दुनिया में कई तानाशाह हुए लेकिन हिटलर एक ऐसा नाम रहा, जिसको शायद ही कोई भूल पाया हो. आज भी अगर किसी को ऐसा लगता है कि जबरदस्ती कोई फरमान लागू करवाया जा रहा है तो वो उसके लिए यही कहता है कि हिटलर राज चल रहा है. लेकिन दुनिया में एक तानाशाह ऐसा भी रहा है, जिससे अमेरिका जैसा ताकतवर देश भी खौफ खाता था. इस शख्स का नाम था सद्दाम हुसैन और दुनिया इसे तानाशाह कहकर बुलाती थी. सद्दाम ऐसा तानाशाह जिसने जमकर कत्लेआम मचाया था और आज से करीब 19 साल पहले उसको अमेरिका ने फांसी पर लटका दिया था. आइए सद्दाम हुसैन के बारे में जानते हैं. 

ऐसे इराक का राष्ट्रपति बना सद्दाम हुसैन

सद्दाम हुसैन का जन्म इराक की राजधानी बगदाद के उत्तर में स्थित तिकरित के पास अल ओजा गांव में हुआ था. बचपन से काफी विद्रोह देख चुके सद्दाम ने भी विद्रोह की राह पकड़ ली थी और 1956 में बाथ सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए. 1962 में इराक में भीषण विद्रोह हुआ, तब राजशाही को हटाकर ब्रिगेडियर अब्दुल करीम कासिम ने खुद सत्ता हथिया ली थी. सद्दाम भी इस विद्रोह का हिस्सा था. सत्ता विद्रोहियों के हाथ में आई तो उसका हौसला और बढ़ गया. इसी वजह से 1986 में सद्दाम ने जनरल अहमद हसन अल बक्र के साथ मिलकर फिर से सत्ता के खिलाफ विद्रोह किया और सत्ता जनरल बक्र के पास आ गई. इसे उन्होंने 11 साल तक संभाला. सद्दाम ने मौका देखकर और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बक्र से जबरदस्ती इस्तीफा दिलवाया और 1979 में सत्ता पर काबिज हो गया. 42 साल में उसने खुद को इराक का राष्ट्रपति घोषित कर दिया था. 

बढ़ता गया निरंकुश तानाशाही शासन

सद्दाम हुसैन के राष्ट्रपति बनने के बाद इराक में तरक्की तो बहुत हुई, लेकिन विद्रोही कभी सिर नहीं उठा सकते थे. अगर कोई सिर उठते भी थे तो वो हमेशा हमेशा के लिए कुचल दिए जाते थे. कहा जाता है कि सद्दाम ने अपने खिलाफ विद्रोह करने वाले 66 लोगों को देशद्रोही बताकर मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद वह धीरे-धीरे बिल्कुल निरंकुश होता गया. उसने ईरान और बाद में कुवैत पर हमला कर दिया. अमेरिका को कुवैत पर हमला करने की सद्दाम की चाल बिल्कुल पसंद नहीं आई. 

अमेरिका ने 27 देशों के साथ कुवैत को बचाया

अमेरिका ने सद्दाम से कहा कि वो कुवैत से तुरंत हट जाए. वहां से हटना तो दूर सद्दाम ने कुवैत को इराक का नया प्रांत घोषित कर दिया. हद तो तब हो गई जब सऊदी अरब की सीमा पर भी सद्दाम ने अपनी सेना की तैनाती का आदेश दिया. बस फिर क्या था अमेरिका को बहाना मिल गया. उसने कुवैत को आजाद कराने के लिए 27 और देशों का सहारा लिया और सबने मिलकर 1991 में सद्दाम को कुवैत से हटा दिया. कुवैत हमले के बाद सद्दाम ने दुनिया में कई तरह के प्रतिबंध लगाए तो इराक की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी. उधर अमेरिका में सरकार बदल गई और जॉर्ज बुश राष्ट्रपति बन गए. अमेरिका ने इराक को दुनिया के लिए खतरा बताना शुरू कर दिया. इस पर इराक ने अपने खतरनाक हथियार नष्ट कर दिए. फिर भी अमेरिका नहीं माना और उसने 2003 में इराक पर हमला कर दिया. 20 दिन की लड़ाई में इराक तहस नहस हो गया, लेकिन सद्दाम हाथ नहीं आया. 

ऐसे पकड़ा गया सद्दाम हुसैन

आखिरकार अमेरिका ने सद्दाम को पकड़ने में पूरी ताकत लगा दी और 13 दिसंबर 2003 को अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे एक सुरंग से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद सद्दाम पर कार्रवाई शुरू हुई और उसे दुजेल नरसंहार मामले में दोषी करार दिया गया. इस मामले में 30 दिसंबर 2006 को 69 साल की उम्र में सद्दाम को अमेरिका में फांसी हो गई थी.

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