Ocean Dark Zone : समुद्र की सतह पर उठती लहरें जितनी खूबसूरत दिखती हैं, उसके नीचे की दुनिया उतनी ही रहस्यमयी और खतरनाक होती जाती है. जैसे-जैसे इंसान समुद्र की गहराई में उतरता है, वैसे-वैसे रोशनी कम होती जाती है, पानी का दबाव कई गुना बढ़ जाता है और हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं. यही वजह है कि समुद्र की गहराई आज भी धरती के सबसे कम खोजे गए इलाकों में गिनी जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इंसान समुद्र में कितनी गहराई तक जा सकता है और किस गहराई के बाद पूरी तरह डार्क जोन शुरू हो जाता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि समुद्र की कितनी गहराई तक इंसान जा सकता है और कितने मीटर पर डार्क जोन शुरू हो जाता है.

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समुद्र की कितनी गहराई तक इंसान जा सकता है?

आम इंसान बिना किसी विशेष डिवाइस के समुद्र में कुछ मीटर तक ही सुरक्षित जा सकता है. लेकिन मॉर्डन तकनीक और विशेष रूप से बनाए गए सबमर्सिबल की मदद से वैज्ञानिक समुद्र की सबसे गहरी जगहों तक भी पहुंच चुके हैं. अब तक इंसान मारियाना ट्रेंच (Mariana Trench) के सबसे गहरे हिस्से चैलेंजर डीप (Challenger Deep) तक पहुंच चुका है. इसकी अधिकतम गहराई लगभग 35,853 फीट (करीब 10,927 मीटर) मानी जाती है. यहां का तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस (34°F) रहता है और पानी का दबाव समुद्र की सतह की तुलना में 1,071 गुना तक होता है.

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दुनिया की सबसे गहरी समुद्री यात्राएं

समुद्र की सबसे गहरी जगह चैलेंजर डीप तक पहुंचना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा माना जाता है, लेकिन समय-समय पर कई लोगों ने यह उपलब्धि हासिल की है. 1960 में जैक्स पिकार्ड और अमेरिकी नौसेना के लेफ्टिनेंट डोनाल्ड वॉल्श पहली बार वहां पहुंचे थे. इसके बाद 2012 में मशहूर फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून ने अकेले इस गहराई तक सफल यात्रा की. 2019 में विक्टर वेस्कोवो लगभग 35,853 फीट की गहराई तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया. वहीं 2020 में पूर्व अंतरिक्ष यात्री कैथरीन सुलिवन समुद्र की सबसे गहरी जगह तक पहुंचने वाली पहली महिला बनीं और 2022 में डॉन राइट इस उपलब्धि को हासिल करने वाली पहली ब्लैक वैज्ञानिक बनीं. 

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कितने मीटर पर डार्क जोन शुरू हो जाता है?

समुद्र में लगभग 1,000 मीटर की गहराई के बाद डार्क जोन या एफोटिक जोन शुरू हो जाता है. इस क्षेत्र में सूर्य की कोई रोशनी नहीं पहुंचती और चारों तरफ पूरी तरह अंधेरा होता है. डार्क जोन में तापमान बहुत कम और पानी का दबाव बेहद ज्यादा होता है. डार्क जोन को गहराई के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा गया है. 1,000 से 4,000 मीटर तक का हिस्सा मिडनाइट जोन कहलाता है, जहां एंगलर फिश, जाइंट स्क्विड, गुल्पर ईल और अपने शरीर से रोशनी पैदा करने वाले (बायोल्यूमिनेसेंट) जीव रहते हैं.

4,000 से 6,000 मीटर तक का हिस्सा एबिस जोन कहलाता है, जहां सी कुकंबर, विशाल एम्फीपॉड और एबिसल ऑक्टोपस जैसे गहरे समुद्र के जीव पाए जाते हैं. वहीं 6,000 मीटर से ज्यादा गहराई वाला हिस्सा हैडल जोन कहलाता है, जो समुद्र का सबसे गहरा और सबसे खतरनाक क्षेत्र माना जाता है. यहां हैडल स्नेलफिश, एम्फीपॉड और विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीव ज्यादा दबाव और पूरी तरह अंधेरे वातावरण में भी जीवित रहते हैं. 

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