<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/gk/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Wed, 23 Sep 2026 08:00:14 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[जब गूगल नहीं था तब बड़े ऑफिसों में कैसे चलता था काम, क्या था तरीका?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/how-offices-worked-before-google-and-internet-3192375</link><comments>https://www.abplive.com/gk/how-offices-worked-before-google-and-internet-3192375#respond</comments><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 06:48:59 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/how-offices-worked-before-google-and-internet-3192375</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;आज ऑफिस में किसी जानकारी की जरूरत हो तो कुछ सेकंड में Google पर सर्च करके जवाब मिल जाता है. किसी को मैसेज करना हो तो ईमेल या चैट कर सकते हैं और कोई जरूरी फाइल चाहिए तो कंप्यूटर में ही मिल जाती है. लेकिन जब इंटरनेट, Google, ईमेल और हर कर्मचारी की टेबल पर कंप्यूटर नहीं हुआ करते थे, तब बड़े ऑफिसों में काम करना बिल्कुल अलग था. उस समय जानकारी और जरूरी दस्तावेजों के लिए लोगों को कागज, फाइलों, टेलीफोन और दूसरी ऑफिस मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता था. यानी जो काम आज कुछ मिनटों में हो जाता है, उसे पूरा करने में पहले काफी ज्यादा समय और लोगों की जरूरत पड़ सकती थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;जानकारी चाहिए तो किताबों और रिकॉर्ड का सहारा&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;जब Google नहीं था, तब किसी जानकारी को खोजने के लिए लोग किताबों, पुराने रिकॉर्ड, डायरेक्टरी और ऑफिस में रखी फाइलों का सहारा लेते थे. बड़ी कंपनियों में अलग-अलग तरह के दस्तावेजों को व्यवस्थित करके रखा जाता था, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें खोजा जा सके. किसी पुराने ग्राहक या कारोबार से जुड़ी जानकारी चाहिए तो कर्मचारी रिकॉर्ड रूम या फाइल कैबिनेट तक जाते थे. कई जगह कार्ड इंडेक्स और अलग-अलग फाइल सिस्टम का इस्तेमाल भी होता था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;चिट्ठी, मेमो और टेलीफोन से होती थी बातचीत&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;आज ऑफिस में एक ईमेल या मैसेज भेजना सबसे आसान काम है, लेकिन पहले कर्मचारियों के बीच बातचीत के लिए आमने-सामने मीटिंग, लिखित मेमो, चिट्ठी और टेलीफोन का इस्तेमाल होता था. जरूरी बातों को लिखकर दूसरे विभाग तक भेजा जाता था और बाहर की कंपनियों या ग्राहकों से संपर्क के लिए टेलीफोन काफी अहम था. टेलीफोन आने के बाद कारोबार में बातचीत पहले के मुकाबले काफी तेज हुई, लेकिन हर जानकारी तुरंत दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना फिर भी आसान नहीं था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/scientific-reason-behind-wearing-toe-rings-indian-women-health-benefits-uterus-science-3191851&quot;&gt;पैर में बिछिया क्यों पहनती हैं भारतीय महिलाएं, क्या इसके पीछे कोई साइंस?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;टाइपराइटर पर तैयार होते थे जरूरी दस्तावेज&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;आज Word या Google Docs में कुछ भी लिखकर तुरंत सुधार सकते हैं, लेकिन पहले टाइपराइटर ऑफिस की सबसे जरूरी मशीनों में से एक था. कर्मचारी चिट्ठियां, रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज टाइप करते थे. कई जगह कर्मचारी हाथ से जानकारी लिखते थे और प्रशिक्षित टाइपिस्ट या सेक्रेटरी उसे टाइप करके तैयार करते थे. दस्तावेज में गलती होने पर उसे ठीक करना भी आज की तरह आसान नहीं था, इसलिए टाइपिंग में काफी सावधानी रखनी पड़ती थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;फाइलों का था पूरा सिस्टम&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;आज किसी पुराने दस्तावेज को खोजने के लिए कंप्यूटर में नाम या शब्द सर्च कर लेते हैं, लेकिन पहले हर चीज को सही जगह रखना जरूरी होता था. बड़े ऑफिसों में फाइल कैबिनेट में कागजों को अलग-अलग नाम, नंबर या विषय के हिसाब से रखा जाता था. किसी फाइल को गलत जगह रख दिया जाए तो उसे दोबारा ढूंढने में काफी समय लग सकता था. IBM के इतिहास के मुताबिक, इंटरनेट से पहले ऑफिस में रिकॉर्ड कागजों पर रखे जाते थे और कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर उन दस्तावेजों को खोजने के लिए खुद फाइलों तक जाना पड़ता था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;कैलकुलेशन भी मशीनों और हाथ से होता था&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;आज Excel जैसी चीजों से हजारों आंकड़ों पर कुछ सेकंड में हिसाब लगाया जा सकता है, लेकिन पहले ऑफिसों में गणना के लिए कैलकुलेटर, जोड़ने वाली मशीनों और कई मामलों में हाथ से किए गए हिसाब का इस्तेमाल होता था. पुराने समय में खास तरह की मशीनें रिकॉर्ड को गिनने, जोड़ने और व्यवस्थित करने के लिए बनाई गई थीं. यानी बड़े ऑफिसों में काम रुकता नहीं था, बस उसे पूरा करने का तरीका आज से काफी अलग था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/know-about-passport-police-verification-process-and-related-important-information-3191903&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या passport verification के लिए थाने बुला सकती है पुलिस? जानें नियम&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/51aae5090bb0e51fda77af4905292e7917900778446461471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[आडवाणी से केजरीवाल तक को SIR नोटिस क्यों? जानें No Mapping का पूरा खेल]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/sir-notice-delhi-no-mapping-voter-list-advani-kejriwal-election-commission-3192212</link><comments>https://www.abplive.com/gk/sir-notice-delhi-no-mapping-voter-list-advani-kejriwal-election-commission-3192212#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 23:01:59 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/sir-notice-delhi-no-mapping-voter-list-advani-kejriwal-election-commission-3192212</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दिल्ली की राजनीति में इन दिनों एक नया तकनीकी शब्द SIR और No Mapping काफी चर्चा में है. चुनाव आयोग द्वारा दिल्ली में चलाई जा रही एक विशेष प्रक्रिया के तहत आम जनता से लेकर देश के बड़े-बड़े VVIP नेताओं को नोटिस थमा दिए गए हैं. इस लिस्ट में BJP के वरिष्ट नेता लालकृष्ण आडवाणी, AAP के अरविंद केजरीवाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इतने बड़े चेहरों को नोटिस मिलने के पूरी दिल्ली में हड़कंप मच गया है. लोगों के मन में डर है कि कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से काट तो नहीं दिया जाएगा. आइए जानते हैं कि क्या है यह पूरा मामला.