भारत में ड्राई फ्रूट्स की खपत लगातार बढ़ रही है, चाहे वो त्योहारों का मौसम हो या रोजमर्रा की सेहत से जुड़ी जरूरतें. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि जिन बादाम, काजू और अखरोट को हम रोज खाते हैं, उनका बड़ा हिस्सा असल में विदेशों से मंगाया जाता है.घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हर साल अमेरिका, कैलिफोर्निया से भारी मात्रा में बादाम और वियतनाम व अफ्रीकी देशों से कच्चा काजू आयात किया जाता है. आइए जानते हैं कि भारत किस देश से कौन-सा ड्राई फ्रूट सबसे ज्यादा आयात करता है.

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बादाम के लिए अमेरिका पर सबसे ज्यादा निर्भरता

भारत में खाए जाने वाले बादाम का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है. अमेरिका के कैलिफोर्निया क्षेत्र को दुनिया में बादाम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में खपत होने वाले कुल बादाम में से करीब 73 प्रतिशत हिस्सा अकेले कैलिफोर्निया से आता है. अमेरिका दुनिया के कुल बादाम निर्यात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अकेले उपलब्ध कराता है, जिसकी वजह से भारत जैसे बड़े बाजार में उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है.

काजू के लिए अफ्रीकी देशों का सहारा

भारत खुद दुनिया के बड़े काजू उत्पादक देशों में गिना जाता है, लेकिन घरेलू फैक्ट्रियों की जरूरत पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा काजू बाहर से मंगाना पड़ता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय काजू उद्योग की करीब आधी जरूरत आयातित कच्चे काजू से पूरी होती है, जिसमें आइवरी कोस्ट, तंजानिया, घाना, बेनिन और गिनी-बिसाऊ जैसे अफ्रीकी देशों की बड़ी भूमिका है. ये अफ्रीकी देश दुनिया में कच्चे काजू के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, इसलिए भारतीय प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए ये अहम सप्लायर बन जाते हैं.

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अखरोट के लिए अफगानिस्तान और चिली अहम स्रोत

भारत में अखरोट की खेती मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होती है, लेकिन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए यहां भी विदेशी अखरोट का सहारा लिया जाता है. हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आयात होने वाले अखरोट में सबसे ज्यादा आपूर्ति अफगानिस्तान, चिली और ऑस्ट्रेलिया से होती है, जबकि अमेरिका से आयात इनके मुकाबले काफी कम रहता है. 

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आयात की क्यों पड़ती है जरूरत?

भारत में ड्राई फ्रूट्स की खपत उसके घरेलू उत्पादन से कहीं ज्यादा है, यही मुख्य वजह है कि बादाम, काजू और अखरोट जैसे मेवों के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है, इसके अलावा कुछ देशों में जलवायु और बड़े पैमाने पर खेती की वजह से वहां का उत्पादन इतना ज्यादा होता है कि वे दुनियाभर में सस्ती दरों पर सप्लाई कर पाते हैं, जिसका फायदा भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार को मिलता है.

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