<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/gk/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Tue, 4 Aug 2026 08:23:31 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[पार्सल और ड्रोन से हो रही ड्रग्स डिलीवरी, किन रास्तों से आ रहा 'माल'?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/drugs-addiction-in-india-advance-and-high-tech-drugs-delivery-system-drone-and-parcel-ncrb-data-golden-crescent-golden-triangle-drugs-smuggling-3169962</link><comments>https://www.abplive.com/gk/drugs-addiction-in-india-advance-and-high-tech-drugs-delivery-system-drone-and-parcel-ncrb-data-golden-crescent-golden-triangle-drugs-smuggling-3169962#respond</comments><pubDate>Tue, 4 Aug 2026 08:05:50 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/drugs-addiction-in-india-advance-and-high-tech-drugs-delivery-system-drone-and-parcel-ncrb-data-golden-crescent-golden-triangle-drugs-smuggling-3169962</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Drugs Addiction In India:&lt;/strong&gt; देश में नशे के बढ़ते कारोबार और युवा पीढ़ी पर पड़ रहे इसके घातक असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री &lt;a title=&quot;नरेंद्र मोदी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/narendra-modi&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;नरेंद्र मोदी&lt;/a&gt; ने 100 हफ्तों तक चलने वाले 'नशा मुक्त युवा' मूवमेंट की शुरुआत की, जो देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह पहल बेहद जरूरी हो गई है क्योंकि अवैध नशा न केवल युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर रहा है, बल्कि लगातार जाने भी ले रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाईटेक होते इस दौर में तस्करों ने डिलीवरी के लिए ड्रोन और पार्सल सेवा का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में करोड़ों लोग अलग-अलग प्रकार के नशे की गिरफ्त में हैं और पड़ोसी देशों के रास्तों से बड़े पैमाने पर अवैध नशे की खेप देश के अंदर पहुंचाई जा रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;देश में हर रोज नशे से जान गंवा रहे युवा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नशे की लत आज के समय में देश के युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आई है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 के दौरान नशीले पदार्थों और शराब की लत की वजह से कुल 13,955 लोगों की जान चली गई थी. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 12,977 मौतें नशे की वजह से हुआ मानसिक तनाव और लत के चलते की गई आत्महत्याओं से हुई थीं. इसके अलावा 978 लोगों की मौत सीधे तौर पर बहुत अधिक नशा करने यानी ड्रग ओवरडोज के कारण हुई. आंकड़े साफ बताते हैं कि देश में औसतन हर 35 से 40 युवाओं में से एक की जान नशे के भयानक दुष्परिणामों के कारण जा रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत में कितनी बड़ी है नशेड़ियों की फौज?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की सालाना रिपोर्ट भारत में नशे की भयावह तस्वीर पेश करती है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में 3.1 करोड़ से अधिक लोग कैनबीज यानी गांजा, भांग और हशीश का इस्तेमाल करते हैं. वहीं 2.3 करोड़ से ज्यादा नागरिक अफीम और हेरोइन जैसे खतरनाक ओपियोइड्स के आदी हैं. इसके अलावा 1.18 करोड़ लोग सिंथेटिक ड्रग्स और गोलियों का सेवन कर रहे हैं. फीसदी के हिसाब से देखें तो भारत की लगभग 4% आबादी कैनबीज और 3% आबादी अफीम के नशे में जकड़ी हुई है. इन नशीले पदार्थों से अलग देश में 16 करोड़ से अधिक लोग शराब का सेवन भी करते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/haldiram-london-restaurant-closed-in-25-days-first-indian-restaurant-in-london-hindoostane-coffee-house-owner-sake-din-mohammad-3169847&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/14d3ba1d0f9e4498d508f65480860f1a17857721503351014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अवैध नशे के भारत में कितने रास्ते?