अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर आप हर महीने आने वाले महंगे बिजली बिल से स्थायी राहत पा सकते हैं. यदि सही योजना के साथ सोलर सिस्टम चुना जाए, तो बिजली का बिल बहुत कम हो सकता है और अनुकूल परिस्थितियों में यह शून्य तक भी पहुंच सकता है. हालांकि, सोलर पैनल से होने वाला वित्तीय फायदा और बचत कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है. इसमें आपके सोलर पैनल की क्षमता, घर का दैनिक बिजली खर्च, स्थानीय बिजली कंपनियों के रेट और सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक रियायत यानी सब्सिडी मुख्य भूमिका निभाती है. इस बारे में भावना त्यागी, सीनियर प्रोग्राम लीड, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने विस्तार से बात की है. आइए एक्सपर्ट से पूरी बात जानें.

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1 किलोवाट सोलर सिस्टम की लागत और सब्सिडी का गणित

भावना त्यागी का कहना है कि इसे एक आसान गणितीय उदाहरण से समझा जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर में 1 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल कराता है, तो उसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 50,000 रुपये बैठती है. केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत यदि उपभोक्ता को 30,000 रुपये की सब्सिडी मिल जाती है, तो उसकी वास्तविक जेब से लगने वाली राशि घटकर केवल 20,000 रुपये रह जाती है. इस प्रकार सरकारी प्रोत्साहन राशि से शुरुआती निवेश का बड़ा बोझ तुरंत कम हो जाता है, जिससे आम परिवारों के लिए इसे लगवाना काफी आसान हो जाता है.

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दैनिक बिजली उत्पादन और वार्षिक बचत की गणना

भावना त्यागी  की मानें तो मौसम अनुकूल रहने और अच्छी धूप मिलने पर 1 किलोवाट का सोलर प्लांट रोजाना करीब 4 यूनिट बिजली बनाता है. इस हिसाब से एक महीने में लगभग 120 यूनिट सोलर बिजली तैयार होती है. यदि किसी परिवार की महीने की जरूरत भी 120 यूनिट ही है और वहां बिजली का सरकारी रेट 3 रुपये प्रति यूनिट है, तो उस परिवार के हर महीने लगभग 360 रुपये बचेंगे. इस तरह पूरे एक साल में कुल बचत 4,320 रुपये होगी. इस बचत के आधार पर देखें तो उपभोक्ता द्वारा लगाई गई 20,000 रुपये की शुरुआती लागत मात्र 4.6 वर्षों में पूरी तरह वापस वसूल हो जाती है.

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25 साल में होने वाला कुल शुद्ध मुनाफा

सोलर पैनलों की कार्यक्षमता और तकनीकी उम्र औसतन 25 वर्ष मानी जाती है. यदि 1 किलोवाट का सिस्टम पूरे 25 सालों तक इसी दर से बिजली बनाता रहे, तो इतने समय में कुल मिलाकर लगभग 1,08,000 रुपये के बिजली बिल की बचत होगी. इसमें से अगर हम उपभोक्ता द्वारा शुरू में लगाए गए 20,000 रुपये घटा दें, तो भी केवल 1 किलोवाट के छोटे से सोलर प्लांट से 25 वर्षों में लगभग 88,000 रुपये का सीधा शुद्ध वित्तीय लाभ प्राप्त होता है.

बिजली बिल शून्य होने की शर्तें और नेट-मीटरिंग

रूफटॉप सोलर लगाने के बाद आपका बिजली बिल कितना घटेगा या शून्य होगा, यह तीन प्रमुख बातों पर निर्भर करता है. पहला यह कि आपने अपनी कुल खपत के अनुपात में सही साइज का प्लांट चुना है या नहीं. दूसरा यह कि आपकी बिजली कंपनी का टैरिफ स्लैब क्या है. तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक आपके राज्य के नेट-मीटरिंग और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचने (फीड-इन टैरिफ) के नियम हैं. कम बिजली खपत और अच्छी धूप वाले महीनों में नेट-मीटरिंग के जरिए बिल शून्य हो सकता है, लेकिन यह हर घर के इस्तेमाल के तरीके के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.

देश में सोलर क्षमता और जागरूकता की आवश्यकता

भारत में छतों पर सोलर लगाने की कुल तकनीकी क्षमता लगभग 118 गीगावाट आंकी गई है, जो इस क्षेत्र में विशाल संभावनाओं को दर्शाती है. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने इस दिशा में तेजी लाई है, लेकिन सीईईडब्ल्यू के रिसर्च के अनुसार जानकारी का अभाव अब भी बड़ी रुकावट है. लोगों में सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और वित्तीय लाभों के प्रति सही जागरूकता फैलाकर देश में लगभग 90 गीगावाट तक रूफटॉप सोलर क्षमता को आसानी से हासिल किया जा सकता है.

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