Wildfires: दक्षिण यूरोप के देश जैसे ग्रीस, पुर्तगाल और स्पेन जंगल की आग का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों का ऐसा कहना है कि देश में लगने वाली लगभग 85% जंगल की आग के लिए मानवीय लापरवाही ही जिम्मेदार है. यह आग अक्सर जंगलों और पहाड़ी इलाकों में तेजी से फैलती है. इस वजह से आग बुझाना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है. ऐसी आपदा को काबू करने के लिए ये देश कुछ आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं.

Continues below advertisement

पानी गिराने वाले विमान 

जंगल की आग से निपटने के लिए सबसे असरदार तरीकों में से एक है हवाई फायर फाइटिंग. स्पेन और पुर्तगाल कैनाडेयर एम्फीबियस विमानों का इस्तेमाल करते हैं. ये विमान कुछ सेकंड के अंदर पास के समुद्र या फिर जलाशयों से हजारों लीटर पानी भर सकते हैं. साथ ही जलते हुए जंगलों पर बार-बार पानी गिरा सकते हैं. 

Continues below advertisement

भारी वजन उठाने वाले हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल भी सीधे आग की लपटों पर पानी  और आग बुझाने वाले केमिकल छिड़कने के लिए किया जाता है. 

यह भी पढ़ेंः इस देश ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा डिफेंस हेडक्वॉर्टर, जानें किस नंबर पर आता है भारत?

जमीनी टीमों की मदद 

हवाई मदद के साथ-साथ खासतौर पर प्रशिक्षित जमीनी टीम भी आग को काबू करने में काफी मदद करती है. स्पेन में BRIF हेलीकॉप्टर क्रू को आग वाली जगह के पास तैनात किया जाता है. वहां वे चेन सॉ और दूसरी चीजों का इस्तेमाल करके सूखी झाड़ियों और पेड़ पौधों को हटाते हैं और साथ ही फायरब्रेक बनाते हैं. जमीन की ये साफ की गई पट्टियां आग की लपटों को और आगे फैलने से रोकने में मदद करती हैं. जब आग इतनी बड़ी हो जाती है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है तो स्पेन यूनिडाड मिलिटर डी इमरजेंसियास को भी तैनात करता है. 

सैटेलाइट, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद

आधुनिक तकनीक जंगल की आग के प्रबंधन का एक जरूरी हिस्सा बन चुकी है. ग्रीस और यूरोप के दूसरे देश कोपरनिकस सेटेलाइट सिस्टम और अपने खुद के सेटेलाइट से मिलने वाली रियल टाइम जानकारी का इस्तेमाल करके फैलती हुई आग की डायरेक्शन और स्पीड पर नजर रखते हैं. 

थर्मल कैमरों वाले ड्रोन का इस्तेमाल छिपे हुए हॉट-स्पॉट का पता लगाने के लिए किया जाता है. खासकर रात के समय में जब घने धुएं की वजह से कुछ दिखाई ना दे रहा हो. इस वजह से आपातकालीन टीम तेजी से कार्रवाई कर पाती है और आग को फैलने से रोक पाती है.

यह भी पढ़ेंः यूपी के इस कॉलेज में लेक्चरर रह चुके चंपत राय, क्या उन्हें वहां से मिलती है पेंशन?