India Gold Reserves: ऐसे समय में जब ग्लोबल टेंशन, युद्ध, प्रतिबंध और आर्थिक अनिश्चितता दुनिया भर में फाइनेंशियल स्ट्रेटजी को एक नया आकर दे रहे हैं सोना एक बार फिर से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक जरूरी कवच बन चुका है. भारत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए दुनिया के सबसे बड़े ऑफिशियल सोने के भंडार में से एक रखता है. लेकिन 2025 में आरबीआई ने नई सोने की खरीद में काफी ज्यादा कमी की है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत के पास कितना सोने का भंडार है और उसकी कितनी कीमत है. 

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भारत के पास कुल सोने का भंडार 

भारत का ऑफिशियल सोने का भंडार लगभग 880.18 मीट्रिक टन है. मूल्य के हिसाब से इस सोने की कीमत लगभग 113.32 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है. भारतीय मुद्रा में यह कीमत लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है. यह सोने को देश के खजाने में सबसे कीमती संपत्तियों में से एक बनाता है. 

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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी 

सोने ने भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में एक बड़ी भूमिका निभाई है. अब इसकी हिस्सेदारी कुल फॉरेक्स भंडार का 16.02% हो चुकी है. इसका मूल्य लगभग 687 बिलियन डॉलर है. यह पिछले लगभग 2 दशकों में सोने की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है. यह कदम अमेरिकी डॉलर पर ज्यादा निर्भरता को कम करने और अपने भंडार को ग्लोबल फाइनेंशियल झटकों, प्रतिबंधों और मुद्रा स्थिरता से बचने के भारत के इरादे का संकेत देता है.

भारत अपना सोना कहां रखता है 

बीते कुछ सालों में भारत ने अपने सोने को वापस घर लाने पर काफी ज्यादा ध्यान दिया है. वर्तमान में लगभग 510 से 575 टन सोना भारत के अंदर सुरक्षित रूप से रखा गया है. मुख्य रूप से मुंबई और नागपुर में स्थित आरबीआई की तिजोरियों में यह सोना रखा हुआ है. बाकी लगभग 290 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स जैसे भरोसेमंद संस्थाओं के पास विदेश में रखा हुआ है.

पिछले तीन सालों में ही भारत ने लगभग 274 टन सोना वापस मंगाया है. यह कदम भू राजनीतिक जोखिम, ग्लोबल प्रतिबंधों और रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्तियों पर सीधे नियंत्रण की जरूरत की वजह से उठाया गया है. 

खरीदारी में भारी गिरावट 

2025 में आरबीआई की सोने की खरीदारी में भारी गिरावट देखने को मिली है. जहां आरबीआई ने 2024 में 72.6 टन सोना खरीदा था, वहीं 2025 में उसने सिर्फ 4.02 टन सोना खरीदा. यह खरीद 8 सालों में सबसे कम थी.

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