India Maldives Loans: पिछले साल भारत और मालदीव के बीच रिश्ते एक मुश्किल दौर से गुजरे. इनमें इंडिया आउट जैसी राजनीतिक बयान बाजी, मिलिट्री मौजूदगी पर बहस और साफ तौर पर कूटनीतिक बेचैनी देखने को मिली. इसी बीच आइए जानते हैं कि मालदीव को अब तक भारत कितना पैसा उधार दे चुका है और उसकी वसूली कैसे की जा रही है.
भारत की वित्तीय सहायता का पैमाना
जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए 4850 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट की घोषणा की थी. खास बात यह है कि ऐसा पहली बार था जब मालदीव को भारतीय रुपए में ऐसा लोन मिला जिससे डॉलर की अस्थिरता का जोखिम कम हुआ. इतना ही नहीं बल्कि भारत ने मालदीव के ट्रेजरी बिलों में 50 मिलियन डॉलर का रोल ओवर करके बजट सपोर्ट को भी जारी रखा.
ग्रांट, स्वैप और कर्ज से राहत
लोन के अलावा भारत ने मालदीव को दिया जाने वाला सालाना ग्रांट भी बढ़ाया है. केंद्रीय बजट 2025-26 में आवंटन पिछले साल के 470 करोड़ से बढ़कर 600 करोड़ रुपए हो गया. विदेशी मुद्रा तनाव को दूर करने के लिए भारत ने 400 मिलियन डॉलर और 3000 करोड़ रुपए के करेंसी स्वैप समझौते भी किए. इससे मालदीव को तुरंत भुगतान की जरूरत को पूरा करने और रिजर्व को स्थिर करने में काफी मदद मिली. इसी के साथ भारत ने पुराने लोन पर रीपेमेंट की शर्तों में बदलाव किया जिससे मालदीव पर सालाना कर्ज चुकाने का बोझ लगभग 40% कम हो गया.
भारत कैसे वसूल रहा है पैसा
कर्ज के पुनर्गठन से सालाना आउटफ्लो काफी कम हुआ है. इसी के साथ बजट रोल आउट मुश्किल वित्तीय समय में रहता देते हैं. इतना ही नहीं बल्कि भारत मालदीप की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लॉन्ग टर्म ग्रोथ ड्राइवर्स पर जोर दे रहा है. इसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत शामिल है.
इसी के साथ रिकवरी का एक और तारिक गहरा आर्थिक एकीकरण है. मालदीव में UPI और RuPay पेमेंट सिस्टम शुरू होने से भारतीय पर्यटकों के लिए सुविधा बढ़ाने और विदेशी मुद्रा आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. अब क्योंकि पर्यटन मालदीव की अर्थव्यवस्था की रीड है इस वजह से ज्यादा आमदनी सीधे तौर पर कर्ज चुकाने की उसकी क्षमता को सपोर्ट करती है.
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