<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>21 जून को क्यों थम जाता है सूरज? जानिए सबसे लंबे दिन और गायब होती परछाई के पीछे का सच</title><atom:link href="https://www.abplive.com/gk/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Fri, 19 Jun 2026 14:28:26 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[BPL Card: 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर, जानिए अब देश में कितने लोगों के पास है BPL कार्ड?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/pm-modi-in-paris-25-crore-people-came-out-of-poverty-know-how-many-bpl-beneficiaries-are-there-in-india-today-3147651</link><comments>https://www.abplive.com/gk/pm-modi-in-paris-25-crore-people-came-out-of-poverty-know-how-many-bpl-beneficiaries-are-there-in-india-today-3147651#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:27:21 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/pm-modi-in-paris-25-crore-people-came-out-of-poverty-know-how-many-bpl-beneficiaries-are-there-in-india-today-3147651</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;BPL Card:&lt;/strong&gt; पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दशक में भारत के आर्थिक और सामाजिक बदलाव पर जोर दिया. प्रधानमंत्री &lt;a title=&quot;नरेंद्र मोदी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/narendra-modi&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;नरेंद्र मोदी&lt;/a&gt; ने कहा कि पिछले 12 सालों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर इतने लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं तो आज भी कितने लोग भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली के तहत बीपीएल कार्ड का फायदा उठा रहे हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;25 करोड लोग गरीबी रेखा से बाहर&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सरकार और नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 और 2026 के बीच 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं. बहुआयामी गरीबी को सिर्फ इनकम से नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, स्वच्छता, बिजली, पोषण और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंच के आधार पर मापा जाता है. इन क्षेत्रों में सुधार से लाखों परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिली है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;राशन कार्ड का फायदा कितने लोग उठा रहे?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गरीबों के स्तर में कमी होने के बावजूद भी आबादी का एक काफी बड़ा हिस्सा अभी भी राशन कार्ड का फायदा उठा रहा है. केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में राशन कार्ड के जरिए लगभग 79 करोड़ लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में आते हैं. &amp;nbsp;इन लाभार्थियों को सरकार की अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी वाला या फिर मुफ्त अनाज दिया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अयोग्य लाभार्थियों को हटाना&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सरकार ने बीते कुछ सालों में एक बड़ा सत्यापन और डिजिटलीकरण अभियान चलाया है. ऐसे इसलिए ताकि फायदा सिर्फ योग्य परिवारों तक ही पहुंचे. इस अभियान के तहत लगभग 2.21 करोड़ अयोग्य राशन कार्ड रद्द किए गए हैं. इसी के साथ मृत व्यक्ति, इनकम टैक्स पेयर, डुप्लिकेट लाभार्थी और ज्यादा इनकम वाले कुछ परिवारों के कार्ड हटा दिए गए. अब राज्यों के पास योग्य परिवारों को लगभग 3 करोड़ नए राशन कार्ड जारी करने की क्षमता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;होर्मुज स्ट्रेट से जहाज को भारत आने में कितना टाइम लगता है, खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी सप्लाई?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/indian-lng-tanker-disha-arrives-dahej-port-how-long-does-it-take-for-a-ship-to-reach-india-from-the-strait-of-hormuz-know-here-3147569&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;होर्मुज स्ट्रेट से जहाज को भारत आने में कितना टाइम लगता है, खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी सप्लाई?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पुराने बीपीएल कार्ड सिस्टम का क्या हुआ?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;काफी लोग अभी भी राशन लाभार्थियों को बीपीएल कार्ड धारक कहते हैं लेकिन पारंपरिक बीपीएल सिस्टम पूरी तरह से बदल चुका है और पुराने रूप में मौजूद नहीं है. 2013 में नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट लागू होने के बाद सरकार ने पुरानी बीपीएल और एपीएल की जगह दो नई कैटेगरी बनाईं हैं. पहली कैटेगरी का नाम है प्रायोरिटी हाउसहोल्ड. इसमें वे परिवार आते हैं जो ज्यादातर पहले की बीपीएल व्यवस्था के तहत आते थे. इसमें लाभार्थियों को हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज मिलता है. दूसरी कैटेगरी का नाम है अंत्योदय अन्न योजना. इसमें सबसे गरीब और सबसे कमजोर परिवारों को रखा जाता है. इसमें पात्र परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मौजूदा बीपीएल जैसी कैटेगरी में कितने लोग आते हैं?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्योंकि सरकार अब अलग से बीपीएल के आंकड़े जारी नहीं करती इस वजह से प्रायोरिटी हाउसहोल्ड को ही इसके सबसे करीब का पैमाना माना जाता है. नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत आने वाले 79 करोड़ राशन लाभार्थियों में से लगभग 65 करोड़ लोग प्रायोरिटी हाउसहोल्ड कैटेगरी में आते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;शिवसेना के बागी सांसदों को मिली Y+ सिक्योरिटी, कौन उठाएगा इसका खर्चा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/maharashtra-politics-rebel-shiv-sena-mps-granted-y-security-know-who-will-bear-the-cost-3147512&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;शिवसेना के बागी सांसदों को मिली Y+ सिक्योरिटी, कौन उठाएगा इसका खर्चा?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/1e5d45baf9f45dc47a13055bdd5ad9f717818592150891307_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट से जहाज को भारत आने में कितना टाइम लगता है, खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी सप्लाई?