America Independence Day: अमेरिका आज स्वतंत्रता दिवस मना रहा है.  आज अमेरिका को दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक माना जाता है. लेकिन इसकी शुरुआत औपनिवेशिक शासन के तहत हुई थी. भारत की तरह अमेरिका पर भी कभी ब्रिटिश साम्राज्य का शासन था. 

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अमेरिका को ब्रिटेन से आजादी मिली 

एक आजाद देश बनने से पहले आज के अमेरिका के पूर्वी हिस्से में 13 ब्रिटिश उपनिवेश थे. 4 जुलाई 1776 को 13 उपनिवेशों के प्रतिनिधियों ने स्वतंत्रता की घोषणा को अपनाया और औपचारिक रूप से ब्रिटिश शासन से अलग होने की घोषणा की. हालांकि संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ. अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध कई सालों तक चला. इसके बाद 1783 में पेरिस की संधि के जरिए ब्रिटेन ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका को एक आजाद देश के रूप में मान्यता दी.

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क्षेत्रीय विस्तार ने अमेरिका का भविष्य बदल दिया 

अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़े मोड़ में से एक 1803 में लुइसियाना खरीद के साथ आया. अमेरिका ने नेपोलियन बोनापार्ट के नेतृत्व वाले फ्रांस से विशाल लुइसियाना क्षेत्र 15 मिलियन डॉलर में खरीदा. इस एक समझौते ने देश के जमीनी क्षेत्रफल को लगभग दोगुना कर दिया.

अगले दशकों में अमेरिका ने 1848 में मेक्सिको को हराकर और कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे क्षेत्रों पर अपना कंट्रोल ले लिया और उनका विस्तार किया. बाद में 1898 में स्पेनिश अमेरिकी युद्ध में जीत से अमेरिका को प्यूर्तो रिको, गुआम और फिलीपींस जैसे विदेशी क्षेत्र मिले. इससे एक वैश्विक शक्ति के रूप में उसका उदय हुआ. 

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विश्व युद्ध ने अमेरिका की वैश्विक स्थिति को ऊंचा उठाया 

दो विश्व युद्ध ने वैश्विक शक्ति के संतुलन को नाटकीय रूप से बदल दिया. पहले विश्व युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. इसी के साथ अमेरिका ने मित्र देशों को हथियार, भोजन और आर्थिक मदद दी. यही वजह है कि अमेरिका ने काफी धन और दुनिया का सबसे बड़ा सोने का भंडार जमा कर लिया. 

इसी के साथ दूसरे विश्व युद्ध ने अमेरिका की स्थिति को और भी मजबूत किया. पर्ल हार्बर पर हमले के अलावा अमेरिकी मुख्य भूमि बड़े पैमाने पर तबाही से बची रही. युद्ध के अंत की तरफ अमेरिका ने परमाणु बम विकसित किया और हिरोशिमा और नागासाकी के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करके अपनी सैन्य मजबूती को साबित किया. जब युद्ध खत्म हुआ तो यूरोप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका था और अमेरिका दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक और सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका था.

डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी बन गया 

एक और बड़ी उपलब्धि 1944 में ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन के दौरान मिली. अमेरिकी डॉलर दुनिया की मुख्य रिजर्व करेंसी बन गया. इसे अमेरिका के बड़े सोने के भंडार का समर्थन प्राप्त था. इसी दौरान इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड और वर्ल्ड बैंक जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान भी स्थापित किए गए. इनके मुख्यालय अमेरिका में स्थित थे.

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