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या है SIR?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;SIR का मतलब होता है विशेष गहन संशोधन. चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों को साफ और दुरस्त करने के लिए यह अभियान चलाता है. इसका मकसद फर्जी वोटरों को हटाना, पते में बदलाव को अपडेट करना और डेटा की गलतियों को ठीक करना होता है. दिल्ली में इस बात कम्प्यूटर आधारित ऑटोमेटिक सिस्टम ECINET के जरिए हर एक वोटर के डेटा की बारिकी से जांच की जा रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या है No Mapping का पूरा खेल?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आडवाणी, केजरीवाल और एस जयशंकर को जो नोटिस मिले हैं, उनमें सबसे मुख्य कारण No Mapping लिखा गया है. इसका मतलब होता है कि किसी वोटर की मौजूदा जानकारी 2002 की पुरानी SIR वोटर लिस्ट से मैच नहीं किया जा सका. जब गणना के दौरान किसी मतदाता का मौजूदा रिकॉर्ड पुराने रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल नहीं हो पाता, तो उसे इस कैटेगरी में डाल दिया जाता है. ऐसे मामलों में मतदाता को दोबारा चुनाव आयोग द्वारा तय 12 दस्तावेजों में से किसी एक जरिए अपनी पात्रता साबित करनी होती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या सिर्फ No Mapping ही है इकलौती वजह?&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नहीं, No Mapping के अलावा एक और बड़ी वजह लॉजिकल विसंगतियां Logical Discrepancies भी है. सिस्टम ने ऐसे रिकॉर्ड्स को भी नोटिस भेजा है जहां डेटा में कोई लॉजिकल गलती मिली है. जैसे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में वोटर रिकॉर्ड में उनके और उनके माता-पिता की उम्र के बीच का अंतर 15 साल से कम पाया गया, जो कि प्रेक्टिकली संभव नहीं है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/know-about-passport-police-verification-process-and-related-important-information-3191903&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या passport verification के लिए थाने बुला सकती है पुलिस? जानें नियम&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नोटिस मिलने का मतलब क्या है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अधिकारियों ने साफ किया है कि नोटिस मिलने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. यह सिर्फ एक वेरिफिकेशन प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता को अपनी जानकारी सही साबित करने का मौका दिया जाता है. दिल्ली के चुनाव अधिकारी के मुताबिक 33.13 लाख फ्लैग किए गए मतदाता में से 19.33 लाख मामले लॉजिकल विसंगतियां के हैं, जबकि बाकी ज्यादातर मामले No Mapping के हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जिन भी मतदाताओं को यह नोटिस मिला हैं, उन्हें 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया है. वे अपने पहचान पत्र और वर्तमान पते का प्रमाण अपने नजदीकी बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा करके या ऑनलाइन माध्यम से इस समस्या को आसानी से दूर करवा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/in-this-country-electricity-prices-turned-negative-know-why-were-people-paid-to-use-power-3191996&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार को देना पड़ता है पैसा&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/915116af5f665fda614b3cb0aaa9ed1e17900585106491474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[परमाणु बम से कितना अलग होता है हाइड्रोजन बम, दोनों में कितनी तबाही?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/hydrogen-vs-atomic-bomb-nuclear-fission-fusion-power-destruction-comparison-3192184</link><comments>https://www.abplive.com/gk/hydrogen-vs-atomic-bomb-nuclear-fission-fusion-power-destruction-comparison-3192184#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:34:24 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/hydrogen-vs-atomic-bomb-nuclear-fission-fusion-power-destruction-comparison-3192184</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दुनिया में जब भी महाविनाशकारी हथियारों की बात होती है, तो परमाणु बम का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों की तबाही को दुनिया आज तक नहीं भूली है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आधुनिक सैन्य विज्ञान में परमाणु बम से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक और शक्तिशाली हथियार मौजूद है, जिसे हाइड्रोजन बम या एच-बम कहा जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके काम करने के तरीके और विनाश करने की क्षमता में जमीन-आसमान का अंतर है. आइए जानते हैं कि ये दोनों बम एक-दूसरे से कितने अलग हैं और इनसे कितनी बड़ी तबाही मच सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किस प्रोसेस पर काम करता है परमाणु बम?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;परमाणु बम, जिसे फिशन बम भी कहा जाता है, यह न्यूक्लियर फिशन यानी विखंडन की प्रक्रिया पर आधारित होता है. इसमें यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे भारी परमाणुओं के नाभिक को तोड़ा जाता है, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है. हिरोशिमा पर गिराए गए लिटिल बॉय बम की क्षमता करीब 15 किलोटन थी, जबकि नागासाकी पर गिराए गए फैट मैन बम की क्षमता करीब 21 किलोटन आंकी गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाइड्रोजन बम में कैसे होता है धमाका?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाइड्रोजन बम, जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, न्यूक्लियर फ्यूजन यानी संलयन की प्रक्रिया पर काम करता है. इसमें हाइड्रोजन के दो आइसोटोप, ड्यूटीरियम और ट्रिटियम को आपस में जोड़ा जाता है, जिससे सूरज के अंदर होने वाली प्रक्रिया जैसी भारी ऊर्जा निकलती है. इसकी खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए पहले एक छोटा फिशन विस्फोट किया जाता है, जो इतना तापमान और दबाव पैदा करता है कि फ्यूजन रिएक्शन शुरू हो जाए, इसीलिए इसे टू-स्टेज हथियार कहा जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तबाही में कितना है फर्क?