Wind Turbine: भारत में बिजली की कीमतें लगातार बढ़ने के साथ कई घर के मालिक अब पारंपरिक सोलर पैनल के अलावा दूसरे एनर्जी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. ऐसा  ही एक उभरता हुआ समाधान है छोटे पैमाने पर छत पर लगने वाला पवन ऊर्जा सिस्टम. 100 वर्ग गज का घर भी छोटे घरेलू विंड टर्बाइन या फिर हाइब्रिड  विंड सोलर सेटअप का इस्तेमाल करके बिजली बना सकता है. स्थानीय हवा की स्थिति के आधार पर ऐसे सिस्टम घर के बिजली बिल को लगभग 50% से 80% तक कम कर सकते हैं. 

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कैसे करता है यह काम? 

घर पर हवा से बिजली बनाने के लिए छत पर या फिर इमारत के ऊपर एक खंभे पर एक छोटा घरेलू विंड टर्बाइन लगाया जाता है. जब हवा चलती है तो टर्बाइन के ब्लेड घूमते हैं और काइनेटिक एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल देते हैं. शहरी इलाकों में आमतौर पर छोटे, सभी दिशाओं में घूमने वाले या फिर क्षैतिज अक्ष वाले टर्बाइन पसंद किए जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे कम हवा की रफ्तार पर भी काम कर सकते हैं. टर्बाइन से बनी बिजली को फिर एक चार्ज कंट्रोलर और इन्वर्टर सिस्टम के जरिए कंट्रोल किया जाता है. यह बिजली को घर में इस्तेमाल होने वाली सामान्य बिजली में बदल देता है. 

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बिजली को जमा करती है बैटरी

क्योंकि हवा की रफ्तार पूरे दिन बदलती रहती है, इस वजह से इस सेटअप में बैटरी स्टोरेज की जरूरत होती है. तेज हवा के समय बनी बिजली को एक बैटरी बैंक में जमा किया जाता है और बाद में रात में या फिर जब हवा धीमी हो जाती है तब इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे घर के अंदर बिजली की लगातार सप्लाई बनी रहती है. 

एक छोटा विंड टर्बाइन कितनी बिजली बना सकता है? 

उद्योग के अनुमान के मुताबिक भारत में हवा की अच्छी स्थिति में लगाया गया एक किलो वाट का घरेलू विंड टर्बाइन हर दिन लगभग तीन से पांच यूनिट बिजली बना सकता है.  असल उत्पादन पूरी तरह से स्थानीय मौसम के पैटर्न, छत की ऊंचाई, आसपास की इमारत और उस इलाके में हवा की औसत रफ्तार पर निर्भर करता है. 

भारत में 1 किलोवाट के विंड टर्बाइन किट की कीमत आमतौर पर ₹45000 से ₹65000 के बीच होती है. अगर इसमें बैटरी, वायरिंग और फिटिंग जैसी सभी चीजों को शामिल कर लिया जाए तो इंस्टॉलेशन की कुल लागत बढ़कर लगभग 90 हजार से 1.25 लाख तक पहुंच सकती है.

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