Mars Colony: इंसानों का मंगल पर बसने का विचार अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं रहा है. SpaceX और NASA जैसे संगठनों की लीडरशिप में अभी रिसर्च का एक बड़ा क्षेत्र बन चुका है. हालांकि अभी तक कोई स्थायी बस्ती नहीं बनी है लेकिन तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति ने इंसानियत को मल्टी प्लेनेटरी प्रजाति बनाने के पहले से कहीं ज्यादा करीब ला दिया है. आइए जानते हैं कि यह काम कितना आगे बढ़ा है और इंसान असल में मंगल पर कब जा सकता है.

Continues below advertisement

इंसान मंगल पर कब पहुंचेंगे?

मौजूदा योजनाएं एक पूरी प्रक्रिया को दर्शाती हैं. SpaceX का लक्ष्य 2026 के आखिर तक अपना पहला बिना क्रू वाला स्टारशिप मिशन मंगल पर भेजना है. अगर ये मिशन सफल हो जाते हैं तो इंसान 2029 या फिर 2031 तक मंगल पर उतर सकते हैं. हालांकि पूरी तरह से आत्मनिर्भर बस्ती बनाना काफी लंबा लक्ष्य है. इसमें 20-50 साल लगने की उम्मीद है और इसके लक्ष्य 2050-2055 के आसपास रखे गए हैं.

Continues below advertisement

मंगल के लिए डिजाइन किया गया रॉकेट 

 स्टारशिप SpaceX के द्वारा विकसित किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है. इसे इंसानों और भारी सामान दोनों को ग्रहों के बीच की दूरी तक ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इससे यह मंगल पर बुनियादी ढांचा बनाने के लिए जरूरी हो जाता है. 

नासा की चंद्रमा से मंगल रणनीति 

नासा अपने Artemis कार्यक्रम के जरिए चरण-दर-चरण दृष्टिकोण को अपना रहा है. योजना यह है कि पहले चंद्रमा पर एक स्थायी उपस्थिति को स्थापित किया जाए और उसका इस्तेमाल मंगल मिशन के लिए एक लॉन्च पैड के रूप में किया जाए. आने वाला Artemis II मिशन चंद्रमा के चारों ओर मानव अंतरिक्ष यात्रा का परीक्षण करेगा. 

रोबोटिक मिशन पहले से तैयार 

मंगल को पहले से ही Perseverance रोवर जैसे रोबोटिक खोजकर्ताओं द्वारा स्टडी किया जा रहा है. ये मिशन मिट्टी का विश्लेषण कर रहे हैं, पानी के संकेत ढूंढ रहे हैं और वायुमंडल को भी स्टडी कर रहे हैं. यह सभी जरूरी चीजें हैं जिनका इंसानों को भेजने से पहले अध्ययन करना काफी जरूरी है.

मंगल पर ऑक्सीजन 

सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऑक्सीजन का उत्पादन है. हाल ही में नासा के MOXIE  प्रयोग के जरिए एक बड़ी सफलता मिली है. इसने सफलतापूर्वक यह बताया है कि मंगल के कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल से ऑक्सीजन को निकाला जा सकता है. वर्तमान में मंगल की यात्रा में लगभग 7 से 9 महीने लगते हैं. नासा इस कोशिश में लगी है जो इस समय को आधा कर सकती है. इससे मिशन तेज और सुरक्षित हो जाएगा.

इन सब के अलावा मंगल अभी भी बड़ी चुनौतियों से भरा है. मंगल का वायुमंडल 95% कार्बन डाइऑक्साइड से बना है. इतना ही नहीं बल्कि यहां का औसत तापमान लगभग -60 डिग्री सेल्सियस रहता है. इसी के साथ हानिकारक रेडिएशन से बचने के लिए यहां कोई भी चुंबकीय क्षेत्र मौजूद नहीं है.

यह भी पढ़ें: क्यों लगाया था सऊदी अरब ने अमेरिका पर तेल प्रतिबंध, जानें कैसे हिली थी यूएस की अर्थव्यवस्था