Indian Air Force: इंडियन एयर फोर्स की एक स्क्वाड्रन में कितने होते हैं फाइटर जेट, भारत के पास कितने?
Indian Air Force: हाल ही में भारत सरकार ने फ्रांस में 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दे दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत की एक स्क्वाड्रन में कितने फाइटर जेट होते हैं.

Indian Air Force: भारत सरकार ने फ्रांस से 114 और राफेल फाइटर जेट खरीदने की मंजूरी दे दी है. इस कदम से आने वाले सालों में इंडियन एयर फोर्स की स्क्वाड्रन की ताकत में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इंडियन एयर फोर्स की एक स्क्वाड्रन में कितने फाइटर जेट होते हैं और मौजूदा समय में भारत के पास कितने हैं.
एक स्क्वाड्रन में कितने फाइटर जेट होते हैं?
इंडियन एयर फोर्स के एक स्टैंडर्ड फाइटर स्क्वाड्रन में आमतौर पर 18 फाइटर एयरक्राफ्ट होते हैं. इन 18 एयरक्राफ्ट में से लगभग 16 ऑपरेशनल फाइटर जेट हैं, जबकि दो ट्रेनर एयरक्राफ्ट है. इनका इस्तेमाल पायलट कन्वर्जन और ऑपरेशनल ट्रेनिंग के लिए किया जाता है. इसके अलावा कुछ एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस साइकिल और इमरजेंसी को मैनेज करने के लिए रिजर्व में रखे जाते हैं. हर स्क्वाड्रन की कमान आमतौर पर विंग कमांडर रैंक के एक ऑफिसर के पास होती है. यह ऑपरेशनल तैयारी, ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट की देखरेख करता है.
भारत के पास अभी कितने फाइटर स्क्वाड्रन?
फरवरी 2026 तक इंडियन एयरफोर्स लगभग 29 एक्टिव फाइटर स्क्वाड्रन चला रही है. यह इसकी मंजूर 42.5 स्क्वाड्रन की संख्या से काफी कम है. इसे दो फ्रंट की स्थिति से निपटने के लिए जरूरी माना जाता है. बीते कुछ सालों में स्क्वाड्रन की संख्या में कमी मुख्य रूप से MiG वेरिएंट जैसे पुराने एयरक्राफ्ट के रिटायर होने की वजह से हुई है. इसी के साथ नए एयरक्राफ्ट धीरे-धीरे शामिल किए गए हैं.
सर्विस में कुल फाइटर एयरक्राफ्ट
अभी के 29-30 स्क्वाड्रन के आधार पर भारत के पास लगभग 520 से 540 ऑपरेशनल फाइटर एयरक्राफ्ट हैं. रिटायरमेंट, अपग्रेड और नए शामिल किए जाने के आधार पर यह संख्या ऊपर-नीचे होती रहती है. हालांकि फ्लीट अभी भी मजबूत है लेकिन मंजूर और असली संख्या के बीच का अंतर एक स्ट्रेटेजिक चिंता का विषय बना हुआ है.
114 राफेल जेट से क्या बदलेगा?
114 और राफेल जेट खरीदने की मंजूरी से अगले 10 सालों में स्क्वाड्रन की संख्या में काफी सुधार होने की उम्मीद है. एक बार शामिल होने के बाद यह एयरक्राफ्ट भारत को अपनी मंजूर ताकत के करीब पहुंचने और अपने लड़ाकू फ्लीट को मॉडर्न बनाने में काफी मदद करेंगे. बढ़ती क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के साथ स्क्वाड्रन क्षमता का विस्तार सिर्फ संख्या के बारे में नहीं है. यह हवाई ताकत को बनाए रखने के बारे में है और साथ ही इंडियन एयर फोर्स की मजबूती के बारे में है.
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