जब भी दुनिया में युद्ध की बात होती है, तो सबसे पहले तबाही, गरीबी, कर्ज और बर्बादी की तस्वीर सामने आती है. आमतौर पर माना जाता है कि कोई भी देश अगर लगातार जंग में उलझा रहे, तो उसकी अर्थव्यवस्था बिखर जाती है. लेकिन इसी सोच को चुनौती देता है एक छोटा-सा देश इजरायल है. 

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इजरायल 1948 में बना और उसके बनने के साथ ही युद्धों का दौर शुरू हो गया. कभी हमास से, कभी हिज्बुल्लाह से, कभी हूती विद्रोहियों से और अब सीधे ईरान से टकराव की स्थिति. चारों ओर दुश्मन, हर कुछ साल में जंग, हजारों सैनिक रिजर्व में, अरबों डॉलर का रक्षा खर्च फिर भी आज इजरायल दुनिया के अमीर और विकसित देशों में गिना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है क्या बार-बार वॉर लड़ने के बाद भी इजरायल को अमीर बनाता है. तो चलिए जानते हैं कि इजरायल की असली ताकत क्या है, उसकी अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है और क्यों बार-बार जंग झेलने के बावजूद वह आर्थिक रूप से मजबूत बना हुआ है. 

इजरायल की कहानी जमीन से जंग तक

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1947 में संयुक्त राष्ट्र ने एक योजना पेश की एक जमीन यहूदियों के लिए और एक अरबों के लिए यहूदी नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, लेकिन अरब नेताओं ने इसे मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद 1948 में युद्ध हुआ. यह युद्ध इजरायल के अस्तित्व को खत्म करने के लिए लड़ा गया, लेकिन वह युद्ध विफल रहा. इसके बाद भी हालात नहीं बदले. 1956, 1967, 1973  हर दशक में युद्ध हुआ. रॉकेट, बम, आतंकी हमले, सीमा संघर्ष सब चलता रहा. लेकिन एक बात साफ होती गई कि जंग से इजरायल खत्म नहीं होने वाला था.   बार-बार वॉर लड़ने के बाद भी कैसे है इतना अमीर?

1. हाई-टेक और स्टार्टअप - इजरायल को अक्सर Startup Nation  कहा जाता है.दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा स्टार्टअप इजरायल में हैं. साइबर सिक्योरिटी, AI, सॉफ्टवेयर, मेडिकल टेक, फार्मा और डिफेंस टेक्नोलॉजी में यह देश ग्लोबल लीडर है. Google, Microsoft, Intel, Nvidia जैसी बड़ी कंपनियां यहां R&D सेंटर चलाती हैं. इजरायल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हाई-टेक एक्सपोर्ट से आता है. युद्ध के समय भी ये सेक्टर चलते रहते हैं, क्योंकि ये सीमाओं से नहीं, दिमाग से जुड़े होते हैं. 

2. रक्षा उद्योग - इजरायल हमेशा से खतरे में रहा है. इसलिए उसने अपनी सुरक्षा के लिए खुद की तकनीक विकसित की Iron Dome, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, रडार और साइबर वारफेयर टेक्नोलॉजी. अब यही तकनीक दुनिया के कई देश खरीदते हैं. युद्ध ने इजरायल को मजबूर किया कि वह मजबूत डिफेंस बनाए और उसी मजबूरी को उसने एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में बदल दिया. 

3. शिक्षा और मानव संसाधन (Human Capital) - इजरायल बड़ी संख्या में इंजीनियर, वैज्ञानिक और डॉक्टर, GDP का बहुत बड़ा हिस्सा रिसर्च & डेवलपमेंट पर खर्च, सेना में टेक्निकल ट्रेनिंग, जो बाद में सिविल सेक्टर में काम आती है. इसी कारण इजरायली युवा सिर्फ नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि समस्या सुलझाने वाले (Problem Solvers) बनते हैं. 

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