Israel Debt: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने ईरान के साथ-साथ इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है. गाजा और ईरान से जुड़े संघर्षों के बीच इजरायल का खर्च तेजी से बढ़ा है. जिसका सीधा असर उसके कर्ज पर भी देखने को मिल रहा है. ऐसे में कई लोगों का अक्सर सवाल भी उठा है कि ईरान से जंग करने वाले इजरायल पर फिलहाल कितना कर्ज है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ईरान से जंग लड़ने वाले इजरायल पर कितना कर्ज है और यह पैसा आखिर आता कहां से हैं. युद्ध के चलते तेजी से बढ़ा इजरायल का कर्ज हाल ही के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 के अंत तक इजरायल का कुल सरकारी कर्ज बढ़कर करीब 443.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इससे पहले 2024 में यह करीब 364 अरब डॉलर था. यानी 1 साल में ही कर्ज में बड़ा इजाफा देखने को मिला है. कर्ज से जीडीपी अनुपात भी बढ़कर 67 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है जो इस बात का संकेत है कि युद्ध और बढ़ते खर्च का दबाव लगातार बढ़ रहा है. युद्ध ने इजरायल पर बढ़ाया आर्थिक बोझ गाजा और लेबनान में संघर्ष के चलते 2024 में ही इजरायल को करीब 28 अरब डॉलर का सीधा सैन्य खर्च उठाना पड़ा. वहीं ईरान से जुड़े तनाव में शुरुआती अनुमान के अनुसार 11.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च सामने आया. इसमें रक्षा उपकरणों की खरीद, सैनिकों की तैनाती और अन्य सैनिक जरूरतें शामिल है. इसके अलावा व्यापार बंद होने, एयरपोर्ट प्रभावित रहने और आम लोगों को हुए नुकसान से अरबों डॉलर की एक्स्ट्रा आर्थिक चोट भी इजरायल को लगी. ये भी पढ़ें-IPS Ajay Pal Sharma: बंगाल चुनाव में पर्यवेक्षक बनाए गए IPS अजय पाल शर्मा, क्या इन्हें अलग से सैलरी देगा चुनाव आयोग?
कहां से लाता है इजरायल कर्ज इजरायल का कर्ज लेने का तरीका बाकी देशों से अलग है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका ज्यादातर कर्ज देश के अंदर से ही आता है. दरअसल इजरायल अपने घरेलू कर्ज का बड़ा हिस्सा अपने ही नागरिकों और संस्थाओं से जुटाता है. पेंशन फंड, बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान सरकार के बॉन्ड खरीदते हैं. 2024 में जुटाए गए कर्ज का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा घरेलू बाजार से आया. इसके अलावा दुनिया भर में रहने वाले यहूदी समुदाय के जरिए भी इजरायल को बड़ी रकम मिलती है. इजरायल बॉन्ड के जरिए 1951 से अब तक 55 डॉलर से ज्यादा जुटाए जा चुके हैं. युद्ध के समय इनकी बिक्री और तेज हो जाती है. वहीं इजरायल वैश्विक बाजारों से भी बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाता है. 2026 की शुरुआत में उसने 6 अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड जारी किया, जिससे उम्मीद से कई गुना ज्यादा निवेश मिला. इसके अलावा अमेरिका की ओर से मिलने वाला लोन गारंटी भी इजरायल के लिए एक मजबूत सहारा है. यह सीधे कर्ज नहीं होता, लेकिन वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते है. क्या भारत भी इजरायल को देता है कर्ज भारत और इजरायल के मजबूत संबंधों के बावजूद भारत सीधे तौर पर इजरायल को कर्ज नहीं देता है. दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार का रिश्ता ज्यादा मजबूत है. इजराइल एक विकसित अर्थव्यवस्था है, इसलिए वह पारंपरिक कर्ज के बजाय निवेश और बॉन्ड के जरिए फंड जुटाता आता है.
