Fighter Jets Names: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी जेट को सिर्फ जेट नंबर 1 कहने के बजाय F-16, Su-30MKI या Rafale जैसे नाम क्यों दिए जाते हैं? लड़ाकू विमान का नामकरण कोई मनमाना काम नहीं होता. यह एक व्यवस्थित प्रणाली है. आइए जानते हैं कि लड़ाकू जेट को उनके नाम कैसे मिलते हैं.

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अक्षरों और संख्याओं के पीछे का तर्क 

विमान के नामकरण के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणालियों में से एक है मिशन डिजाइन सीरीज. इसका पालन खास तौर से संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश करते हैं. इस प्रणाली में नाम के हर हिस्से का एक मतलब होता है. पहला अक्षर विमान की भूमिका को दर्शाता है. जैसे F का मतलब है फाइटर, B का मतलब है बॉम्बर, A का मतलब है अटैक विमान और T का मतलब है ट्रेनर.  इसके बाद आने वाली संख्या मॉडल के क्रम को दर्शाती है. जैसे F-16 और F-35. इसके बाद आता है प्रत्यय अक्षर. यह किसी खास प्रकार या फिर एडवांस्ड संस्करण को दर्शाता है. उदाहरण के लिए F-15E Strike Eagle में E संशोधित संस्करण को दर्शाता है जिसकी क्षमताएं बढ़ाई गई है. 

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निर्माता आधारित नामकरण प्रणाली 

रूस और यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे देशों में विमानों के नाम अक्सर सीधे निर्माता या फिर डिजाइन ब्यूरो से आते हैं. उदाहरण के लिए Su का मतलब है सुखोई. जैसे Sukhoi Su 30MKI. Mig का मतलब है मिकोयान गुरेविच. 

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उपनामों की शक्ति 

आधिकारिक नाम के अलावा कई लड़ाकू जेट विमान को ऐसे लोकप्रिय नाम दिए जाते हैं जिन्हें याद रखना आसान होता है. यह उपनाम आमतौर पर शक्ति और रफ्तार को दर्शाने के लिए चुना जाता है. कई विमानों के नाम शिकारी पक्षियों के नाम पर रखे जाते हैं, जैसे ईगल या फिर रेप्टर.

डेवलपमेंट के दौरान प्रोजेक्ट के नाम 

किसी भी फाइटर जेट को उसका आधिकारिक नाम या फिर  उपनाम मिलने से पहले डेवलपमेंट के दौरान उसका आमतौर पर एक प्रोजेक्ट नाम होता है. यह नाम अक्सर प्रतीकात्मक होने के बजाय तकनीकी होते हैं. उदाहरण के लिए भारत का आने वाला 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फ़ाइटर अभी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के नाम से जाना जाता है. इस तरह के नाम रिसर्च, टेस्टिंग और प्रोडक्शन के चरणों के दौरान प्रोग्राम की पहचान करने में मदद करते हैं.

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