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट्स के मुताबिक हाइड्रोजन बम परमाणु बम के मुकाबले सैकड़ों से लेकर हजार गुना तक ज्यादा शक्तिशाली होता है. जहां परमाणु बम की क्षमता किलोटन यानी हजारों टन टीएनटी के बराबर मापी जाती है, वहीं हाइड्रोजन बम की क्षमता मेगाटन यानी लाखों टन टीएनटी के बराबर होती है. जहां एक परमाणु बम किसी शहर के एक बड़े हिस्से को तबाह कर सकता है, वहीं हाइड्रोजन बम पूरे महानगर को खत्म करने के साथ-साथ सैकड़ों किलोमीटर दूर तक भी नुकसान पहुंचा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-satellites-do-not-fall-to-earth-how-stay-in-orbit-space-science-3191778&quot;&gt;&lt;strong&gt;सैटेलाइट जमीन पर क्यों नहीं गिरती, हवा में कैसे टंगी रहती है?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब तक का सबसे शक्तिशाली परीक्षण&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब तक बनाए गए सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन बम का उदाहरण है सोवियत संघ का जार बोम्बा, जिसका परीक्षण 1961 में किया गया था और जिसकी क्षमता करीब 50 मेगाटन आंकी गई थी. इसके मुकाबले हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम इसके सामने बेहद छोटा नजर आता है. हैरानी की बात यह है कि हाइड्रोजन बम को अब तक कभी भी असली युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया है, इसे सिर्फ परीक्षणों के दौरान ही टेस्ट किया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/scientific-reason-behind-wearing-toe-rings-indian-women-health-benefits-uterus-science-3191851&quot;&gt;&lt;strong&gt;पैर में बिछिया क्यों पहनती हैं भारतीय महिलाएं, क्या इसके पीछे कोई साइंस?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/1d98d66b4fc9965438ed82511d40028f17900546261441474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[चांद पर कितना होगा इंसान का वजन, वहां गुरुत्वाकर्षण कितना अलग?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/human-body-weight-on-moon-gravity-earth-comparison-space-science-facts-3192154</link><comments>https://www.abplive.com/gk/human-body-weight-on-moon-gravity-earth-comparison-space-science-facts-3192154#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:27:37 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/human-body-weight-on-moon-gravity-earth-comparison-space-science-facts-3192154</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अंतरिक्ष यात्रियों की चांद पर उछल-उछलकर चलने वाली तस्वीरें और वीडियो देखकर अक्सर यह सवाल मन में आता है कि आखिर चांद पर इंसान का वजन कितना कम हो जाता है और वहां गुरुत्वाकर्षण धरती से इतना अलग क्यों है. दरअसल किसी भी ग्रह या उपग्रह पर गुरुत्वाकर्षण उसके द्रव्यमान यानी मास पर निर्भर करता है, और चांद का द्रव्यमान धरती के मुकाबले काफी कम है, इसी वजह से वहां का गुरुत्वाकर्षण बल भी धरती से बहुत कमजोर पड़ जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर चांद पर इंसान का वजन कितना रह जाएगा और यह पूरा गणित काम कैसे करता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्यों कम है चांद का गुरुत्वाकर्षण?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किसी भी पिंड का गुरुत्वाकर्षण बल उसके द्रव्यमान और आकार पर निर्भर करता है. धरती का व्यास चांद के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है, और धरती का द्रव्यमान भी चांद से कहीं ज्यादा है. जितना बड़ा और भारी कोई खगोलीय पिंड होगा, उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी उतना ही ज्यादा होगा. चूंकि चांद धरती के मुकाबले बहुत छोटा और हल्का है, इसलिए उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी काफी कमजोर है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;धरती के मुकाबले कितना कम है चांद का गुरुत्वाकर्षण?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;धरती पर गुरुत्वाकर्षण बल करीब 9.8 मीटर प्रति सेकेंड वर्ग होता है, जबकि चांद पर यह सिर्फ करीब 1.62 मीटर प्रति सेकेंड वर्ग है. यानी चांद का गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का करीब छठा हिस्सा यानी 1/6 ही है. इसी वजह से चांद पर कोई भी चीज धरती के मुकाबले बहुत हल्की महसूस होती है, और वहां चीजें धीरे-धीरे नीचे गिरती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चांद पर कितना रह जाएगा वजन?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;वजन और द्रव्यमान में एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है. द्रव्यमान यानी मास हमेशा एक जैसा रहता है, चाहे इंसान धरती पर हो या चांद पर, लेकिन वजन गुरुत्वाकर्षण बल के हिसाब से बदल जाता है. अगर धरती पर किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो चांद पर वही व्यक्ति का वजन घटकर करीब 10 किलोग्राम के आसपास रह जाएगा, क्योंकि चांद का गुरुत्वाकर्षण धरती का सिर्फ छठा हिस्सा है. यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्री चांद पर बेहद हल्का महसूस करते हैं और सामान्य चलने के बजाय उछलकर चलते नजर आते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-is-everyone-in-this-mexican-village-believed-to-be-blind-know-the-truth-behind-the-black-fly-3191981&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस गांव में सभी लोग हैं अंधे, वजह जानकर नहीं होगा यकीन&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;शरीर पर क्या और असर पड़ता है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कमजोर गुरुत्वाकर्षण का असर सिर्फ चलने-फिरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे मांसपेशियों और हड्डियों पर भी असर पड़ता है. धरती पर हमारा शरीर हर पल गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करता रहता है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लेकिन चांद जैसी कम गुरुत्वाकर्षण वाली जगह पर लंबे समय तक रहने से हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है, इसी वजह से एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष मिशन के दौरान नियमित एक्सरसाइज करनी पड़ती है, ताकि उनका शरीर मजबूत बना रहे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/scientific-reason-behind-wearing-toe-rings-indian-women-health-benefits-uterus-science-3191851&quot;&gt;&lt;strong&gt;पैर में बिछिया क्यों पहनती हैं भारतीय महिलाएं, क्या इसके पीछे कोई साइंस?