एक्सप्लोरर

आपस में भिड़ जाएं पाक और हूती तो कौन पड़ेगा भारी, क्यों बढ़ रही आशंका?

सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता के मामले में पाकिस्तान हूती विद्रोहियों से बेहद आगे है. हालांकि हूतियों की गुरिल्ला युद्ध रणनीति और ईरान के साथ बिगड़ते संबंधों के डर से पाकिस्तान शायद संघर्ष में न उतरे.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • पाकिस्तान को ईरान से तनाव और घरेलू चुनौतियों का सामना।

सऊदी अरब के चार शहरों पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को एक नए चरम पर पहुंचा दिया है. अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और अरामको के तेल ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद इस क्षेत्रीय संघर्ष में पाकिस्तान के सीधे शामिल होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं के चलते पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बढ़ रहा है. आइए जानें कि अगर पाकिस्तान और हूती आपस में भिड़ते हैं तो कौन किसपर भारी पड़ेगा.

मिसाइल हमलों से दहला सऊदी अरब 

यमन के अल-हज्म शहर में स्थित एक जेल पर हुए हमले का बदला लेने के दावे के साथ हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बड़ा हमला बोला. इन हमलों में 73 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हुए इन हमलों के बाद रियाद और उसके सहयोगियों की सुरक्षा रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब में पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सैन्य बलों को सतर्क कर दिया है, जिससे इस संघर्ष का दायरा केवल दो देशों तक सीमित न रहकर बहुराष्ट्रीय मोड़ लेता दिख रहा है.

मक्का रक्षा समझौता और पाकिस्तान की संवैधानिक बाध्यता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते ने इस पूरे विवाद में इस्लामाबाद को मुख्य मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. इस त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते के नियमों के अनुसार, किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला बाकी देशों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों से साफ है कि यदि सऊदी अरब अपनी सुरक्षा के लिए आह्वान करता है, तो पाकिस्तान अपनी सैन्य प्रतिबद्धताओं से पीछे नहीं हट सकता है. इसके अतिरिक्त, लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी पाकिस्तान ने बल प्रयोग की चेतावनी दी है.

यह भी पढ़ें: ज्यादा सामान ले जाने पर क्यों बढ़ जाता है हवाई किराया, क्या है वजह?


आपस में भिड़ जाएं पाक और हूती तो कौन पड़ेगा भारी, क्यों बढ़ रही आशंका?

सैन्य क्षमता और संसाधनों में अंतर

यदि पारंपरिक सैन्य शक्ति के आधार पर तुलना की जाए, तो पाकिस्तान और हूतियों के बीच कोई सीधा मुकाबला नहीं है. ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 में 14वें स्थान पर काबिज पाकिस्तान एक मान्यता प्राप्त परमाणु शक्ति है. उसके पास लगभग 6,60,00,000 सक्रिय सैनिक, अत्याधुनिक F-16 और JF-17 लड़ाकू विमानों से लैस वायुसेना और एक सक्षम नौसेना है. दूसरी ओर, अंसारुल्लाह या हूती विद्रोही एक गैर-राज्य संगठन (मिलिशिया) हैं, जिनके पास 1 से 2 लाख के आसपास अनियमित लड़ाके हैं. उनके पास कोई प्रामाणिक वायुसेना या नौसेना मौजूद नहीं है.

हूतियों की गुरिल्ला रणनीति और एसिमेट्रिक वॉरफेयर

पारंपरिक सेना न होने के बावजूद हूती विद्रोहियों को नजरअंदाज करना बड़ी भूल होगी. ईरान समर्थित यह संगठन एसिमेट्रिक वॉरफेयर और गुरिल्ला युद्ध में महारत रखता है. यमन के कठिन पहाड़ी इलाकों पर इनकी मजबूत पकड़ है. इनके पास आधुनिक ड्रोन तकनीक, बैलिस्टिक मिसाइलें और एंटी-शिप मिसाइलें हैं, जिनके जरिए वे लाल सागर के संकरे समुद्री मार्ग बाम-अल-मंदेब और खाड़ी के तेल प्रतिष्ठानों को बड़ा नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं. वे आमने-सामने की जंग लड़ने के बजाय छिपकर और अचानक हमला करने की नीति पर काम करते हैं.

सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी 

पाकिस्तान और यमन के बीच की लंबी भौगोलिक दूरी को देखते हुए इस्लामाबाद द्वारा यमन की धरती पर सीधी थल सेना भेजने की संभावना न के बराबर है. वर्तमान में भी सऊदी अरब की आंतरिक सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के लगभग 8,000 सैनिक, एयर डिफेंस सिस्टम और लड़ाकू जेट तैनात हैं. यदि हूती विद्रोही सऊदी में स्थित पाकिस्तानी रक्षा प्रणालियों या सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं, तो पाकिस्तान को आत्मरक्षा में सीधे तौर पर हवाई और मिसाइल रक्षा अभियानों में उतरना पड़ेगा.