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/indian-lng-tanker-disha-arrives-dahej-port-how-long-does-it-take-for-a-ship-to-reach-india-from-the-strait-of-hormuz-know-here-3147569</link><comments>https://www.abplive.com/gk/indian-lng-tanker-disha-arrives-dahej-port-how-long-does-it-take-for-a-ship-to-reach-india-from-the-strait-of-hormuz-know-here-3147569#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:58:28 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/indian-lng-tanker-disha-arrives-dahej-port-how-long-does-it-take-for-a-ship-to-reach-india-from-the-strait-of-hormuz-know-here-3147569</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Strait of Hormuz:&lt;/strong&gt; अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते से भारत को बड़ी राहत मिली है. होर्मुज स्ट्रेट से पहला एलएनजी कैरियर सफलतापूर्वक भारत के पश्चिमी तट तक आ गया है. दिशा नाम का एलएनजी जहाज गुजरात के भरूच जिले में दहेज पोर्ट पर पहुंच चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज से जहाज को भारत आने में कितना समय लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत पहुंचने में जहाज को कितना समय लगता है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक का सफर दूसरे इंटरनेशनल शिपिंग रूट की तुलना में काफी छोटा है. होर्मुज को पार करने के बाद कांडला, मुंद्रा, मुंबई या फिर दहेज जैसे बंदरगाहों की तरफ जाने वाले जहाजों को अरब सागर में लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बड़े तेल टैंकर और एलएनजी कैरियर आमतौर पर &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; की स्थिति, समुद्री ट्रैफिक और कार्गो लोड के बेस पर यह पूरा सफर 48 से 72 घंटे में पूरा कर लेते हैं. ठीक परिस्थितियों में कुछ जहाज लगभग 33 घंटे के अंदर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब सामान्य होगी स्थिति?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर भी वैश्विक और भारतीय सप्लाई चेन को पूरी तरह से नॉर्मल होने में लगभग 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं. आपको बता दें कि सप्लाई चेन रातों-रात सामान्य नहीं हो सकती. शांति समझौते के बावजूद भी इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a title=&quot;शिवसेना के बागी सांसदों को मिली Y+ सिक्योरिटी, कौन उठाएगा इसका खर्चा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/maharashtra-politics-rebel-shiv-sena-mps-granted-y-security-know-who-will-bear-the-cost-3147512&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;शिवसेना के बागी सांसदों को मिली Y+ सिक्योरिटी, कौन उठाएगा इसका खर्चा?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सैकड़ों जहाजों का इंतजार&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक है जहाजों का भारी जमावड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 500 कमर्शियल जहाज और कार्गो कैरियर मंजूरी और सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहे हैं. सुरक्षा बनाए रखने और भीड़ से बचने के लिए अधिकारी शुरू में हर दिन सिर्फ सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;साथ ही संघर्ष के दौरान रणनीतिक शिपिंग रूट में समुद्री बारूदी सुरंगों और दूसरे समुद्री खतरों को लेकर डर पैदा हो गया था. यही वजह है कि जहाजों को अभी रूट की पूरी चौड़ाई का इस्तेमाल करने के बजाय सुरक्षित कॉरिडोर से निकाला जा रहा है. &amp;nbsp;पूरे रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बताने से पहले समुद्री सुरक्षा एजेंसियां जांच और निगरानी कर रही हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;क्या है पाकिस्तान का पीरियड्स टैक्स, जिसे जनता से वसूलती थी सरकार?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/what-is-pakistan-s-period-tax-know-about-the-controversial-tax-abolished-by-government-3147270&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या है पाकिस्तान का पीरियड्स टैक्स, जिसे जनता से वसूलती थी सरकार?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/4f30720048b62a2556dd05877b44a38517818539027011307_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Literate States In India: उत्तराखंड ने हासिल किया 100% साक्षरता का लक्ष्य, जानें और कौन से सूबे इस कतार में शामिल]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/uttarakhand-achieves-100-percent-literacy-milestone-know-which-other-indian-states-have-reached-full-literacy-status-education-development-3147551</link><comments>https://www.abplive.com/gk/uttarakhand-achieves-100-percent-literacy-milestone-know-which-other-indian-states-have-reached-full-literacy-status-education-development-3147551#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:27:54 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/uttarakhand-achieves-100-percent-literacy-milestone-know-which-other-indian-states-have-reached-full-literacy-status-education-development-3147551</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Literate States In India:&lt;/strong&gt; शिक्षा के मोर्चे पर देश के अंदर एक बड़ा और सुखद बदलाव देखने को मिला है. पहाड़ों की गोद में बसे देवभूमि उत्तराखंड ने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जो कि देश के बड़े राज्यों के लिए एक मिसाल है. राज्य ने अपनी साक्षरता दर में सुधार करते हुए, खुद को देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की फेहरिस्त में शामिल करा लिया है. उत्तराखंड सरकार के एलान के बाद अब देशभर में उन राज्यों की चर्चा तेज हो गई है, जो कि पहले से ही इस लिस्ट में शामिल हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;देवभूमि का शिक्षा में एतिहासिक रिकॉर्ड&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उत्तराखंड ने बीते दो साल में साक्षरता के मैदान में जो कमाल किया है, उसकी कल्पना तो किसी ने नहीं की थी. राज्य ने अपनी साक्षरता दर में करीह 14.9 प्रतिशत की एक बहुत बड़ी उछाल दर्ज की है. आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर सिर्फ 83.8 फीसदी के आसपास थी. लेकिन राज्य सरकारी की लगातार कोशिशों के बाद साल 2025 में यह आंकड़ तेजी से बढ़कर 98.7 प्रतिशत के पार पहुंच गया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे पहले किन राज्यों ने किया कमाल?