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गोल्डन क्रिसेंट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में अवैध नशे की आवक दो मुख्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व जमीनी रास्तों से होती है. इनमें से पहला है 'गोल्डन क्रिसेंट', जिसे सरकार 'डेथ क्रिसेंट' भी कहती है. भारत के पश्चिम में स्थित इस क्षेत्र में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान आते हैं. अफगानिस्तान में तालिबान के अफीम पर रोक लगाने के बावजूद वहां पहले से मौजूद 13,200 टन अफीम का विशाल स्टॉक लगातार सप्लाई किया जा रहा है. पाकिस्तान की सीमा से जुड़े होने के कारण पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. साल 2025 में NCB ने देशभर से 3,567 किलो हेरोइन जब्त की, जिसमें से 58 फीसदी यानी अकेले 2,086 किलो हेरोइन पंजाब में पकड़ी गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;'गोल्डन ट्राएंगल' और म्यांमार का नेटवर्क&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरा प्रमुख मार्ग भारत के पूर्व में स्थित 'गोल्डन ट्राएंगल' है, जिसे 'डेथ ट्राएंगल' के नाम से भी जाना जाता है. इसमें म्यांमार, थाईलैंड और लाओस शामिल हैं, जहां से मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स भेजे जाते हैं. साल 2024 में अकेले म्यांमार में 995 टन मेथामफेटामाइन का भारी उत्पादन हुआ, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी तस्करी बढ़ गई. NCB ने 2025 में कुल 3,485 किलो एटीएस जब्त किया, जिसमें से 42% यानी 1,477 किलो माल अकेले मिजोरम से मिला. इसके अलावा मणिपुर से 535 किलो, राजधानी दिल्ली से 454 किलो और गुजरात से 308 किलो ड्रग्स पकड़ा गया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ड्रोन और पार्सल से डिलीवरी का नया पैंतरा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान सीमा से लगने वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए नशा गिराने की घटनाएं सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं. पिछले साल ड्रोन से तस्करी के 305 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 408 किलो नशीले पदार्थ की सप्लाई हुई थी. यह आंकड़ा साल 2024 के मुकाबले 98% अधिक है. अकेले पंजाब में ड्रोन डिलीवरी के 298 मामले सामने आए, जिनमें 461 किलो माल भेजा गया. हालांकि, कूरियर और पार्सल के जरिए होने वाली सप्लाई में थोड़ी कमी आई है; जहां 2021 में 250 मामलों में 1,557 किलो माल मिला था, वहीं 2025 में 174 मामलों में 972 किलो ड्रग्स बरामद हुई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/80206fa34151f4f9124b8d391184905b17857721721211014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;करोड़ों की जब्ती और हजारों गिरफ्तारियां&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चला रही हैं. NCB की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में देशभर के अंदर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े 1,48,063 आपराधिक मामले दर्ज किए गए. इन कार्यवाइयों के तहत कुल 1,83,675 तस्करों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 747 विदेशी नागरिक भी शामिल थे. पुलिस और एजेंसियों ने पूरे साल में 12,409 क्विंटल नशीली सामग्री जब्त की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 18,227 करोड़ रुपये थी. हालांकि यह आंकड़ा 2024 की तुलना में कम था, जब एजेंसियों ने 27,524 करोड़ रुपये मूल्य का 13,306 क्विंटल माल पकड़ा था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;महीनों स्पेस में बिताते, फिर वहां कपड़े कैसे धोते हैं एस्ट्रोनॉट्स?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/astronauts-spend-months-in-space-so-how-do-they-wash-their-clothes-there-know-here-3169915&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;महीनों स्पेस में बिताते, फिर वहां कपड़े कैसे धोते हैं एस्ट्रोनॉट्स?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/ca9410a5a2d1e548d608fd90393b256417857722530431014_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट, किस अदालत में सबसे ज्यादा केस पेंडिंग?