History of Temple Donations: जब भी हम किसी मंदिर में जाते हैं, तो हर किसी के मन को शांति मिलती है.  सालों से मंदिरों में एक परंपरा चलती आ रही है, जो दुनिया के हर मंदिर में की जाती है, वह है मंदिर में दान करना. आज के समय में पैसों और धातु के अलावा, अब लोग जमीन-जायदाद भी दान कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं यह प्रथा, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है, इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई होगी. बता दें कि मंदिर में दान देने की यह आदत हजारों साल पुरानी है और इसके पीछे एक बेहद गहरी और दिल को छू लेने वाली कहानी है. आइए आपको बताते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी. 

Continues below advertisement

वेदों से शुरू हुई दान की यात्रा

भारत में दान देने की परंपरा वैदिक काल से चलती आ रही है. वैदिक काल यानी करीब 5,000 साल पहले से. जिसमें दान का अर्थ माना जाता है बिना किसी उम्मीद के किसी को कुछ देना. वहीं ऋग्वेद में दान को सत्य से जोड़ा गया है. इसके अलावा बृहदारण्यक उपनिषद में भी कहा गया है कि एक अच्छे इंसान में तीन गुण होने चाहिए दम, दया और दान.यानी पहले के दौर में दान सिर्फ पैसे देना नहीं था, यह इंसान के अच्छे चरित्र की पहचान थी. 

यह भी पढ़ेंः Cheap Homes: इस देश में कौड़ियों के दाम मिलते हैं घर, कीमत सुनकर नहीं होगा यकीन

Continues below advertisement

राजाओं ने दिया मंदिरों को दान का नया रूप

समय बदला और राजा-महाराजाओं के युग में मंदिरों में दान देने की परंपरा एक नया मोड़ लेने लगी. इतिहासकार बर्टन स्टेन के अनुसार उस दौर में भक्त मंदिरों को मेलवारम यानी दान के रूप में धन देते थे. यह पैसा भूखे लोगों को खाना खिलाने और सिंचाई जैसे सार्वजनिक कामों में लगाया जाता था. छठी सदी ईसा पूर्व से यह सामुदायिक दान की परंपरा जोर पकड़ने लगी, जिससे बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी शामिल करने लगे. 

मंदिर बने समाज की रीढ़

प्राचीन भारत में मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं थे, वे पूरे समाज की जरूरतें पूरी करते थे. जो दान मंदिरों को मिलता था, उससे गरीबों को खाना, गरीब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई होती थी. यह बात महाभारत में भी लिखी गई है कि अपनी कमाई का एक तिहाई हिस्सा समाज के काम में लगाना चाहिए, इससे जरूरतमंदों को सहारा मिलता है.  हमारे पूर्वजों ने यही सोचकर मंदिरों में दान देना शुरू किया था, ताकि इससे धन संकट के समय पूरे समाज के काम आएगा. 

यह भी पढ़ेंः  न खून-खराबा..न सैनिकों की शहादत, कहां हुई थी वह जंग, जहां लड़ने गए थे 80 सैनिक और वापस लौटे 81?