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उत्तराखंड इस मुकाम तक पहुंचने वाला अकेला राज्य नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कुछ राज्यों ने यह गौरव हासिल किया है. भारत में सबसे पहले मिजोरम ने अपनी 98. 2 प्रतिशत की साक्षरता दर के साथ देश के पहले पूर्ण साक्षर राज्य होने का तमगा हासिल किया था. मिजोरम के ठीक बाद तटीय राज्य गोवा ने भी इस कतार में अपनी जगह पक्की कर ली थी. गोवा ने दो देश में लगभग 100 फीसदी साक्षरता का जादुई आंकड़ा छूकर देश के सामने शिक्षा का बेहतरीन मॉडल पेश किया था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;Body Donation: देहदान में मिले शरीरों का क्या करते हैं डॉक्टर्स? सेजल पवार के वायरल वीडियो के बीच जानें सच&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/what-doctors-do-with-donated-bodies-and-why-body-donation-is-important-in-medical-education-3146747&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;Body Donation: देहदान में मिले शरीरों का क्या करते हैं डॉक्टर्स? सेजल पवार के वायरल वीडियो के बीच जानें सच&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;त्रिपुरा और हिमाचल भी लिस्ट में&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;साक्षरता की इस लिस्ट में पूर्वोत्तर का राज्य त्रिपुरा भी काभी आगे रहा है. त्रिपुरा ने 95.6 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ देश के तीसरे पूर्ण साक्षर राज्य के रूप में खुद को स्थापित किया था. इसके बाद पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा बजट और व्यवस्थाओं में भारी सुधार किया जिसके नतीजे में वहां की साक्षरता दर 99.3 प्रतिशत तक पहुंच गई और वह चौथा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शिक्षा में सिक्किम की भी बादशाहत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस पूरी लिस्ट में सिक्किम का नाम भी टॉप लिस्ट में शामिल है, क्योंकि उसने 99.82 प्रतिशत की साक्षरता दर हासिल करके देश के पांचवें पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा पाया था. अब इसी कड़े मुकाबले और गौरवशाली सूची में छठे राज्य के रूप में उत्तराखंड की धमाकेदार एंट्री हो गई है. लिस्ट में उत्तराखंड के भी शामिल हो जाने से देश में अब कुल छह राज्य ऐसे हो गए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मानकों को पार करते हुए शत प्रतिशत साक्षरता लक्ष्य को पूरी तरह से हासिल कर लिया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;पाकिस्तान में सबसे बड़ा करेंसी नोट कौन सा है, इसे छापने में कितना होता है खर्च?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/which-is-the-largest-currency-note-in-pakistan-how-much-does-it-cost-to-print-3147503&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;पाकिस्तान में सबसे बड़ा करेंसी नोट कौन सा है, इसे छापने में कितना होता है खर्च?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/b6b2ba4276e5d19595228c50c993e7a517818522224251014_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Y+ Security Cover: शिवसेना के बागी सांसदों को मिली Y+ सिक्योरिटी, कौन उठाएगा इसका खर्चा?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/maharashtra-politics-rebel-shiv-sena-mps-granted-y-security-know-who-will-bear-the-cost-3147512</link><comments>https://www.abplive.com/gk/maharashtra-politics-rebel-shiv-sena-mps-granted-y-security-know-who-will-bear-the-cost-3147512#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:37:40 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/maharashtra-politics-rebel-shiv-sena-mps-granted-y-security-know-who-will-bear-the-cost-3147512</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Y+ Security Cover:&lt;/strong&gt; शिव सेना (UBT) में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच महाराष्ट्र सरकार ने 6 बागी लोकसभा सांसदों को Y+ सुरक्षा देने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब उनके राजनीतिक भविष्य और एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र के गृह विभाग ने राज्य पुलिस को इन सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का निर्देश दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस सुरक्षा का खर्च कौन उठाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कौन उठाएगा इस सुरक्षा का खर्च?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Y+ सुरक्षा का पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाया जाएगा. भारत के सुरक्षा प्रोटोकॉल सिस्टम के तहत जब खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे के आकलन के हिसाब से आधिकारिक तौर पर सुरक्षा दी जाती है तो इसका पूरा खर्च सरकार ही उठाती है. इसमें तैनात कर्मियों की सैलरी, गाड़ी का खर्च, पेट्रोल-डीजल का खर्च, कम्युनिकेशन के उपकरण, रहने की पूरी व्यवस्था और दूसरी लॉजिस्टिक्स जरूरतों को शामिल किया जाता है. इस वजह से इसका पूरा वित्तीय बोझ गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के जरिए राज्य के खजाने पर पड़ता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Y+ सुरक्षा क्यों दी गई?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिपोर्ट्स के मुताबिक खुफिया एजेंसियों द्वारा इन छह सांसदों को होने वाले खतरे के स्तर का आकलन करने के बाद सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की गई थी. दरअसल यह राजनीतिक तनाव तब बढ़ा जब इन सांसदों ने कथित तौर पर शिवसेना (UBT) &amp;nbsp;की संसदीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया. इस वजह से यह अटकलें लगाई जाने लगी कि वे &lt;a title=&quot;एकनाथ शिंदे&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/eknath-shinde&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;एकनाथ शिंदे&lt;/a&gt; के गुट में शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट्स में सांसदों, उनके घर और गाड़ियों कोई नुकसान पहुंचाने और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन या धमकियों की संभावना का संकेत दिया गया था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;व्हिप के बावजूद बैठक से गायब रहे शिवसेना UBT के 6 सांसद, जानें इसे न मानने पर क्या होता है?