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/e1d5bd8e77fd9ea5d2def926eea6135e17900529744761474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[क्या होता है मोहम्मद नाम का अर्थ? क्यों सबसे ज्यादा रखा जाता है यह नाम]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/mohammad-name-meaning-why-it-is-so-popular-among-muslims-3192378</link><comments>https://www.abplive.com/gk/mohammad-name-meaning-why-it-is-so-popular-among-muslims-3192378#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:18:30 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/mohammad-name-meaning-why-it-is-so-popular-among-muslims-3192378</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दुनिया में कई ऐसे नाम हैं जो अलग-अलग देशों और समुदायों में लंबे समय से लोकप्रिय हैं. इनमें मोहम्मद नाम भी शामिल है. यह नाम खासतौर पर मुस्लिम समुदाय में बहुत प्रचलित है. मोहम्मद अरबी मूल का नाम है, जिसका अर्थ प्रशंसित या जिसकी बहुत प्रशंसा की गई हो, बताया जाता है. इस नाम की लोकप्रियता के पीछे सिर्फ इसका अर्थ ही नहीं, बल्कि इस्लाम के धार्मिक इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण संबंध भी है. यही वजह है कि कई मुस्लिम परिवार अपने बच्चों के नाम के रूप में इसे पसंद करते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है मोहम्मद नाम का अर्थ?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मोहम्मद अरबी नाम है और इसे अरबी शब्द &amp;lsquo;ह-म-द&amp;rsquo; से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध प्रशंसा से है. मोहम्मद का सामान्य अर्थ &amp;lsquo;प्रशंसित&amp;rsquo;, &amp;lsquo;जिसकी प्रशंसा की गई हो&amp;rsquo; या &amp;lsquo;बहुत प्रशंसा पाने वाला&amp;rsquo; बताया जाता है. अलग-अलग भाषाओं में इसके उच्चारण और लिखने का तरीका थोड़ा अलग दिखाई दे सकता है, लेकिन नाम का मूल अरबी भाषा से जुड़ा है. यह नाम केवल एक सामान्य नाम नहीं है. इस्लामी परंपरा में पैगंबर मुहम्मद का महत्वपूर्ण स्थान है. इसलिए मुस्लिम परिवारों में यह नाम धार्मिक सम्मान और आस्था से भी जुड़ा हुआ माना जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-is-everyone-in-this-mexican-village-believed-to-be-blind-know-the-truth-behind-the-black-fly-3191981&quot;&gt;इस गांव में सभी लोग हैं अंधे, वजह जानकर नहीं होगा यकीन &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुस्लिम परिवारों में क्यों लोकप्रिय है यह नाम?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मोहम्मद नाम की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसका धार्मिक महत्व है. पैगंबर मुहम्मद इस्लाम के केंद्रीय धार्मिक व्यक्तित्व हैं. उनके नाम से जुड़ा होने की वजह से कई मुस्लिम परिवार बच्चों का नाम मोहम्मद रखते हैं. कई जगह बच्चे का पहला नाम मोहम्मद और उसके बाद कोई दूसरा नाम रखा जाता है. कुछ परिवार इसे धार्मिक सम्मान के तौर पर रखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अपने बच्चे के लिए शुभ और सम्मान से जुड़ा नाम मानते हैं. यही वजह है कि यह नाम मुस्लिम आबादी वाले देशों के साथ-साथ दुनिया के दूसरे हिस्सों में रहने वाले मुस्लिम समुदायों में भी काफी सुनने को मिलता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दुनिया में इतना आम क्यों है मोहम्मद नाम?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मोहम्मद नाम की लोकप्रियता केवल एक देश तक सीमित नहीं है. मुस्लिम आबादी दुनिया के कई हिस्सों में रहती है और अलग-अलग देशों में इस नाम का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा इस नाम के कई रूप भी मिलते हैं, जैसे Muhammad, Mohammed, Mohammad और Mohamed. अलग-अलग देशों में इसकी वर्तनी और उच्चारण बदलने के बावजूद मूल नाम एक ही अरबी नाम से जुड़ा है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मोहम्मद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पुरुष नामों में गिना जाता है. हालांकि, दुनिया में सबसे लोकप्रिय नाम होने की रैंकिंग इस बात पर निर्भर करती है कि अलग-अलग वर्तनी को एक साथ गिना गया है या अलग-अलग.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271&quot;&gt;छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार? &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/9018f5ed52146891f3e721b635f684fd17900768080741472_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[दुबई के बुर्ज खलीफा की लिफ्ट एक सेकंड में कितनी ऊपर जाती है, जानें यहां?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/how-high-the-elevator-in-dubai-s-burj-khalifa-travels-in-one-second-know-here-3192437</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/how-high-the-elevator-in-dubai-s-burj-khalifa-travels-in-one-second-know-here-3192437#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:04:47 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/how-high-the-elevator-in-dubai-s-burj-khalifa-travels-in-one-second-know-here-3192437</guid><description><![CDATA[दुबई के बुर्ज खलीफा की लिफ्ट एक सेकंड में कितनी ऊपर जाती है, जानें यहां?