसों की बचत?

क्या पूरी तरह UPI बंद करना सही तरीका है?

हालांकि एक्सपर्ट्स यह नहीं मानते कि यूपीआई पूरी तरह बंद कर देना ही बचत का सही तरीका है, क्योंकि इससे रोजमर्रा के जरूरी लेनदेन में भी काफी परेशानी हो सकती है. इसके बजाय एक बेहतर तरीका यह हो सकता है कि जरूरी और गैर-जरूरी खर्च के लिए अलग-अलग सीमा तय कर ली जाए. जैसे रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल जारी रखा जाए, लेकिन बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग या छोटे-मोटे शौक पर खर्च के लिए हफ्ते या महीने की एक तय सीमा बना ली जाए.

यह भी पढ़ें: कौन हैं हूती, जो कर रहे सऊदी पर हमला? जानें इसके पीछे की वजह