मिडिल-ईस्ट की अशांत लहरों के बीच एक बार फिर युद्ध की चिंगारी भड़कने का खतरा पैदा हो गया है. अमेरिका के साथ चल रहे भारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते यानी होर्मुज स्ट्रेट में अपना एक नया पैंतरा चल दिया है. वैश्विक स्तर पर समुद्री जहाजों की हर हलचल पर पैनी नजर रखने वाली संस्था 'मरीन-ट्रैफिक' ने खुलासा किया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से टैक्स वसूलने के लिए बाकायदा एक विशेष जहाज को समंदर में उतार दिया है. ईरान के इस अप्रत्याशित कदम से पूरी दुनिया के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.

Continues below advertisement

मिलिशिया का नया टोल कलेक्टर

मरीन ट्रैफिक से मिली सैटेलाइट और ट्रैकिंग रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस टैक्स वसूलने वाले जहाज का आधिकारिक नाम 'आईआरजीसी टोल कलेक्ट' रखा है. यह नाम ईरान के सबसे ताकतवर मिलिशिया संगठन इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के नाम पर तय किया गया है, जिससे साफ पता चलता है कि यह जहाज ईरान के जंगी बेड़े का एक सक्रिय हिस्सा है. रविवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में यह जहाज केशम आईलैंड के नजदीक आईआरजीसी के एक रणनीतिक नेवल बेस पर लंगर डाले हुए है, लेकिन इसके गंतव्य और मकसद वाले कॉलम में ईरान ने साफ-साफ 'टोल कलेक्शन' दर्ज किया है.

Continues below advertisement

टैक्स वसूली का डिजिटल जरिया

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या समंदर के बीचों-बीच ईरान कैश या यूपीआई जैसे किसी आम घरेलू माध्यम से जहाजों से यह टैक्स वसूलेगा? तो इसका जवाब है, बिल्कुल नहीं. अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों और अमेरिकी डॉलर पर लगी रोक के कारण ईरान ने इस वसूली के लिए पूरी तरह से अलग रास्ता चुना है. ईरान इस टोल का भुगतान मुख्य रूप से डिजिटल यानी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और चीनी युआन जैसी मजबूत विदेशी मुद्राओं के माध्यम से स्वीकार कर रहा है, ताकि वह अमेरिकी बैंकिंग प्रतिबंधों और निगरानी प्रणाली को आसानी से चकमा दे सके. 

यह भी पढ़ें: Civil Service Exam History: अंग्रेजों के जमाने में कैसे होते थे सिविल सर्विसेज के एग्जाम, कौन था देश का पहला IAS?

केंद्रीय बैंक से जुड़ा नया सिस्टम

इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए ईरान ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक तंत्र तैयार किया है. जहाजों से वसूला जाने वाला यह सारा फंड सीधे ईरान के केंद्रीय बैंक (Central Bank of Iran) के गुप्त खातों में ट्रांसफर किया जाता है. मरीन और इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस वसूली सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने और कानूनी रूप देने के लिए ईरान ने 'पर्शियन गल्फ स्टेट अथॉरिटी' (PGSA) नामक एक बिल्कुल नए नियामक और कानूनी निकाय का गठन भी किया है, जो पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करता है. 

सुरक्षा शुल्क के नाम पर खेल

अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दबाव से बचने के लिए ईरान इस वसूली को कोई पारंपरिक 'टोल' या टैक्स नहीं कह रहा है. उसने इसे नेविगेशनल सर्विस, पर्यावरण की रक्षा और समुद्री सुरक्षा के लिए लिया जाने वाला एक अनिवार्य शुल्क घोषित किया है. ईरान का दावा है कि इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को वह सुरक्षा कवच दे रहा है. इतना ही नहीं, जो जहाज इस फीस को भरते हैं, उन्हें ईरान अपनी खुद की घरेलू इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से एक विशेष सुरक्षा बीमा कवर भी प्रदान कर रहा है. 

करोड़ों रुपये की भारी-भरकम वसूली

इस नए नियम के तहत जहाजों से ली जाने वाली रकम इतनी बड़ी है कि शिपिंग कंपनियों के होश उड़ गए हैं. रक्षा और समुद्री व्यापारिक रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के भीतर सुरक्षित मार्ग या सिक्योरिटी क्लीयरेंस हासिल करने के लिए प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 16 से 17 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम वसूली की जा रही है. जो भी जहाज इस मोटी रकम को चुकाने से इनकार करता है, उसे आईआरजीसी के जंगी जहाजों के गुस्से और जब्ती की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.

अनुमति और क्लीयरेंस की कड़क प्रक्रिया

होर्मुज के इस नए रास्ते से गुजरने के लिए शिप ऑपरेटरों को एक बेहद कड़े प्रोसेस से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले जहाजों के मालिकों को संबंधित ईरानी वाणिज्य दूतावास (Consulate) के माध्यम से एक आधिकारिक आवेदन देना होता है. इस आवेदन में जहाज के रूट, उसके वजन और उस पर लदे पूरे कार्गो (सामान) का पूरा विवरण देना अनिवार्य है. ईरान की तरफ से पूरी जांच-पड़ताल और हरी झंडी मिलने के बाद ही उस जहाज को आईआरजीसी के नियंत्रण वाले विशेष सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर से गुजरने की इजाजत मिलती है.

यह भी पढ़ें: भारत की नहीं है 'शाही लीची', जानिए सात समंदर पार से इसके सफर की रोचक दास्तान