दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संगठन अहम भूमिका निभाते हैं. जब भी ग्लोबल सुपरपावर की बात होती है तो जी7, जी20 और ब्रिक्स का नाम सबसे पहले लिया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन तीनों में से सबसे ज्यादा रसूखदार, अमीर और सैन्य रूप से मजबूत संगठन कौन सा है? चलिए समझते हैं कि वैश्विक रूप से इनमें से कौन सा संगठन बाजी मारता है. 

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कूटनीति और ताकत के लिहाज से सबसे मजबूत कौन?

वैश्विक कूटनीति और सामूहिक ताकत के नजरिए से देखा जाए तो जी20 दुनिया के सबसे प्रभावशाली और बड़ा मंच बनकर उभरता है. इस ग्रुप की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह किसी एक विचारधारा या फिर क्षेत्र तक सीमित नहीं है. इसमें जी7 के सभी रईस और विकसित देश शामिल हैं और ब्रिक्स के तेजी से बढ़ते हुए विकासशील देश भी शामिल हैं. यही वजह है कि दुनिया के पास कुल आबादी का करीब दो-तिहाई हिस्सा और वैश्विक व्यापार की 80 फीसदी हिस्सेदारी होती है. जब पूरी दुनिया के लिए कोई बड़ा आर्थिक या फिर रणनीतिक फैसला लेना होता है तो वह जी20 मंच बनता है, जहां सभी महाशक्तियां एक ही मंच पर बैठती हैं.

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अमीर देशों का सबसे पुराना और रईस ग्रुप

अगर इनकी ताकत को केवल नॉमिनल जीडीपी और तकनीकी रसूख के जरिए मापा जाए तो जी7 आज भी दुनिया का सबसे रईस और मजबूत ब्लॉक माना जाता है. इस ग्रुप में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान जैसे देश शामिल हैं. इस देशों की कुल नॉमिनल जीडीपी 51-52 ट्रिलियन डॉलर के बीच है, जो कि दुनिया के कुल उत्पादन का 44 प्रतिशत बैठता है. आधुनिक तकनीक, AI, सेमीकंडक्टर और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं पर आज भी इस ग्रुप का कंट्रोल है. इन दोनों देशों में रहने वाले लोगों की प्रति व्यक्ति आय भी बाकी दोनों ग्रुपों के मुकाबले कहीं ज्यादा है.

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तेजी से उभरती नई महाशक्तियों का गठबंधन कौन?

दूसरी तरफ ब्रिक्स दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक ऐसा समूह है, जो कि ग्लोबल साउथ यानि जितने भी विकासशील देश हैं, उनकी आवाज बन रहा है. ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों वाले इस ग्रुप का मेन मकसद दुनिया को बहु-ध्रुवीय बनाना है, ताकि किसी एक देश का दबदबा न रहे. क्रय शक्ति समता के आधार पर बात करें तो ब्रिक्स ने अमीर देशों के समूह जी7 को भी पीछे छोड़ दिया है. वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी तक पहुंच गई है, जो कि इसकी बढ़ती आर्थिक ताकत का बड़ा सबूत हैं.

पैसों के मामले में किसका पलड़ा भारी?

जब हम पैसे और अर्थव्यवस्था की बात करते हैं तो तीनों ग्रुप्स के बीच मुकाबला दिलचस्प हो जाता है. नॉमिनल जीडीपी के मामले में आज भी जी7 दुनिया में सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है, क्योंकि इसके सदस्यों के पास सदियों से संचित संपत्ति और मजबूत मुद्राएं हैं. लेकिन अगर हम क्रय शक्ति समता की बात करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों की मानें तो ब्रिक्स इस रेस में जी7 से आगे निकल चुका है. वहीं जी20 में इन दोनों ग्रुप्स के देश शामिल हैं. इसलिए अकेले जी20 का दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में 85 से 90 फीसदी का हिस्सा शामिल है.

सेना और हथियारों के खेल में कौन आगे?

सुरक्षा और आधुनिक हथियारों और रक्षा बजट के मामले में जी7 ग्रुप का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है. इस ग्रुप में शामिल अकेले अमेरिका का रक्षा बजट ही इतना बड़ा है कि उसके सामने बाकी देशों की सैन्य अर्थव्यवस्थाएं छोटी नजर आती हैं. जी7 देशों के पास अत्याधुनिक वॉर शिप, फाइटर जेट और न्यूक्लियर बमों का सबसे एडवांस जखीरा मौजूद है. भले ही सैनिक बलों की कुल संख्या के मामले में ब्रिक्स के पास भारत और चीन जैसे विशाल आबादी वाले देशों के कारण दुनिया की सबसे बड़ी थल सेना हो, लेकिन जब बात सैन्य तकनीक, बजट और आधुनिक हथियारों की आती है तो जी7 काफी आगे निकल जाता है.

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