दिवाली आते ही पटाखों और उनकी आतिशबाजी की चर्चा शुरू हो जाती है. प्रदूषण और पटाखों पर लगने वाली पाबंदियों को लेकर भी बहस होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में दिवाली के अलावा भी कई त्योहार और खास मौके ऐसे हैं, जब लोग आतिशबाजी करके खुशियां मनाते हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में इन मौकों पर पटाखे जलाने का चलन देखने को मिलता है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ त्योहारों और अवसरों के बारे में.

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गुरु पर्व, छठ पूजा और काली पूजा

सिख समुदाय के प्रमुख त्योहार गुरु नानक जयंती यानी गुरु पर्व पर गुरुद्वारों को रोशनी से सजाया जाता है. कई जगहों पर इस मौके पर पटाखों की आतिशबाजी भी की जाती है. वहीं बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में छठ पूजा के दौरान भी पटाखे जलाए जाते हैं. इस पर्व पर लोग डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं.पश्चिम बंगाल में दिवाली के समय काली पूजा का विशेष महत्व है. इस दौरान मां काली की पूजा के साथ कई जगहों पर रोशनी और पटाखों से आतिशबाजी की जाती है. 

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क्रिसमस, नया साल, लोहड़ी और मकर संक्रांति

क्रिसमस और नए साल के मौके पर भी कई शहरों में आतिशबाजी देखने को मिलती है. 24 दिसंबर की रात चर्च और घरों को सजाया जाता है, जबकि 31 दिसंबर की रात लोग नए साल का स्वागत करते हुए पटाखे जलाते हैं. होटल, क्लब और सार्वजनिक आयोजनों में भी विशेष पटाखों से आतिशबाजी रखी जाती है.इसके अलावा लोहड़ी पर पंजाब और उत्तर भारत के कई इलाकों में लोग अलाव जलाकर त्योहार मनाते हैं. मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का उत्साह रहता है. कुछ जगहों पर शाम के समय पटखें भी जलाते  है. दक्षिण भारत के पोंगल उत्सव में भी कुछ क्षेत्रों में पटाखे जलाने का चलन है.

गणेश चतुर्थी, दशहरा और शादी-विवाह

महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में गणेश चतुर्थी के दौरान गणपति बप्पा के स्वागत और विसर्जन के समय भी पटाखों आतिशबाजी की जाती है. दशहरे पर रावण दहन के दौरान भी कई जगह पटाखे और आतिशबाजी देखने को मिलती है. इसके अलावा शादी-विवाह, चुनाव में जीत, खेल प्रतियोगिताओं में सफलता और बड़े सामाजिक समारोहों में भी लोग पटाखे जल कर के जश्न मनाते हैं.

पर पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज लोगों की सेहत के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को इससे दिक्कत होती है. इसलिए किसी भी त्योहार या मौके पर आतिशबाजी करते समय स्थानीय नियमों और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.

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