जब किसी देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते हैं तो सरकार अक्सर सबसे पहले इंटरनेट सेवाएं बंद कर देती है. इसका मकसद लोगों के बीच संपर्क तोड़ना, वीडियो-फोटो शेयरिंग को रोकना और खबरों की रफ्तार धीमी करना होता है. ईरान में हालिया विरोध के दौरान भी यही हुआ, जहां मोबाइल डेटा और ब्रॉडबैंड लगभग पूरी तरह ठप कर दिए गए.  हालांकि, इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद कुछ ईरानी नागरिक ऑनलाइन बने रहे. इसकी बड़ी वजह एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक बना है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि एलन मस्क का स्टारलिंक इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद भी कैसे काम करता है और क्या इसे कोई नहीं रोक सकता है. 

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क्या है स्टारलिंक और क्यों खास है ये?

स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की ओर से चलाई जाने वाली इंटरनेट सेवा है. यह पारंपरिक इंटरनेट की तरह मोबाइल टावर या फाइबर केबल पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स से इंटरनेट सिग्नल देता है. यही वजह है कि जब सरकार जमीन पर मौजूद नेटवर्क बंद कर देती है तब भी स्टारलिंक काम करता रह सकता है. यही कारण है कि ईरान में ब्लैकआउट के दौरान कुछ लोगों ने स्टारलिंक के जरिए इंटरनेट एक्सेस होने की जानकारी दी. भले ही कनेक्शन कभी-कभी कमजोर रहा लेकिन इससे लोग देश के बाहर वीडियो और फोटो भेजने, रिश्तेदारों से संपर्क करने और खबरों तक पहुंच बनाने में सफल रहे हैं. 

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बैन के बावजूद ईरान तक कैसे पहुंचा स्टारलिंक?

ईरान में स्टारलिंक पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध है और सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानती है. इसके बावजूद सैटेलाइट इंटरनेट किट्स तस्करी  के जरिए देश के अंदर पहुंची है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उपकरण दुबई के रास्ते समुद्र के जरिए या इराक बॉर्डर से ईरान लाए गए. वहीं समय के साथ एक ऐसा गुप्त नेटवर्क तैयार हो गया है, जहां स्टारलिंक किट से कई लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा यह भी माना जा रहा  है कि ईरान में हजारों की संख्या में ऐसे टर्मिनल मौजूद हो सकते हैं. 

सरकार रोकने के लिए क्या कर रही है?

ईरानी सरकार सिर्फ इंटरनेट बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टारलिंक को रोकने के लिए भी लगातार कदम उठा रही है. इसके तहत सैटेलाइट सिग्नल जैमिंग की जाती है ताकि कनेक्शन कमजोर हो जाए और डेटा ट्रांसफर मुश्किल हो सके. इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियां डिश एंटीना और टर्मिनल खोज कर जब्त भी कर रही है. स्टारलिंक और ईरानी सरकार के बीच यह एक तरह की तकनीकी चूहे-बिल्ली की लड़ाई बन चुकी है. जैमिंग से निपटने के लिए स्टारलिंक सॉफ्टवेयर अपडेट और तकनीकी बदलाव करता है. कभी इंटरनेट बेहतर चलता है तो कभी फिर कमजोर पड़ जाता है. ऐसे में स्टारलिंक  इंटरनेट को लेकर हालात दोनों पक्षों की तकनीकी तैयारी पर निर्भर करते हैं.

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