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/7d25b4b2f18258e5439a38f5f061521517900837623251307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[फिर शुरू हो चुका पराली जलाने का सिलसिला, जानें कहां-कहां धधक रही आग]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/stubble-burning-returns-in-north-india-know-where-are-the-fires-being-reported-3192401</link><comments>https://www.abplive.com/gk/stubble-burning-returns-in-north-india-know-where-are-the-fires-being-reported-3192401#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 17:41:06 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/stubble-burning-returns-in-north-india-know-where-are-the-fires-being-reported-3192401</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Stubble Burning:&lt;/strong&gt; पूरे उत्तर भारत में जैसे ही खरीफ की कटाई का मौसम शुरू होता है पराली जलाने की घटना फिर से सामने आने लगती हैं. किसान अक्सर अगली फसल के लिए अपने खेतों को जल्दी से खाली करने के लिए धान के अवशेषों को जला देते हैं. लेकिन यह प्रथा सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण और खासतौर से दिल्ली एनसीआर में धुंध को बढ़ाने में बड़ा योगदान देती है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सैटेलाइट निगरानी के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर को मौसमी ट्रैकिंग शुरू होने के बाद से आग की घटना दर्ज की गई है. हालांकि पिछले सालों की तुलना में शुरुआती सीजन के मामलों में गिरावट आई है लेकिन कई क्षेत्रों में पराली में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पंजाब में प्रारंभिक आग की घटनाओं की रिपोर्ट&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पंजाब में 15 से 20 सितंबर तक सीजन के पहले 6 दिनों के दौरान पराली जलाने के 15 मामले दर्ज किए गए हैं. 1 दिन में दर्ज की गई घटनाओं की सबसे ज्यादा संख्या 8 थी. पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक अमृतसर राज्य में सबसे ज्यादा घटनाओं वाले जिले के रूप में उभरा है. फिरोजपुर, तरनतारन, होशियारपुर और शहीद भगत सिंह नगर में भी आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती आंकड़े सीजन की अपेक्षाकृत सीमित शुरुआत का संकेत देते हैं. हालांकि राज्य भर मैं धान की कटाई बढ़ने के साथ घटनाओं की संख्या बदल सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/4967843eccdfa182a4ed0fcaf662e5f017900790194051307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हरियाणा और उत्तर प्रदेश में स्थिति&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बताया जा रहा है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं फिलहाल कुछ हद तक प्रशासनिक निगरानी और निवारक उपायों के कारण कंट्रोल में हैं. उत्तर प्रदेश में &lt;a title=&quot;गाजियाबाद&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/ghaziabad-news&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;गाजियाबाद&lt;/a&gt; जैसे जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट देखी गई है. कथित तौर पर मामले शून्य स्तर तक पहुंच गए हैं. जैविक खाद के इस्तेमाल सहित वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन विधियों को अपनाने से खेत की आग को कम करने के प्रयासों में योगदान मिला है. हालांकि अधिकारी हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी जारी रखते हैं. इन क्षेत्रों में कटाई की गतिविधि तेज होने से पराली जलाने का खतरा बढ़ सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जुर्माना और लाल एंट्रीज प्रस्तावित&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सर्दी के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पराली जलाने के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. प्रस्तावित केंद्रीय नियमों के तहत किसानों को उनकी कृषि भूमि के आकार के आधार पर ₹5000 से ₹30000 तक पर्यावरण मुआवजा का सामना करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;15 महीने के लिए भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी दर्ज की जा सकती है. इस तरह की एंट्री किसानों की कर्ज और कुछ सरकारी लाभों तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है. पंजाब में कथित तौर पर कुछ शुरुआती मामलों में जुर्माना लगाया जा चुका है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/eb896efc67e00cca812bf317a5a3429617900790430791307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राज्य सरकार पराली की आग को रोकने के लिए क्षेत्र स्तरीय निगरानी को बढ़ा रही हैं. हरियाणा सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी और किसानों को मौजूद विकल्पों के बारे में सूचित करने के लिए 8200 से ज्यादा अधिकारियों और फील्ड टीमों को तैनात किया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मोहाली जैसे जिलों में अधिकारियों ने निवारक उपाय के रूप में रात में कंबाइन कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रतिबंध का उद्देश्य व्यक्तियों को बिना पहचाने अंधेरे में पराली जलाने से रोकना है. ऐसे उपायों को जागरूकता अभियानों और मशीनरी तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ लागू किया जा रहा है जो किसानों को बिना आग लगाए फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अनुमति देते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;कांशी राम से मायावती के पास कैसे आई BSP, अब तलाश रही वारिस? जानें कहानी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/how-did-bsp-leadership-pass-from-kanshi-ram-to-mayawati-know-the-story-of-a-political-succession-3192322&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;कांशी राम से मायावती के पास कैसे आई BSP, अब तलाश रही वारिस? जानें कहानी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भगवंत मान का क्या कहना है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वह पराली जलाने के लिए किसानों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का समर्थन नहीं करते हैं. इसके बदले उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है. &lt;a title=&quot;भगवंत मान&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/bhagwant-mann&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;भगवंत मान&lt;/a&gt; ने पराली जलाने से बचने वाले किसानों के लिए प्रति एकड़ ₹3 हजार &amp;nbsp;की प्रोत्साहन राशि की मांग की है . प्रस्ताव के मुताबिक यह समर्थन किसानों को वित्तीय नुकसान उठाए बिना वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन तरीकों को अपने में मदद करेगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/dfd0bde74996eb92c1cc9496e7df7ab717900788470321307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[कांशी राम से मायावती के पास कैसे आई BSP, अब तलाश रही वारिस? जानें कहानी]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/how-did-bsp-leadership-pass-from-kanshi-ram-to-mayawati-know-the-story-of-a-political-succession-3192322</link><comments>https://www.abplive.com/gk/how-did-bsp-leadership-pass-from-kanshi-ram-to-mayawati-know-the-story-of-a-political-succession-3192322#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 