आपस में भिड़ जाएं पाक और हूती तो कौन पड़ेगा भारी, क्यों बढ़ रही आशंका?

पाकिस्तान के सामने कूटनीतिक और आंतरिक चुनौतियां

सैन्य रूप से मजबूत होने के बावजूद पाकिस्तान के लिए इस जंग में उतरना जोखिम से भरा है. हूतियों को ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है, और पाकिस्तान की सीमाएं ईरान से लगती हैं. हूतियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का मतलब तेहरान के साथ संबंधों में भारी तनाव पैदा करना होगा. इसके अलावा, पाकिस्तान खुद गंभीर आर्थिक तंगी, महंगाई और बलूचिस्तान जैसे आंतरिक क्षेत्रों में बढ़ते उग्रवाद से जूझ रहा है. ऐसे में किसी विदेशी जंग में गहराई से उलझना उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पटरी से उतार सकता है.

यह भी पढ़ें: काली या सफेद, किस रंग की टंकी में पानी कम होता है गर्म?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

सफेद शर्ट ही क्यों पहनते हैं पायलट, क्या है इसके पीछे की वजह?
सफेद शर्ट ही क्यों पहनते हैं पायलट, क्या है इसके पीछे की वजह?
अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?
अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?
फ्लाइट में कब फट जाता है पावर बैंक, जानें क्यों होता है ऐसा?
फ्लाइट में कब फट जाता है पावर बैंक, जानें क्यों होता है ऐसा?
साल 2100 में कैसे खत्म हो जाएगी दुनिया, AI के अलावा कौन बनेगा खतरा?
साल 2100 में कैसे खत्म हो जाएगी दुनिया, AI के अलावा कौन बनेगा खतरा?
Advertisement

वीडियोज

सगाई के बाद... किडनैपिंग का प्लान !
विपक्षी मार्च..'शिव बारात' या 'अराजक जमात'?
Gyanesh Kumar के खिलाफ Rahul Gandhi अब क्या करेंगे?
CEC पर बवाल...अब सुप्रीम कोर्ट ही करेगा समाधान?
Gyanesh Kumar के खिलाफ Rahul Gandhi का 'तांडव'!
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
रूस और पाकिस्तान की बढ़ी दोस्ती, अब पुतिन ने किसे भेजा, भारत के लिए टेंशन?
रूस और पाकिस्तान की बढ़ी दोस्ती, अब पुतिन ने किसे भेजा, भारत के लिए टेंशन?
शिवा शर्मा मर्डर: हर साल बदल जाता था नंबर, दोस्त की मदद से नेपाल भागी आरोपी श्रद्धा
शिवा शर्मा मर्डर: हर साल बदल जाता था नंबर, दोस्त की मदद से नेपाल भागी आरोपी श्रद्धा
एक महल से दूसरे महल क्यों भागे फिर रहे सऊदी क्राउन प्रिंस? खालिद एयरपोर्ट बंद
एक महल से दूसरे महल क्यों भागे फिर रहे सऊदी क्राउन प्रिंस? खालिद एयरपोर्ट बंद
जब शूटिंग करते-करते कार से कहीं और चले गए किशोर कुमार, घर में लगा रखी थी खोपड़ी और हड्डियां
जब शूटिंग करते-करते कहीं और चले गए किशोर कुमार, घर में लगा रखी थी खोपड़ी और हड्डियां
जमानत पर रिहा होकर जड़ा शतक, मैदान पर निकले आंसू; अभिषेक पोरेल ने सुनाई जेल की कहानी
जमानत पर रिहा होकर जड़ा शतक, मैदान पर निकले आंसू; अभिषेक पोरेल ने सुनाई जेल की कहानी
दिल्ली में बदला हुआ है मौसम का मिजाज, साफ हुई हवा, जानें आज का मौसम
दिल्ली में बदला हुआ है मौसम का मिजाज, साफ हुई हवा, जानें आज का मौसम
गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से HC का इनकार, ED को नहीं मिली राहत
गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से HC का इनकार, ED को नहीं मिली राहत
यूपी में बारिश के बाद बढ़ी ठंडक, अगले 3 दिनों के लिए भी अलर्ट जारी
यूपी में बारिश के बाद बढ़ी ठंडक, अगले 3 दिनों के लिए भी अलर्ट जारी
Embed widget