Hot Tea in Summer: गर्मी के दिनों में एक कप चाय पीना काफी असामान्य लग सकता है लेकिन इसके बावजूद भी कई लोग दावा करते हैं कि इससे उन्हें ठंडक महसूस होती है और उनकी प्यास बुझाती है. हैरानी की बात यह है कि विज्ञान इस बात का समर्थन करता है लेकिन कुछ शर्तों के तहत. इसकी वजह शरीर के प्राकृतिक शीतलन तंत्र में है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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शरीर गर्म चाय का पता कैसे लगाता है?

मुंह, जीभ और ऊपरी पाचन तंत्र में खास हीट सेंसिटिव रिसेप्टर होते हैं. इन्हें थर्मोरेसेप्टर्स के रूप में जाना जाता है. इसमें टीआरपीवी1 रिसेप्टर भी शामिल हैं. जैसे ही गर्म चाय मुंह में जाती है यह रिसेप्टर्स तापमान में बढ़ोतरी का पता लगाते हैं और शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के लिए जिम्मेदार दिमाग के हिस्से हाइपोथैलेमस को संकेत भेजते हैं. 

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दिमाग इसे शरीर के अंदर की गर्मी में बढ़ोतरी के रूप में समझता है और तुरंत शरीर को ठंडा रखने के लिए शीतलन प्रणाली को सक्रिय कर देता है.

पसीना क्यों बढ़ता है? 

थर्मोरेसेप्टर्स से संकेत मिलने के बाद हाइपोथैलेमस पसीने की ग्रंथि को उत्तेजित कर देता है. यही वजह है कि शरीर सामान्य से ज्यादा पसीना बनाने लगता है. शरीर द्वारा बनाई गई शीतलन प्रक्रिया अक्सर गर्म ड्रिंक के जरिए पैदा की गई गर्मी की मात्रा से ज्यादा होती है. 

इवेपोरेटिव कूलिंग का विज्ञान 

सिर्फ पसीना बहाने से शरीर को ठंडक नहीं मिलती. असली ठंडक तब मिलती है जब त्वचा की सतह से पसीना इवेपोरेट हो जाता है. इवेपोरेशन के दौरान पाशी त्वचा से गर्मी को एब्जॉर्ब करता है और इसे आसपास की हवा में ले जाता है. यह प्रक्रिया त्वचा के तापमान को कम करती है और शरीर की पूरी गर्मी को कम करने में भी मदद करती है.

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क्यों गर्म चाय बर्फ के ठंडे पानी से बेहतर महसूस हो सकती है? 

मानव शरीर का औसत तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस बनाए रखता है. जब काफी ठंडा पानी पिया जाता है तो शरीर को इसे संसाधित करने से पहले शरीर के तापमान के करीब गर्म करने के लिए ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है.

गर्म चाय शरीर के आंतरिक तापमान के करीब होने की वजह से कम समायोजन की जरूरत होती है. बढ़े हुए पसीने के साथ मिलकर यह समय के साथ शरीर को गर्म की बजाय ठंड महसूस करा सकता है.

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