15:01:40 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/how-did-bsp-leadership-pass-from-kanshi-ram-to-mayawati-know-the-story-of-a-political-succession-3192322</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;BSP Leadership:&lt;/strong&gt; बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को लेकर मायावती &amp;nbsp;तक की यात्रा भारतीय राजनीति में सबसे जरूरी नेतृत्व परिवर्तनों में से एक है. सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान मायावती ने कांशीराम के साथ अपना राजनीतिक जुड़ाव शुरू किया और अंत में उनकी सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगी बन गईं. सालों बाद उन्होंने बसपा का नेतृत्व संभाला और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं. आज मायावती के परिवार के सदस्यों से जुड़े हालिया बदलावों के बाद पार्टी का भविष्य के नेतृत्व के बारे में सवाल फिर से फोकस में आ गए हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आईएएस की तैयारी से लेकर कांशीराम के आंदोलन तक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1977 में जब मायावती कांशीराम के संपर्क में आईं तब वह दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. वह तब बामसेफ संगठन का निर्माण कर रहे थे और राजनीतिक रूप से बहुजन समुदायों को एकजुट करने के लिए काम कर रहे थे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कांशीराम मायावती की सार्वजनिक रूप से बोलने की क्षमता और राजनीतिक आत्मविश्वास से काफी ज्यादा प्रभावित थे. उन्होंने उन्हें सिविल सेवाओं में करियर बनाने की योजना छोड़कर खुद को आंदोलन के लिए समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित किया. अंत में मायावती कांशीराम के राजनीतिक कार्यों में शामिल हो गईं और उनके आंदोलन में एक बड़ी आयोजन बन गईं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/b5cc40919ba905cecb77bd3ea7d3931c17900694543281307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;डीएस-4 से बीएसपी के गठन तक&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना से पहले कांशीराम ने डीएस-4 सहित संगठन विकसित किए. मायावती बसपा के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ीं और धीरे-धीरे कांशीराम के सबसे प्रमुख राजनीतिक सहयोगियों में से एक बन गईं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उनके जमीनी स्तर के काम और चुनावी अभियानों ने उन्हें एक बड़े बसपा नेता के रूप में स्थापित करने में मदद की. उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और 1989 में बिजनौर लोकसभा सीट जीती.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मायावती मुख्यमंत्री बनीं&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1990 के दशक के दौरान मायावती का राजनीतिक उदय तेजी से हुआ. 1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद बसपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया. उस सरकार के पतन के बाद मायावती 1995 में भाजपा के समर्थन से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पद संभालने वाली दलित समुदाय की पहली महिला बनीं. बाद में वह कई मौकों पर इस पद से लौटीं और अंत में चार बार मुख्यमंत्री रहीं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांशीराम ने मायावती को अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जैसे-जैसे कांशीराम का स्वास्थ्य बिगड़ता गया मायावती तेजी से बहुजन समाज पार्टी के नेतृत्व में केंद्रीय व्यक्ति बन गईं. दिसंबर 2001 में कांशीराम ने सार्वजनिक रूप से उन्हें अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया. सितंबर 2003 में जब कांशीराम अपने स्वास्थ्य की वजह से इस भूमिका में बने रहने में असमर्थ थे तो सितंबर 2003 में मायावती को सर्वसम्मति से बसपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/13dba014d6f33aa24997ad68dd91bc6617900694785011307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नए उत्तराधिकारी का सवाल&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मायावती ने ऐतिहासिक रूप से वंशवादी राजनीति के खिलाफ बात की है. इसी के साथ बसपा के अंदर उत्तराधिकारी का मुद्दा पार्टी के भविष्य के साथ काफी निकटता से जुड़ा हुआ है. दिसंबर 2023 में उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी स्थिति बदल गई. उनके आचरण पर आपत्ति जताने के बाद मायावती ने उन्हें जरूरी जिम्मेदारियों से हटा दिया और बाद में उन्हें पार्टी की जरूरी भूमिका में वापस ले लिया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ईशान आनंद की एंट्री ने बदल दी तस्वीर&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सितंबर 2026 में मायावती ने अपने परिवार से जुड़े एक और बदलाव की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को पार्टी में आगे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. इसी के साथ उनके छोटे भतीजे ईशान आनंद को जरूरी संगठनात्मक भूमिका के साथ आगे बढ़ाया जाएगा. यह घोषणा 23 सितंबर को होने वाली अखिल भारतीय बीएसपी बैठक से पहले हुई. मायावती ने पारिवारिक रिश्तों को राजनीतिक जिम्मेदारियों से अलग करने का फैसला लिया है और राजनीति में पारिवारिक भागीदारी के लिए कांशीराम के दृष्टिकोण का ही उदाहरण दिया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/csk-appoints-zaheer-khan-as-a-new-head-coach-before-ipl-2027-know-will-he-earn-less-than-stephen-fleming-3192211&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/c6914f44760d0e3498c4f07386e78dff17900692460261307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[छेड़खानी और रेप के सबसे ज्यादा मामले कहां, किस नंबर पर बिहार?