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/shiv-sena-ubt-crisis-six-shiv-sena-ubt-mps-skip-meeting-despite-whip-know-what-happens-if-a-party-whip-is-defied-3147029&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;व्हिप के बावजूद बैठक से गायब रहे शिवसेना UBT के 6 सांसद, जानें इसे न मानने पर क्या होता है?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Y+ सिक्योरिटी का क्या मतलब है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह सुरक्षा भारत की मान्यता प्राप्त सुरक्षा श्रेणियों में से एक है और यह माध्यम से उच्च स्तर के खतरे का सामना कर रहे लोगों को काफी सुरक्षा देती है. इस व्यवस्था के तहत आमतौर पर लगभग 11 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं. इसी के साथ सुरक्षा टीम में एक या फिर दो हथियारबंद कमांडो भी शामिल हो सकते हैं. साथ ही बाकी कर्मी राज्य पुलिस या फिर दूसरे सुरक्षा बलों से लिए जाते हैं. इसी के साथ घर पर और यात्रा के दौरान 24 घंटे सुरक्षा दी जाती है. सुरक्षा टीम हर गतिविधि पर नजर रखती है और स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बिठाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुरक्षा कवर कैसे तय किया जाता है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सुरक्षा सिर्फ राजनीतिक आधार पर नहीं दी जाती. इसकी श्रेणी को तय करने में इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट जैसी एजेंसियों की बड़ी भूमिका होती है. ये एजेंसी खतरे के आकलन की एक रिपोर्ट तैयार करती हैं. ये एजेंसी इस बात का आकलन करती हैं कि क्या किसी व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधियों, सार्वजनिक पहचान, कानूनी विवाद या फिर दूसरी वजह से कोई खतरा है. अगर खतरा असली और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ माना जाता है तो आमतौर पर सरकार के खर्चे पर सुरक्षा दी जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;क्या ब्लैक होल की&amp;zwnj; तरह कोई व्हाइट होल भी&amp;zwnj; होता है, जानें क्या है दोनों में अंतर?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/is-there-a-white-hole-just-like-a-black-hole-understanding-the-difference-between-the-two-3147328&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या ब्लैक होल की&amp;zwnj; तरह कोई व्हाइट होल भी&amp;zwnj; होता है, जानें क्या है दोनों में अंतर?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/6f9ac41b2847a08d80ee15f913f6fb2417818490789921307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[पाकिस्तान में सबसे बड़ा करेंसी नोट कौन सा है, इसे छापने में कितना होता है खर्च?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/which-is-the-largest-currency-note-in-pakistan-how-much-does-it-cost-to-print-3147503</link><comments>https://www.abplive.com/gk/which-is-the-largest-currency-note-in-pakistan-how-much-does-it-cost-to-print-3147503#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:25:51 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/which-is-the-largest-currency-note-in-pakistan-how-much-does-it-cost-to-print-3147503</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब कभी भी भारत और पाकिस्तान के बीच तुलना होती है, तो लोगों की दिलचस्पी वहां रहने वाले लोगों के रहन-सहन, खान-पान, क्रिकेट और वहां की अर्शव्यस्था और पैसे तक पहुंच जाती है. हर देश का अपना आर्थिक खर्चा होता है और उसी के हिसाब से वहां की करेंसी छापी जाती है. जैसे भारत का सबसे बड़ा नोच 500 रुपये का है, वैसे ही पाकिस्तान में भी सबसे बड़ा नोट चलता है. आइए जानें कि उसे छापने के लिए सरकार कितने पैसे खर्चा करती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तान का सबसे बड़ा नोट और उसकी खासियत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पाकिस्तान की करेंसी को पाकिस्तानी रुपया कहा जाता है. वहां के बाजार में लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे बड़ा नोट 5000 रुपये का है. इस सबसे बड़े नोट को पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक यानि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा पहली बार 27 मई 2006 को जारी किया गया था. इस नोट का मेन उद्देश्य देश के अंदर बड़े और मेन लेन-देन को आसान बनाना था. यह नोट भूरा और हल्का पीले रंग का होता है. इस नोट के सामने वाले हिस्से पर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की शेरवानी पहने हुए तस्वीर छपी है, जबकि इसके पिछले हिस्से पर इस्लामाबाद की मशहूर शाह फैसल मस्जिद का चित्र बना हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक नोट को छापने के लिए कितना होता है खर्चा?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किसी भी देश का नोट दिखने में भले ही कीमती हो, लेकिन कागज के उस टुकड़े को प्रिंट करने की एक तय लागत होती है. वैसे तो दुनिया का कोई भी केंद्रीय बैंक अपने नोटों की छपाई का सटीक आधिकारिक डेटा आसानी से सारावजनिक नहीं करता है, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान के 5000 रुपये के नोट को छापने के लिए करीब 15 से 20 पाकिस्तानी रुपये के बीच आती है. इस लागत में विशेष सुरक्षा धागे, वॉटरमार्क, खास तरह की स्याही और हाई-क्वालिटी पेपर का खर्चा शामिल होता है, ताकि बाजार में इसके जाली नोट न बन सकें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;China Pakistan Friendship: कितने पुराने दोस्त हैं चीन और पाकिस्तान, इनसे भिड़ने में क्यों खौफ खाता है अमेरिका?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/how-old-is-china-and-pakistan-friendship-and-why-is-us-fears-china-pakistan-alliance-3147350&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;China Pakistan Friendship: कितने पुराने दोस्त हैं चीन और पाकिस्तान, इनसे भिड़ने में क्यों खौफ खाता है अमेरिका?