Food Starvation Effects: मानव अस्तित्व के लिए भोजन काफी जरूरी है लेकिन मानव शरीर में कुछ ऐसे तंत्र हैं जो उसे भूख के समय को सहन करने में मदद करते हैं. सामान्य परिस्थितियों में अगर पानी मौजूद रहे तो एक स्वस्थ व्यस्क कई हफ्तों तक खाने के बिना जिंदा रह सकता है. हालांकि एक बार जब शरीर का ऊर्जा भंडार समाप्त हो जाता है तो भुखमरी जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है. इससे आखिर में मौत हो जाती है.

Continues below advertisement

इंसान खाने के बिना कितने वक्त तक जिंदा रह सकता है? 

एक स्वस्थ आदमी आमतौर पर खाने के बिना लगभग 30 से 60 दिनों तक जिंदा रह सकता है. बस शर्त यह है कि वह पर्याप्त मात्रा में पानी पीता रहे. सटीक समय उम्र, शरीर के वजन, व्यक्ति के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थितियों पर निर्भर करता है. 

Continues below advertisement

स्थिति तब और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब खाना और पानी दोनों ही मौजूद ना हो. ऐसे मामलों में जिंदा रहने की अवधि आमतौर पर लगभग 3 से 7 दिनों तक सीमित होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि निर्जलीकरण तेजी से अंग विफलता की वजह बनता है.

भुखमरी के दौरान शरीर के अंदर क्या होता है? 

खाने का सेवन बंद करने पर शरीर तुरंत बंद नहीं होता. इसके बजाय यह ऊर्जा के दूसरे तरीकों की खोज करते समय कुछ चरणों से गुजरता है. पहले एक या फिर दो दिनों के दौरान शरीर लीवर और मसल्स में इकट्ठा ग्लाइकोजन पर निर्भर करता है. ग्लाइकोजन संग्रहित ग्लूकोज का एक रूप है जो तुरंत ऊर्जा देता है. एक बार जब यह भंडार समाप्त हो जाते हैं तो शरीर को जरूरी अंगों को काम करते रखने के लिए दूसरे ईंधन स्त्रोत ढूंढने होते हैं. 

ग्लाइकोजन भंडार समाप्त होने के बाद आमतौर पर कुछ दिनों के अंदर ही शरीर वसा भंडार को तोड़ना शुरू कर देता है. इस प्रक्रिया से कीटोन बॉडी नाम का पदार्थ पैदा होता है.‌ यह दिमाग और दूसरे अंगों को ऊर्जा की आपूर्ति करने में मदद करता है.  इस चरण के दौरान जरूरी वजन घटता है क्योंकि संग्रहित वसा धीरे-धीरे खपत होती है.

जब वसा भंडार गंभीर रूप से कम हो जाता है तो शरीर अपने सबसे खतरनाक चरण में चला जाता है. वसा जलाने के बजाय यह ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए जरूरी अंगों से मांसपेशियों के टिशु और प्रोटीन को तोड़ना शुरू कर देता है. दिल, फेफड़े, लिवर, किडनी और दूसरे अंग धीरे-धीरे सिकुड़ते और कमजोर होते जाते हैं. इस दौरान गंभीर कुपोषण विकसित होता है और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है. 

भुखमरी कब खतरनाक हो जाती है? 

भुखमरी तब जीवन के लिए खतरनाक बन जाती है जब शरीर अपनी बुनियादी ऊर्जा स्रोतों को पूरा नहीं कर पाता और जरूरी अंग काम करना बंद करने लगते हैं. शरीर की सुरक्षात्मक प्रणाली नष्ट हो जाती है जिस वजह से तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप और पोषण संबंधी सहायता के बिना रिकवरी करना मुश्किल हो जाता है.

मल्टीपल ऑर्गन फेलियर 

भुखमरी से मृत्यु की सबसे बड़ी वजह कई अंगों की विफलता है. जरूरी पोषक तत्वों के बिना गुर्दे, लीवर और फेफड़े जैसे अंग ठीक से काम करने की क्षमता खो देते हैं. इसके बाद जीवित रहना असंभव हो जाता है. लंबे समय तक भूखे रहने से दिल पर भी असर पड़ता है. क्योंकि ऊर्जा के लिए मांसपेशियों के टिशु का टूटना शुरू हो जाता है, दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इससे दिल की लय ऊपर नीचे हो सकती है, पंप करने की क्षमता कम हो सकती है, रक्तचाप खतरनाक रूप से कम हो सकता है और अंत में दिल काम करना बंद कर सकता है.

यह भी पढ़ेंः कैसे बनी थी दुनिया? बिग बैंग के बाद सबसे पहले कहां अस्तित्व में आई थी आबादी