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271</link><comments>https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:33:30 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/jamui-viral-video-where-are-the-highest-numbers-of-rape-and-molestation-cases-reported-know-here-3192271</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Bihar Crime Cases:&lt;/strong&gt; बिहार के जमुई जिले की एक हालिया घटना ने सबका ध्यान खींचा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक नाबालिक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न और एक नाबालिक छात्र के साथ मारपीट दिखाई गई है. इस घटना के सिलसिले में तीन नाबालिग लड़कों को हिरासत में ले लिया गया. इस मामले ने एक बार फिर महिलाओं के खिलाफ अपराधों और राष्ट्रीय अपराध के आंकड़ों में बिहार की स्थिति पर सवाल खड़ा कर दिया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के सालाना आंकड़ों के मुताबिक रेप और छेड़छाड़ के दर्ज मामलों की संख्या और दर के मामले में राज्यों के बीच काफी अंतर है. हालांकि अपराध के आंकड़ों को सावधानी से समझना चाहिए क्योंकि केस दर्ज करने के तरीके और कम रिपोर्टिंग आंकड़ों पर असर डाल सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन राज्यों में रेप के सबसे ज्यादा मामले दर्ज होते हैं?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रेप के दर्ज मामलों की कुल संख्या के हिसाब से राजस्थान और मध्य प्रदेश अक्सर सबसे ज्यादा आंकड़े वाले राज्यों में शामिल रहे हैं. राजस्थान की पहचान रेप की ऊंची दर वाले राज्यों में भी की गई है. यह दर प्रति लाख आबादी पर होने वाली घटना को मापती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कुल मामलों की संख्या और अपराध की दर अलग-अलग पैमाने हैं. &amp;nbsp;ज्यादा आबादी वाले राज्यों में कुल मामलों की संख्या ज्यादा हो सकती है, इसी के साथ दर आबादी के आकार के आधार पर तुलना करने में मदद करती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/de944510611e7790ef7c89b5fa3c7b7017900641730071307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;छेड़छाड़ के मामले सबसे ज्यादा कहां दर्ज होते हैं?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उन पर हमले के मामले, जिन्हें आमतौर पर छेड़छाड़ के मामले कहा जाता है, भारत के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज किए जाते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य इस श्रेणी में दर्ज मामलों की कुल संख्या के मामले में ऊपर रहे हैं. ये आंकड़े पुलिस द्वारा दर्ज मामलों को दिखाते हैं और जरूरी नहीं कि यह असल में होने वाली सभी घटनाओं की पूरी संख्या को दर्शाते हों.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिहार की स्थिति क्या है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हत्या और जमीन से जुड़े विवादों जैसे कुछ दूसरे अपराधों के उच्च स्तर के बावजूद प्रति लाख महिला आबादी पर रेप और छेड़छाड़ के दर्ज मामलों की दर में बिहार आमतौर पर राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बिहार को अक्सर रेप के कम दर्ज मामलों वाले राज्यों में गिना जाता है. महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों में अपनी हिस्सेदारी के मामले में राज्य टॉप 10 से बाहर रहता है. साल और देखे जा रहे थे पैमाने के आधार पर यह आमतौर पर 12वें से 15वें स्थान के बीच आता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इन रैंकिंग का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध कम होते हैं. दर्ज मामलों की संख्या कई सामाजिक और प्रशासनिक वजहों से प्रभावित हो सकती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/26402fb15d1189df310a2d9076ce3d5c17900641924481307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अपहरण और दहेज के लिए परेशान करना बड़े अपराधों में शामिल&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बिहार में महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में अपहरण और दहेज से जुड़ी प्रताड़ना का एक बड़ा हिस्सा है. रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में महिलाओं के खिलाफ दर्ज बड़े अपराधों में रेप के मामले लगभग 12% हैं. &amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मामलों के बंटवारे से पता चलता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में रेप और छेड़छाड़ के अलावा कई दूसरी तरह के अपराध भी शामिल हैं. हर श्रेणी के लिए खास कानूनी, जांच और रोकथाम के उपायों की जरूरत होती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मामलों की कम रिपोर्टिंग एक चिंता का विषय&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सामाजिक कार्यकर्ताओं इस बात की चिंता जताई है कि कम रिपोर्टिंग एक वजह हो सकती है जिससे बिहार में दर्ज आंकड़े तुलनात्मक रूप से कम दिखते हैं. कई पीड़ित और उनके परिवार सामाजिक बदनामी, इज्जत खराब होने के डर, रिश्तेदारों के दबाव या फिर रिपोर्टिंग प्रक्रिया पर भरोसा न होने की वजह से पुलिस के पास जाने से हिचकिचा सकते हैं. &amp;nbsp;यही वजह है कि अपराध के सरकारी आंकड़ों को सभी घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड नहीं माना जाना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a title=&quot;जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/csk-appoints-zaheer-khan-as-a-new-head-coach-before-ipl-2027-know-will-he-earn-less-than-stephen-fleming-3192211&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिहार में पटना में सबसे ज्यादा मामले&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े सबसे ज्यादा मामले राजधानी पटना में दर्ज किए जाते हैं. राज्य का सबसे बड़ा शहरी केंद्र और एक अहम प्रशासनिक केंद्र होने के नाते पटना की आबादी ज्यादा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार को देना पड़ता है पैसा&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/in-this-country-electricity-prices-turned-negative-know-why-were-people-paid-to-use-power-3191996&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार को देना पड़ता है पैसा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/82e572210fb54f56532d700454cb758d17900639225671307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[जहीर खान को कितनी सैलरी देगी CSK, स्टीफन फ्लेमिंग से कम या ज्यादा?