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत और पाकिस्तान के नोटों का अंतर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब हम भारत और पाकिस्तान के नोटों की बात करते हैं तो कई बड़े और साफ अंतर नजर आते हैं. पहला बड़ा अंतर तो दोनों देशों की करेंसी के मूल्यों का होता है. भारत में जहां 500 रुपये का नोट सबसे बड़ा है, तो वहीं पाकिस्तान में 5000 का नोट सबसे बड़ा होता है. इसके अलावा भारत के नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी होती है, तो वहीं पाकिस्तान के नोटों पर मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो बनी रहती है. भारतीय नोटों की तरह पाकिस्तानी नोटों पर भी जालसाजी रोकने के लिए ऑप्टिकल वेरिएबल इंक और कई गुप्त सुरक्षा फीचर्स का इस्तेमाल होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तान में कौन कौन से नोट चलते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पाकिस्तान के बाजार में नोटों की एक लंबी सीरीज चल रही है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वहां छोटे से लेकर बड़े हर तरह के नोट मौजूद हैं. वहां पर इस समय 10, 20, 50, 100, 500, 1000 और 5000 रुपये क नोट पूरी तरह से चलन में हैं. इसके अलावा समय-समय पर विशेष मौकों के लिए 75 रुपये का स्मारक नोट भी निकाला गया था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;ऊंची-ऊंची छतों वाले पुराने घर हमेशा ठंडे क्यों रहते थे? हैरान कर देगा इसके पीछे का साइंस&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/old-houses-with-high-ceilings-stayed-cool-without-any-air-conditioner-know-the-science-behind-traditional-home-design-heat-management-3147291&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;ऊंची-ऊंची छतों वाले पुराने घर हमेशा ठंडे क्यों रहते थे? हैरान कर देगा इसके पीछे का साइंस&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/5c9ecec5fc87016acf256510096f5c4117818485113221014_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[White Hole: क्या ब्लैक होल की‌ तरह कोई व्हाइट होल भी‌ होता है, जानें क्या है दोनों में अंतर?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/is-there-a-white-hole-just-like-a-black-hole-understanding-the-difference-between-the-two-3147328</link><comments>https://www.abplive.com/gk/is-there-a-white-hole-just-like-a-black-hole-understanding-the-difference-between-the-two-3147328#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:26:24 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/is-there-a-white-hole-just-like-a-black-hole-understanding-the-difference-between-the-two-3147328</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;White Hole:&lt;/strong&gt; ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमयी वस्तुओं में एक है. यह अपने काफी ज्यादा गुरुत्वाकर्षण से प्रकाश को भी फंसाने में सक्षम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिजिक्स व्हाइट होल नाम की किसी चीज के अस्तित्व की भी भविष्यवाणी करती है? ब्लैक होल वैज्ञानिकों द्वारा देखें गए हैं लेकिन व्हाइट होल पूरी तरह से सैद्धांतिक है. वे अल्बर्ट आइंस्टीन के जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के गणितीय समाधानों से उभरे हैं और अक्सर उन्हें ब्लैक होल के उलट बताया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्हाइट होल क्या है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;व्हाइट होल एक काल्पनिक ब्रह्मांडीय वस्तु है जो ब्लैक होल के बिल्कुल विपरीत व्यवहार करती है. जबकि एक ब्लैक होल मैटर, ऊर्जा पर प्रकाश को खींचता है ऐसा माना जाता है कि व्हाइट होल लगातार मैटर और ऊर्जा को बाहर की तरफ फेंकता है. &amp;nbsp;फिजिक्स के मुताबिक कोई भी चीज बाहर से व्हाइट हॉल में प्रवेश नहीं कर सकती. इस वजह से यह एक तरफा प्रवेश के बजाय एक तरफा निकास बन जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है दोनों के बीच अंतर&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे बुनियादी अंतर यह है कि वे अपने परिवेश के साथ कैसे बातचीत करते हैं. &amp;nbsp;एक ब्लैक होल एक ब्रह्मांडीय वैक्यूम क्लीनर की तरह काम करता है जो हर चीज को अंदर खींचता है. वहीं दूसरी तरफ व्हाइट होल लगातार मैटर, रेडिएशन और एनर्जी को अंतरिक्ष में धकेलता रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के जरिए से ब्लैक होल का पता लगाया है और यहां तक कि उनकी तस्वीर भी खींची है. लेकिन अभी तक कोई भी व्हाइट होल नहीं देखा गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वर्महोल सिद्धांत&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मॉडर्न फिजिक्स में सबसे आकर्षक विचारों में से एक यह संभावना है कि ब्लैक होल और व्हाइट होल को जोड़ा जा सकता है. कुछ थियोरेटिकल मॉडल के मुताबिक ब्लैक होल में प्रवेश करने वाला मैटर अंतरिक्ष समय में एक शॉर्टकट के जरिए से यात्रा कर सकता है जिसे वर्महोल के रूप में जाना जाता है और ब्रह्मांड में कहीं और एक व्हाइट होल से निकल सकता है. हालांकि ऐसे वर्महोल के भी फिलहाल कोई सबूत नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या बिग बैंग से एक व्हाइट होल बन सकता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कुछ शोधकर्ताओं ने इससे भी ज्यादा बड़ी संभावनाओं को पेश किया है. ऐसा कहा जाता है कि बिग बैंग के दौरान ब्रह्मांड का जन्म एक बड़े व्हाइट होल के व्यवहार जैसा हो सकता है. इस घटना में भारी मात्रा में मैटर और ऊर्जा अचानक बाहर की तरफ फूट पड़ी जिस वजह से विस्तारित ब्रह्मांड का निर्माण हुआ जिसे आज हम देख रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; &lt;a title=&quot;कितने दिन तक भूखा रह सकता है इंसान, कब जानलेवा हो जाती है भूखमरी?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/for-how-long-can-a-person-survive-without-food-when-does-starvation-become-fatal-3147292&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;कितने दिन तक भूखा रह सकता है इंसान, कब जानलेवा हो जाती है भूखमरी?