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/how-many-cases-are-pending-in-supreme-court-and-high-court-know-about-government-data-rajya-sabha-3169953</link><comments>https://www.abplive.com/gk/how-many-cases-are-pending-in-supreme-court-and-high-court-know-about-government-data-rajya-sabha-3169953#respond</comments><pubDate>Tue, 4 Aug 2026 06:47:09 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/how-many-cases-are-pending-in-supreme-court-and-high-court-know-about-government-data-rajya-sabha-3169953</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Supreme Court And High Court Pending Cases:&lt;/strong&gt; देश की अदालतों में मुकदमों के अंबार ने न्याय व्यवस्था की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट्स और जिला अदालतों तक में लाखों केस सालों से लंबित पड़े हैं. हालात ये हैं कि हजारों मामले पिछले 10 से 30 सालों से फैसले के इंतजार में धूल फांक रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि साल 2011 से अब तक अदालतों की संरचना और तकनीक को बेहतर बनाने के लिए करीब 9,800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी पेंडेंसी कम होने का नाम नहीं ले रही है. संसद में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जजों की भारी कमी और तय समय-सीमा का न होना आम जनता को वक्त पर इंसाफ मिलने में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शीर्ष अदालत में लंबित केसों की स्थिति&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;संसद के उच्च सदन में राज्यसभा सांसद दिलीप कुमार राय के सवाल का जवाब देते हुए कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के आंकड़े सबके सामने रखे. सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के निपटारे में दशक बीत रहे हैं. वर्तमान में शीर्ष अदालत में कुल 95,936 मुकदमे लंबित चल रहे हैं. इसमें सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 26 मामले ऐसे हैं जो पिछले 30 सालों से भी ज्यादा समय से पेंडिंग हैं. इसके अलावा 558 मुकदमे 20 साल से अधिक समय से न्याय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि देश की सबसे बड़ी अदालत में भी न्याय की रफ्तार बहुत धीमी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाईकोर्ट में मुकदमों का विशाल अंबार&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;देशभर के सभी 25 हाईकोर्ट का हाल भी बेहद चिंताजनक बना हुआ है. वर्तमान में इन उच्च न्यायालयों में कुल 63.76 लाख मुकदमे पेंडिंग पड़े हैं. इनमें से 80,634 मामले तो 30 साल से भी अधिक पुराने हैं, जिन पर अब तक अंतिम फैसला नहीं आ सका है. आंकड़े बताते हैं कि 4.51 लाख से ज्यादा केस 20 साल से और 16 लाख से अधिक मुकदमे एक दशक यानी 10 साल से अधिक समय से लटके हुए हैं. इतनी बड़ी संख्या में पुराने केसों के लंबित रहने से निचली अदालतों से आने वाली नई अपीलों का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/polymer-notes-in-india-rbi-polymer-currency-secret-security-features-why-polymer-notes-are-more-secure-than-paper-notes-3169744&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/5bbe2cea4553ba9034b25dc37f2af6d117857704979231014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा पेंडेंसी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाईकोर्ट की सूची में मुकदमों के पेंडिंग होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सबसे आगे है. अकेले इस हाईकोर्ट में कुल 12.28 लाख मुकदमे लंबित हैं. इनमें से 53,787 मामले 30 साल से ज्यादा पुराने हैं, जबकि 1.61 लाख केस 20 साल और 4.88 लाख मामले 10 साल से अधिक समय से फैसले की राह देख रहे हैं. पेंडेंसी के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट दूसरे नंबर पर है, जहां 30 साल से पुराने 11,417 केस चल रहे हैं. वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में कुल 6.57 लाख केसों में से 3,901 मामले तीन दशकों से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अन्य राज्यों और निचली अदालतों का हाल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इलाहाबाद और बॉम्बे के अलावा पटना हाईकोर्ट में 3,513 केस और मद्रास हाईकोर्ट में 3,118 केस 30 साल से ज्यादा समय से अटके हुए हैं. कुल लंबित मामलों की संख्या में राजस्थान हाईकोर्ट 6.96 लाख केसों के साथ और मद्रास हाईकोर्ट 5.67 लाख मामलों के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल हैं. दूसरी ओर, देश की जिला और निचली अदालतों में मुकदमों का पहाड़ खड़ा हो चुका है, जहां कुल 4.98 करोड़ मुकदमे पेंडिंग हैं. आम नागरिकों से जुड़े इन मुकदमों में 81,275 केस ऐसे हैं जो 30 सालों से भी अधिक समय से पेंडिंग पड़े हुए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/65e794967b9b2e50f6bf40bc0026454017857705242771014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आखिर क्यों लटके हुए हैं केस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;संसद में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि मामलों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है. उन्होंने बताया कि कोर्ट में देरी कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे जजों और न्यायिक अधिकारियों की भारी कमी, सपोर्ट स्टाफ की कमी और भौतिक ढांचा. इसके अलावा मामलों की जटिलता, सबूतों की प्रकृति, गवाहों और वकीलों का सहयोग न मिलना और प्रक्रियागत नियम भी मुकदमों को लंबा खींचने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. जब तक इन व्यवस्थागत कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक अदालतों से त्वरित न्याय मिलना कठिन बना रहेगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;गुण मिले न मिले, नीयत जरूर मिले; शादी से पहले जासूस खंगाल रहे बायोडाटा&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/ketan-agarwal-lohagarh-fort-murder-case-created-trend-for-private-detective-pre-marital-private-investigations-and-background-checks-3169911&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;गुण मिले न मिले, नीयत जरूर मिले; शादी से पहले जासूस खंगाल रहे बायोडाटा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/3efa0980109ceded5a3b9f7ba6b4432b17857706303831014_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Europe Criminal Gang: क्या है फॉक्सट्रॉट नेटवर्क, जो सरेआम लेता है लोगों की सुपारी?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/foxtrot-network-europe-criminal-gang-murder-conspiracy-3169818</link><comments>https://www.abplive.com/gk/foxtrot-network-europe-criminal-gang-murder-conspiracy-3169818#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 22:50:35 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/foxtrot-network-europe-criminal-gang-murder-conspiracy-3169818</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Europe Criminal Gang:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;यूरोप में इन दिनों &quot;फॉक्सट्रॉट नेटवर्क&quot; नाम का एक क्रिमिनल गैंग काफी चर्चे में है. हाल ही में लंदन की एक अदालत ने एक नॉर्वेजियन नौजवान को हत्या की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिया है. जांच में सामने आया कि यह नौजवान इसी फॉक्सट्रॉट नेटवर्क के लिए काम कर रहा था और उसे ब्रिटेन में एक व्यक्ति की हत्या करने के लिए करीब 25 हजार यूरो यानी लगभग 28 हजार डॉलर की सुपारी दी गई थी. इस मामले के सामने आने के बाद पूरी दुनिया में इस गैंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कैसे काम करता है यह नेटवर्क&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फॉक्सट्रॉट नेटवर्क की शुरुआत 2021 में स्वीडन में हुई थी और इसका सरगना रावा माजिद नाम का एक फरार अपराधी है. यह गैंग हत्या, गोलीबारी, हमले, ड्रग और हथियारों को कानून से छिपाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर बेचना.&amp;nbsp; सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह गैंग अपने हत्या के &quot;कॉन्ट्रैक्ट&quot; की सुपारी का काम खुलेआम टेलीग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसी ऐप्स के ग्रुप चैट्स पर विज्ञापन की तरह दिखाता है. यह गैंग ज्यादातर बहुत कम उम्र के लड़कों को इस काम के लिए भर्ती करता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/polymer-notes-in-india-rbi-polymer-currency-secret-security-features-why-polymer-notes-are-more-secure-than-paper-notes-3169744&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब तक कितनी वारदातें और आगे क्या&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 से अब तक फॉक्सट्रॉट