आसमान से गिरती बर्फ और कुछ ही मिनटों में सब कुछ सफेद हो जाता है, तब समझिए बर्फीला तूफान आ चुका है. जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग में हाल ही में हुआ हिमस्खलन इसी डरावनी हकीकत की याद दिलाता है. बर्फीला तूफान सिर्फ मौसम की करवट नहीं, बल्कि प्रकृति का वह रूप है जो इंसान की तैयारियों को भी बौना साबित कर देता है, लेकिन आखिर यह तूफान बनता कैसे है और इतना खतरनाक क्यों होता है?

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बर्फीला तूफान आखिर होता क्या है?

बर्फीला तूफान, जिसे अंग्रेजी में ब्लिजर्ड कहा जाता है, वह मौसमीय स्थिति है जिसमें तेज हवाओं के साथ भारी बर्फबारी होती है. इसमें दृश्यता बेहद कम हो जाती है और तापमान तेजी से गिरता है. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि इंसान को अपने ही कदम दिखाई नहीं देते है. यही वजह है कि यह तूफान जान-माल के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाता है.

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बर्फीला तूफान बनने की प्रक्रिया

बर्फीला तूफान बनने के पीछे हवा की अलग-अलग परतों का खेल होता है. जब बादलों में मौजूद पानी की बूंदें बेहद ठंडी हवा के संपर्क में आती हैं, तो वे क्रिस्टल में बदलने लगती हैं. ये छोटे-छोटे बर्फीले कण आपस में जुड़कर भारी बर्फ के टुकड़े बनाते हैं. जब ऊपर की हवा थोड़ी गर्म और नीचे की हवा बेहद ठंडी होती है, तब बर्फ के टुकड़े आंशिक रूप से पिघलते हैं और फिर दोबारा जम जाते हैं. तेज हवाएं इन्हें बार-बार ऊपर उठाती हैं, जिससे बर्फ लगातार गिरती रहती है और तूफानी हालात पैदा हो जाते हैं.

तेज हवाएं क्यों बनती हैं जानलेवा?

बर्फीले तूफान में हवाओं की रफ्तार 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. यही हवाएं बर्फ को जमीन से उड़ा देती हैं, जिससे रास्ते, घर और वाहन सब ढक जाते हैं. इंसान और जानवर रास्ता भटक जाते हैं, जिससे जान जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

सामान्य तूफान से कैसे अलग है बर्फीला तूफान?

सामान्य तूफान अक्सर गर्म समुद्री इलाकों में बनते हैं, जहां नमी और गर्म हवा अहम भूमिका निभाती हैं. इसके उलट बर्फीला तूफान बेहद ठंडे क्षेत्रों में बनता है. इसमें बारिश की जगह बर्फ गिरती है और तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है. जहां आम तूफान तेज बारिश और हवा लाता है, वहीं बर्फीला तूफान ठंड, बर्फ और अंधेरे का खतरनाक मेल होता है.

क्यों सबसे ज्यादा खतरा पहाड़ी इलाकों में?

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और लद्दाख जैसे इलाकों में बर्फीले तूफान का असर सबसे ज्यादा होता है. पहाड़ों पर जमा भारी बर्फ कभी भी हिमस्खलन का रूप ले सकती है. सड़कें बंद हो जाती हैं, संचार टूट जाता है और राहत कार्य बेहद मुश्किल हो जाते हैं.

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