हवाई जहाज में सफर करते वक्त आपने जरूर गौर किया होगा कि उड़ान के दौरान एयर होस्टेस हर छोटी-बड़ी चीज पर पैनी नजर रखती हैं, चाहे सीट बेल्ट बांधना हो या इमरजेंसी डोर की दिशा बताना. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अचानक कोई खतरा आ जाए, तो यही एयर होस्टेस पूरे विमान को कितनी जल्दी खाली करा सकती हैं? क्या यह मिनटों की बात है या कुछ सेकंडों की? आइए जानते हैं, इस तेज रफ्तार बचाव प्रक्रिया के पीछे क्या हैं एयरलाइंस के नियम.

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कितनी देर में खाली होना चाहिए पूरा विमान

आपको जानकर हैरानी होगी कि किसी भी हवाई जहाज को 90 सेकंड (डेढ़ मिनट) के अंदर पूरी तरह खाली कराया जा सकता है. यह कोई अनुमान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) का मानक है. हर एयरलाइन को अपने विमानों का ऐसा प्रशिक्षण देना होता है जिससे यात्री और क्रू मेंबर मिलकर इस समय सीमा के भीतर सुरक्षित बाहर निकल सकें.

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एयर होस्टेस की ट्रेनिंग कितनी कठिन 

एयर होस्टेस सिर्फ यात्रियों को सर्विस देने के लिए नहीं होतीं, बल्कि उन्हें आपातकालीन हालात में लाइफसेवर की भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाता है. उन्हें फायर, स्मोक और वॉटर इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है. स्लाइड, राफ्ट, और ऑक्सीजन मास्क सिस्टम का उपयोग कैसे करना है, यह सिखाया जाता है.

ट्रेनिंग में बार-बार यह अभ्यास कराया जाता है कि भीड़भाड़, घबराहट या रोशनी बंद होने की स्थिति में भी यात्रियों को सुरक्षित बाहर कैसे निकालना है. कई बार ट्रेनिंग के दौरान अंधेरे कमरे में धुआं भरकर प्रैक्टिकल कराया जाता है, ताकि रियल सिचुएशन जैसी स्थिति में भी एयर होस्टेस का संतुलन न डगमगाए.

90 सेकंड का नियम क्यों है जरूरी

हवाई जहाज में आग लगने या तकनीकी खराबी आने पर पहले 2 मिनट सबसे अहम होते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि विमान के अंदर धुआं या आग फैलती है तो यात्री कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकते हैं. इसलिए नियम तय किया गया है कि सभी यात्रियों को 1.5 मिनट के भीतर बाहर निकालना ही होगा, चाहे विमान में 100 लोग हों या 400.

हर डोर से कितने लोग निकल सकते हैं?

एक बड़े पैसेंजर विमान में आमतौर पर 8 से 10 इमरजेंसी एग्जिट डोर होते हैं. हर डोर से 10 से 15 सेकंड में दर्जनों यात्री बाहर निकल सकते हैं. स्लाइड्स अपने आप खुल जाती हैं, और एयर होस्टेस उन्हें मोनिटर करती हैं ताकि कोई घायल न हो. विमान की सीटिंग डिजाइन और निकास पथ इसी हिसाब से बनाए जाते हैं कि भीड़ फंसे नहीं.

एयरलाइंस करती हैं समय-समय पर टेस्टिंग

हर एयरलाइन को DGCA या अंतरराष्ट्रीय एविएशन एजेंसियों के तहत यह साबित करना होता है कि उनका विमान निर्धारित समय में पूरी तरह खाली कराया जा सकता है. इस टेस्ट में रियल टाइम सिमुलेशन किया जाता है, जिसमें अंधेरा, शोर और पैनिक जैसी स्थितियां बनाई जाती हैं. अगर एयरलाइन फेल हो जाती है, तो उसे मंजूरी नहीं मिलती है.

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