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/f2f2ab65900d5b8e51a69bf70747f06817817958729261307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[ऊंची-ऊंची छतों वाले पुराने घर हमेशा ठंडे क्यों रहते थे? हैरान कर देगा इसके पीछे का साइंस]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/old-houses-with-high-ceilings-stayed-cool-without-any-air-conditioner-know-the-science-behind-traditional-home-design-heat-management-3147291</link><comments>https://www.abplive.com/gk/old-houses-with-high-ceilings-stayed-cool-without-any-air-conditioner-know-the-science-behind-traditional-home-design-heat-management-3147291#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:19:28 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/old-houses-with-high-ceilings-stayed-cool-without-any-air-conditioner-know-the-science-behind-traditional-home-design-heat-management-3147291</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गर्मियों के दिनों में जैसे ही सूरज का पारा चढ़ता है, आज के आधुनिक दौर की कंक्रीट वाली छतें भट्टी की तरह तपने लगती हैं. एसी-कूलर चलाने के बाद भी कई घरों की उमस और गर्मी कम होने का नाम नहीं लेती है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि पुराने जमाने के गांव के घर, राजा-महाराजाओं की हवेलियां बिना किसी बिजली या एसी के एकदम ठंडी रहती थीं. इसके पीछे कोई जादू नहीं बल्कि विज्ञान का नियम काम करता था, जिसे आज के आर्किटेक्ट्स भी सलाम करते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गर्म हवा का सिद्धांत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुरानें घरों की छतों को 15 से 20 फीट ऊंचा बनाने के पीछे थर्माडायनामिक्स यानि कि गर्मी का सीधा नियम काम करता था. विज्ञान का कहना है कि जब गर्म हवा हल्की होती है तो वह ऊपर की तरफ उठती है और ठंडी हवा हमेशा भारी होने की वजह से नीचे जमीन की सतह पर बनी रहती है. पुराने जमाने में जब कमरे के अंदर गर्मी बढ़ती थी, तब गर्म हवा तुरंत ऊपर छत की तरफ चली जाती थी. इससे फर्श के आसपास का हिस्सा, जहां पर लोग बैठते या सोते थे, हमेशा प्राकृतिक रूप से ठंडा और सुहावना बना रहता था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;रोशनदानों का वेंटिलेशन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऊपर उठी हुई गर्म हवा को कमरे से बाहर निकालने के लिए पुराने कारीगर बेहतरीन कूटनीति अपनाते थे. वे ऊंची छतों के ठीक नीचे दीवारों पर छोटे-छोटे रोशनदान बनाते थे, जब नीचे की गर्म हवा ऊपर उठकर छत के पास जमा होती थी तो वह इन रोशनदानों के जरिए बाहर निकल जाती थी. फिर इस खाली जगह को भरने के लिए खिड़कियों से ठंडी हवा अंदर आ जाती थी. हवा के इस लगातार घूमने की प्रक्रिया को क्रॉस वेंटिलेशन कहा जाता था, यह कमरे में उमस नहीं होने देता था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;जितनी ज्यादा गर्मी उतनी ज्यादा बारिश, जानिए क्यों होता है ऐसा- कैसे काम करता है ये सिस्टम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/the-more-heat-the-more-rain-know-the-science-behind-this-and-reason-of-why-this-happens-3147247&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;जितनी ज्यादा गर्मी उतनी ज्यादा बारिश, जानिए क्यों होता है ऐसा- कैसे काम करता है ये सिस्टम&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्राकृतिक रोशनी का इंतजाम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुराने जमाने में तो बिजली नहीं थी, जब बिजली आई तो भी आज की तरह से 24 घंटे लाइट की सुविधा मौजूद नहीं थी. लोग दिन के वक्त सूरज की रोशनी पर निर्भर थे. ऐसे में छतों की ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से दीवारों पर बड़े आकार के दरवाजे और ऊंची-ऊंची खिड़कियां बनाने की खूब जगह होती थी. इन्हीं खिड़कियों की वजह से दिन के उजाले में घर के हर कोने में प्रकृतिक रोशनी आसानी से पहुंच जाती थी. इससे दिन में कभी भी घर के अंदर सीलन या अंधेरा नहीं होता था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उमस और सफोकेशन से आजादी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आजकल के आठ से नौ फीट की छत वाले फ्लैट्स में हवा रुकने की वजह से सफोकेशन यानि घुटन होने लगती है. लेकिन पुराने घरों में ऐसा नहीं होता था. छतों के ऊंचे कमरे होने की वजह से कमरों के अंदर भारी मात्रा में हवा मौजूद रहती थी. इससे कमरे के अंदर रहने वाले लोगों को कभी भी ऑक्सीजन की कमी या घुटन का अहसास नहीं होता है. दीवारों की मोटाई और ऊंची छतों का यह अनोखा तालमेल घर के अंदर के वातावरण को ताजा रखता था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;Earth Formation: कैसे बनी थी दुनिया? बिग बैंग के बाद सबसे पहले कहां अस्तित्व में आई थी आबादी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/how-was-the-world-created-know-where-did-life-first-appear-after-the-big-bang-3147288&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;Earth Formation: कैसे बनी थी दुनिया? बिग बैंग के बाद सबसे पहले कहां अस्तित्व में आई थी आबादी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/dfefc9fde7a12146fa6bc328fba9862917817909047411014_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[China Pakistan Friendship: कितने पुराने दोस्त हैं चीन और पाकिस्तान, इनसे भिड़ने में क्यों खौफ खाता है अमेरिका?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/how-old-is-china-and-pakistan-friendship-and-why-is-us-fears-china-pakistan-alliance-3147350</link><comments>https://www.abplive.com/gk/how-old-is-china-and-pakistan-friendship-and-why-is-us-fears-china-pakistan-alliance-3147350#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:31:07 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/how-old-is-china-and-pakistan-friendship-and-why-is-us-fears-china-pakistan-alliance-3147350</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;China Pakistan Friendship : &lt;/strong&gt;चीन और पाकिस्तान अक्सर एक-दूसरे को आयरन ब्रदर कहते हैं. आज चीन और पाकिस्तान आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर इतने करीब हैं कि दुनिया के बड़े देश भी इस साझेदारी को गंभीरता से देखते हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने लगभग 1.22 अरब डॉलर के नए व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए. साथ ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के अगले चरण को तेज करने पर भी सहमति बनी. ऐसे में कई लोग इनकी दोस्ती के बारे में काफी चीजें सर्च करते हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि चीन और पाकिस्तान कितने पुराने दोस्त हैं और इनसे भिड़ने में क्यों अमेरिका खौफ खाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चीन और पाकिस्तान कितने पुराने दोस्त हैं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चीन और पाकिस्तान की दोस्ती करीब 76 साल पुरानी है. 