दुनिया के मोस्ट वांटेड ड्रग लॉर्ड्स में शामिल एक नाम एल मेंचो. उसके सिर पर करोड़ों रुपये का इनाम था, उसे पकड़ने के लिए कई एजेंसियां सालों से लगी थीं. फिर अचानक खबर आई कि वह मारा गया है. ऐसे में सवाल उठता है, जिस अपराधी पर करोड़ों रुपये का इनाम था, अब वह रकम किसे मिलेगी? क्या किसी मुखबिर को फायदा होगा या सरकार की तिजोरी में ही रह जाएगी? आइए समझें.
कौन था एल मेंचो?
नेमेसियो रुबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस, जिसे दुनिया एल मेंचो के नाम से जानती थी, मेक्सिको के सबसे ताकतवर ड्रग कार्टेल में से एक का सरगना था. वह Jalisco New Generation Cartel यानी CJNG का प्रमुख था. यह कार्टेल मेथामफेटामाइन, हेरोइन और फेंटेनिल जैसे खतरनाक ड्रग्स की तस्करी के लिए कुख्यात रहा है. एल मेंचो को लंबे समय से अमेरिका और मेक्सिको की एजेंसियां तलाश रही थीं. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था.
कैसे हुई मौत?
मेक्सिको के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पश्चिमी राज्य जलिस्को में सेना के एक ऑपरेशन के दौरान एल मेंचो गंभीर रूप से घायल हो गया था. गोलीबारी में उसे चोट लगी और हेलीकॉप्टर से मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई. उसकी मौत की पुष्टि के बाद जलिस्को समेत कई इलाकों में हिंसक घटनाएं सामने आईं. गाड़ियों में आगजनी और सड़क जाम जैसी घटनाएं हुईं. अधिकारियों का कहना है कि कार्टेल से जुड़े लोगों ने प्रतिक्रिया में उपद्रव किया.
कितने करोड़ का था इनाम?
एल मेंचो पर अमेरिकी सरकार ने 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 136 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था. यह इनाम उस व्यक्ति या सूचना देने वाले के लिए था, जो उसकी गिरफ्तारी में मदद करता. अमेरिका ने उसके कार्टेल CJNG को आतंकवादी संगठन की श्रेणी में भी रखा था. उसे अमेरिका में ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के कई मामलों में आरोपी माना जाता था.
अब किसे मिलेगी इनाम की रकम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी अपराधी पर इनाम घोषित किया जाता है, तो वह आम तौर पर गिरफ्तारी या ऐसी सूचना के बदले दिया जाता है, जिससे उसे जिंदा पकड़ा जा सके. एल मेंचो की मौत सेना के सीधे ऑपरेशन में हुई है. ऐसी स्थिति में आम तौर पर इनाम की रकम किसी निजी व्यक्ति या मुखबिर को नहीं दी जाती है, जब तक कि किसी की दी गई विशेष जानकारी से ऑपरेशन संभव न हुआ हो.
मौजूदा जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 136 करोड़ रुपये की इनामी राशि किसी को नहीं मिलेगी. इनाम की घोषणा का मकसद उसे जिंदा पकड़ना था ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी हो सके.
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