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/csk-appoints-zaheer-khan-as-a-new-head-coach-before-ipl-2027-know-will-he-earn-less-than-stephen-fleming-3192211</link><comments>https://www.abplive.com/gk/csk-appoints-zaheer-khan-as-a-new-head-coach-before-ipl-2027-know-will-he-earn-less-than-stephen-fleming-3192211#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 11:46:36 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/csk-appoints-zaheer-khan-as-a-new-head-coach-before-ipl-2027-know-will-he-earn-less-than-stephen-fleming-3192211</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Zaheer Khan CSK:&lt;/strong&gt; चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2027 से पहले एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान को अपना नया हेड कोच नियुक्त किया है. इस फैसले के साथ ही स्टीफन फ्लेमिंग का फ्रेंचाइजी के साथ लंबे समय से चला आ रहा साथ खत्म हो चुका है. टीम के साथ 18 साल बीताने के बाद फ्लेमिंग हट गए और अब जहीर पर इंडियन प्रीमियर लीग की सबसे सफल टीमों में से एक को लीड करने की जिम्मेदारी है. इसके बाद सबका ध्यान जहीर खान की सैलरी पर गया है. आइए जानते हैं कि अब उन्हें कितनी सैलरी दी जाएगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चेन्नई सुपर किंग्स में जहीर खान की संभावित सैलरी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जहीर खान को आईपीएल 2027 सीजन के लिए 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट ऑफर किया गया है. उनकी संभावित सालाना सैलरी 5 करोड़ से 7 करोड़ के बीच बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई सुपर किंग्स इसी सैलरी रेंज में हेड कोच की तलाश कर रही थी. हालांकि ना तो फ्रेंचाइजी और ना ही जहीर खान ने उनकी सैलरी की सही रकम की आधिकारिक पुष्टि की है. इस वजह से बताई गई रकम को पक्की सैलरी के बजाय एक अनुमान ही माना जाना चाहिए. अगर जहीर को ₹7 करोड़ मिलते हैं, तो उनकी कमाई उनके पहले वाले कोच की बताई गई सैलरी से थोड़ी कम होगी. 5 करोड़ मिलने पर यह अंतर और ज्यादा होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/4b936c638d3e5cf29bcd86fe2b18b8cd17900577515571307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;स्टीफन फ्लेमिंग की सैलरी से तुलना&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिपोर्ट के मुताबिक स्टीफन फ्लेमिंग चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच के तौर पर सालाना लगभग 7.5 करोड़ कमाते थे. इस आंकड़े की तुलना में जहीर खान की संभावित सैलरी 5 करोड़ से 7 करोड़ यानी फ्लेमिंग की बताई गई सैलरी से कम या उसके आस-पास होगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;असली तुलना जहीर के कॉन्ट्रैक्ट में शामिल सही रकम पर निर्भर करेगी. क्योंकि आधिकारिक जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है इस वजह से यह आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर ही आधारित हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पिछली भूमिका के मुकाबले जाहिर की सैलरी में बढ़ोतरी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चेन्नई सुपर किंग्स में शामिल होने से पहले जहीर खान लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए मैटर के तौर पर 5 करोड़ कमाते थे. इस वजह से चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच के तौर पर उनकी नियुक्ति से उनकी सालाना सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है, यह कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम रकम पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह नई भूमिका जहीर के लिए एक बड़ा प्रोफेशनल मौका भी है, जिन्होंने पहले टीम डेवलपमेंट और क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में काम किया है. उनके अनुभव में मुंबई इंडियंस के साथ जिम्मेदारियां और &lt;a title=&quot;लखनऊ&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/lucknow&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;लखनऊ&lt;/a&gt; के ऊपर जायंट्स में मेंटर की भूमिका शामिल है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/c36dce6da9c4dc2a72a64efd251d450217900577729491307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चेन्नई सुपर किंग्स में फ्लेमिंग की विरासत&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्टीफन फ्लेमिंग 2009 से चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच रहे हैं और उन्होंने फ्रेंचाइजी की सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है. उनके कार्यकाल के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच आईपीएल खिताब जीते और एक मजबूत टीम स्ट्रक्चर बनाया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फ्लेमिंग के जाने से लगभग 2 दशक तक चले कोचिंग दौर का अंत हो गया. अब जहीर खान से उम्मीद की जाएगी कि वह टीम के स्थापित सिस्टम को बनाए रखें और साथ ही अपनी रणनीतियां और तरीके भी अपनाएं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार को देना पड़ता है पैसा&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/in-this-country-electricity-prices-turned-negative-know-why-were-people-paid-to-use-power-3191996&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार को देना पड़ता है पैसा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आईपीएल 2027 से पहले जहीर खान की जिम्मेदारियां&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जाहिर की भूमिका सिर्फ मैच की रणनीतियों को बनाने तक ही सीमित नहीं रहेगी. चेन्नई सुपर किंग्स को युवा खिलाड़ियों की पहचान करने और उन्हें तैयार करने में भी उनके अनुभव पर भरोसा करने की उम्मीद है. एक मजबूत स्क्वाड बनाना उभरते हुए क्रिकेटरों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना और फ्रेंचाइजी के कॉम्पिटेटिव स्टैंडर्ड को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा होगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेलने, मेंटरिंग और टीम मैनेजमेंट में उनका बैकग्राउंड इन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है. हालांकि जहीर खान के पास आईपीएल का काफी अनुभव है लेकिन आईपीएल 2027 उनके लिए किसी आईपीएल फ्रैंचाइजी के हेड कोच के तौर पर काम करने का पहला मौका होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;इस गांव में सभी लोग हैं अंधे, वजह जानकर नहीं होगा यकीन&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-is-everyone-in-this-mexican-village-believed-to-be-blind-know-the-truth-behind-the-black-fly-3191981&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;इस गांव में सभी लोग हैं अंधे, वजह जानकर नहीं होगा यकीन&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/275a9a333c550c59e91581a33ffb4cb817900574842741307_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>