1 अक्टूबर 1949 को माओ जेदोंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की घोषणा की. उस समय दुनिया शीत युद्ध के दौर में थी और ज्यादातर पश्चिमी देश नई कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता देने से बच रहे थे. ऐसे समय में पाकिस्तान ने 6 जनवरी 1950 को चीन को मान्यता दे दी. पाकिस्तान ऐसा करने वाला पहला मुस्लिम देश और शुरुआती गैर-कम्युनिस्ट देशों में शामिल था. उस समय यह फैसला केवल वैचारिक नहीं था. पाकिस्तान को अपने पड़ोस में एक मजबूत सहयोगी की जरूरत थी और चीन को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन की जरूरत थी. यहीं से दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव पड़ी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत के साथ तनाव ने दोनों देशों को और करीब लाया&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;शुरुआती सालों में भारत और चीन के भी अच्छे संबंध थे. हिंदी-चीनी भाई-भाई &amp;nbsp;का नारा भी इसी दौर में दिया गया था, लेकिन बाद में सीमा विवादों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा. दूसरी ओर पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर को लेकर पहले से विवाद चल रहा था. पाकिस्तान को लगा कि चीन उसके लिए एक जरूरी रणनीतिक साझेदार बन सकता है. विश्लेषकों के अनुसार भारत के साथ साझा प्रतिद्वंद्विता ही वह सबसे बड़ा कारण था जिसने चीन और पाकिस्तान को लगातार करीब रखा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;1962 का युद्ध बना रिश्तों का बड़ा मोड़&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1962 में भारत और चीन के बीच सीमा युद्ध हुआ. इस संघर्ष में पाकिस्तान ने खुलकर चीन का समर्थन किया और भारत की आलोचना की. युद्ध के कुछ ही महीनों बाद 1963 में चीन और पाकिस्तान ने एक जरूरी सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसी समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंप दिया. यह इलाका काराकोरम पर्वतमाला में स्थित है और भारत इसे जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है. उस समय पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई थी. इसी साल चीन ने पाकिस्तान को 5 करोड़ डॉलर की ब्याज-मुक्त आर्थिक सहायता भी दी. इस समझौते ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/for-how-long-can-a-person-survive-without-food-when-does-starvation-become-fatal-3147292&quot;&gt;Food Starvation Effects: कितने दिन तक भूखा रह सकता है इंसान, कब जानलेवा हो जाती है भुखमरी?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;परमाणु कार्यक्रम में भी चीन ने दिया साथ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1974 में भारत &amp;nbsp;परमाणु परीक्षण किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु क्षमता हासिल करने का निर्णय लिया. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार 1970 और 1980 के दशक में चीन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में जरूरी सहायता दी. रिपोर्टों में दावा किया गया कि चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी जानकारी, मिसाइल तकनीक, हथियारों के डिजाइन और संवर्धित यूरेनियम उपलब्ध कराया, हालांकि चीन और पाकिस्तान दोनों आधिकारिक रूप से ऐसे दावों को स्वीकार नहीं करते हैं. इसके बाद ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के विकास में चीन की जरूरी भूमिका रही, 1998 में जब पाकिस्तान ने चागई में परमाणु परीक्षण किए, तब भी चीन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का समर्थन किया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चीन और पाकिस्तान का जरूरी प्रतीक क्या है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चीन और पाकिस्तान के रिश्तों का एक जरूरी प्रतीक कराकोरम हाईवे है. इस सड़क का निर्माण 1960 के दशक में शुरू हुआ और इसे पूरा होने में लगभग दो दशक लगे. लगभग 1,300 किलोमीटर लंबा यह मार्ग चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान से जोड़ता है. निर्माण के दौरान 810 पाकिस्तानी मजदूर और लगभग 200 चीनी इंजीनियरों की मौत हुई. गिलगित में आज भी चीनी इंजीनियरों की स्मृति में एक कब्रिस्तान मौजूद है. इस परियोजना ने दोनों देशों को सड़क मार्ग से जोड़ दिया और बड़े आर्थिक सहयोग की नींव रखी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चीन और पाकिस्तान की दोस्ती कैसे हुई मजबूत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;CPEC &amp;nbsp;ने चीन और पाकिस्तान की दोस्ती को नई मजबूती दी. &amp;nbsp;इसकी शुरुआत 2013 में हुई और 2015 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा के बाद इसमें तेजी आई. करीब 3,000 किलोमीटर लंबी यह परियोजना चीन के काशगर शहर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ती है, जिसमें सड़कें, रेलवे, बिजली परियोजनाएं, विशेष आर्थिक क्षेत्र और बंदरगाह का विकास शामिल है. पाकिस्तान ने इसे अपनी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव लाने वाली योजना बताया था, लेकिन इसे कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. चीन आज पाकिस्तान का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बन चुका है और पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत हथियार चीन से आते हैं. दोनों देशों ने मिलकर JF-17 थंडर लड़ाकू विमान समेत कई सैन्य उपकरण विकसित किए हैं. &amp;nbsp;आर्थिक रूप से भी पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता बढ़ी है. चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता है और उसके पास पाकिस्तान के लगभग 29 अरब डॉलर के लोन हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें - &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/how-was-the-world-created-know-where-did-life-first-appear-after-the-big-bang-3147288&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/how-was-the-world-created-know-where-did-life-first-appear-after-the-big-bang-3147288&quot;&gt;Earth Formation: कैसे बनी थी दुनिया? बिग बैंग के बाद सबसे पहले कहां अस्तित्व में आई थी आबादी&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/c610777be1b23d192cf08124c51cc79117817999471441120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Mumbai Fire Safety: मुंबई में गगनचुंबी इमारतें, जानिए वहां आग लगने पर कैसे पहुंचाई जाती है मदद?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/mumbai-bandra-west-building-fire-know-how-to-get-help-and-rescue-work-during-fire-in-skyscrapers-high-rise-buildings-in-mumbai-3147253</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/mumbai-bandra-west-building-fire-know-how-to-get-help-and-rescue-work-during-fire-in-skyscrapers-high-rise-buildings-in-mumbai-3147253#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:26:43 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/mumbai-bandra-west-building-fire-know-how-to-get-help-and-rescue-work-during-fire-in-skyscrapers-high-rise-buildings-in-mumbai-3147253</guid><description><![CDATA[Mumbai Fire Safety: मुंबई में गगनचुंबी इमारतें, जानिए वहां आग लगने पर कैसे पहुंचाई जाती है मदद?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/999d4b1268b3ebf38ef0fd7f7ac6457b17817849595081120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[21 जून को क्यों थम जाता है सूरज? जानिए सबसे लंबे दिन और गायब होती परछाई के पीछे का सच]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/why-longest-day-of-earth-is-21-june-and-why-shadows-seem-to-vanish-understanding-summer-solstice-earths-axis-rotation-3147337</link><comments>https://www.abplive.com/gk/why-longest-day-of-earth-is-21-june-and-why-shadows-seem-to-vanish-understanding-summer-solstice-earths-axis-rotation-3147337#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:02:29 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/why-longest-day-of-earth-is-21-june-and-why-shadows-seem-to-vanish-understanding-summer-solstice-earths-axis-rotation-3147337</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए 21 जून का दिन बेहद खास होने वाला है. इस &lt;a title=&quot;साल 2026&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/new-year-2026&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;साल 2026&lt;/a&gt; में 21 जून यानि रविवार को साल का सबसे लंबा दिन पड़ने वाला है, जब सूर्य की रोशनी धरती पर रिकॉर्डतोड़ समय के लिए रहेगी. भारत में इस दिन धूप करीब 13 घंटे 58 मिनट के लिए रहेगी, यानि करीब 14 घंटे तक रोशनी ही रहेगी. इस दिलचस्प घटना के पीछे दोपहर में एक वक्त ऐसा भी आता है, जब आपकी परछाई भी आपका साथ छोड़ देती है, चलिए जानें कि ऐसा क्यों होता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;धरती का झुकाव का खेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;साल के इस सबसे बड़े दिन के पीछे ब्रह्मांड का सीधा और दिलचस्प नियम काम करता है. इस दिन धरती अंतरिक्ष में सूरज के चक्कर तो काटती है, लेकिन वह बिल्कुल सीधी होने की बजाय अपनी धुरी पर साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. धरती के इसी झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के तालमेल के कारण ही धरती पर अलग-अलग &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; बदलते हैं. इसीलिए सालभर में दिन और रात की अवधियों में लंबा फर्क देखने को मिलता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कर्क रेखा पर सीधी पड़ती है धूप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नासा के खगोल वैज्ञानिकों की मानें तो 21 जून को धरकी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ सबसे ज्यादा झुकाव होता है. इस खास स्थिति की वजह से ही सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित कर्क रेखा पर बिल्कुल सीधी 90 डिग्री के कोण पर पड़ती हैं. चूंकि भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई बड़े देश इसी उत्तरी गोलार्ध का हिस्सा हैं, इसीलिए इन सभी क्षेत्रों के इस दिन साल में सबसे ज्यादा समय के लिए सूरज की तेज रोशनी मिलती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;क्या सूर्य ग्रहण देखने से सच में बौने पैदा होते हैं बच्चे? जान लीजिए सच्चाई&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/solar-eclipse-and-pregnancy-myths-can-surya-grahan-affect-baby-height-growth-and-development-what-science-says-about-eclipse-beliefs-in-india-3147251&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या सूर्य ग्रहण देखने से सच में बौने पैदा होते हैं बच्चे? जान लीजिए सच्चाई&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे लंबी धूप और सबसे छोटी रात&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कर्क रेखा पर सूर्य एकदम सीधे होने की वजह से वह आसमान में बहुत ऊंचाई पर दिखाई देता है. यही कारण है कि सूर्य को पूर्व से उदय होकर पश्चिम में अस्त होने तक अपना सफर तय करने में सामान्य दिनों से ज्यादा वक्त लगता है. भारत में 21 जून को दिन की लंबाई करीब 14 घंटे के आसपास पहुंच जाती है. जबकि इसके उलट रात का वक्त सिर्फ 10 से 11 घंटे का ही रह जाता है. इसे साल की सबसे छोटी रात भी कहते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या सच में गायब हो जाती है परछाईं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस दिन की सबसे अनोखी बात यह है कि जब दोपहर के वक्त सूर्य की किरणें सीधे हमारे सिर के ऊपर पहुंचती हैं, तब जमीन पर नजर आने वाली परछाईं बिल्कुल गायब हो जाती है. विज्ञान की भाषा में इसे अद्भुत खगोलीय पल को जीरो शैडो डे कहा जाता है. जब सूर्य ठीक 90 डिग्री के कोण पर सिर के ऊपर होता है, तो रोशनी के सीधे पड़ने के कारण परछाईं पैरों के नीचे छिप जाती है. हालांकि यह जादुई नजारा सिर्फ कुछ देर के लिए होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;सिंगल माल्ट, प्योर माल्ट या ब्लेंडेड व्हिस्की, दारू की बोतल पर लिखे इन तीन शब्दों का क्या है मतलब?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/what-is-difference-between-single-malt-pure-malt-and-blended-whisky-know-about-flavor-profiles-production-methods-3147273&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;सिंगल माल्ट, प्योर माल्ट या ब्लेंडेड व्हिस्की, दारू की बोतल पर लिखे इन तीन शब्दों का क्या है मतलब?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/4888c063722b6752ac275fee04fd33a417817977869951014_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>