नेटवर्क करीब 35 हत्याओं और कई हमलों और हमले की कोशिशों में शामिल हो रहा है. इस गैंग की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह अपने टारगेट को अंजाम देने के लिए 16 और 17 साल जैसे कम उम्र के नौजवानों का इस्तेमाल करता है, जिन्हें पैसों का लालच देकर आसानी से अपराध की दुनिया में धकेल दिया जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार लंदन वाले मामले में आरोपी को हायर करने वाला आदमी सिर्फ 17 साल का बताया जा रहा है, जिसे नॉर्वे की अदालत पहले ही 14 साल की सजा सुना चुकी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस पूरे मामले के बाद यूरोपीय देशों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क पर और सख्ती से नजर रख रही हैं.&amp;nbsp;अमेरिका और ब्रिटेन की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस गैंग की फंडिंग और नेटवर्क को कमजोर किया जा सकेगा, लेकिन सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए इतनी आसानी से चल रहे इस अपराध के खेल को पूरी तरह रोकना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/bankipur-datia-by-election-results-what-if-nota-wins-eci-rules-prashant-kishor-nitin-nabin-3169679&quot;&gt;&lt;strong&gt;बांकीपुर और दतिया में NOTA जीत जाए तो क्या होगा, कौन बनेगा MLA?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/36894a694044c854a48e8f693a2e8d4d17857535515941381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Reserve Bank of India Notification: ATM से कैसे निकलेंगे प्लास्टिक के नोट, क्या बदली मशीनें?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-plastic-currency-notes-trial-india-2026-3169860</link><comments>https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-plastic-currency-notes-trial-india-2026-3169860#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 22:47:56 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-plastic-currency-notes-trial-india-2026-3169860</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Reserve Bank of India Notification: &lt;/strong&gt;पिछले कुछ समय से एक खबर लोगों के बीच काफी चर्चा में है. भारत में जल्द ही प्लास्टिक के नोट यानी पॉलीमर नोट आ सकते हैं असल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी पुरानी योजना को फिर से शुरू किया है. RBI की छपाई करने वाली कंपनी BRBNMPL ने 17 जुलाई 2026 को एक ग्लोबल टेंडर निकाला है. इस टेंडर के जरिए पॉलीमर मटीरियल यानी प्लास्टिक जैसा कच्चा माल खरीदा जाएगा, ताकि उससे ट्रायल के तौर पर नोट बनाए जा सकें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह टेंडर करीब 68,000 रीम मटीरियल के लिए है. खबरों के मुताबिक 10 रुपये और 20 रुपये के नोट इस ट्रायल के लिए चुने जा सकते हैं, लेकिन अभी तक RBI ने खुद इन दोनों नोटों का नाम आधिकारिक रूप से नहीं बताया है. यह भी साफ कर दिया गया है कि यह सिर्फ एक ट्रायल है, पूरे देश में नोट बदलने का फैसला अभी नहीं लिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या पुराने नोट बंद होंगे और ATM बदलने पड़ेंगे?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब सवाल आता है कि अगर प्लास्टिक के नोट आ भी जाएं, तो क्या पुराने कागज के नोट बंद हो जाएंगे और ATM मशीनें बदलनी पड़ेंगी? सरकार ने साफ कहा है कि पॉलीमर नोट कागज के नोटों की जगह नहीं लेंगे, बल्कि दोनों तरह के नोट साथ-साथ बाजार में चलते रहेंगे. यानी अगर आपके पास पुराने 10 रुपये या 20 रुपये के नोट हैं तो उन्हें लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. इस वजह से पुरानी मशीनें इन्हें ठीक से गिनने या बाहर निकालने में दिक्कत कर सकती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/vande-bharat-express-transports-donor-heart-how-is-a-heart-transported-for-a-transplant-know-how-every-minute-counts-3169695&quot;&gt;&lt;strong&gt;ट्रांसप्लांट के लिए एक जगह से दूसरी जगह कैसे जाता है हार्ट? जानें प्रोसेस&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फायदे, चुनौतियां और अभी क्या समझना जरूरी है&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;प्लास्टिक के नोट लाने के पीछे RBI की मुख्य वजह यह है कि यह नोट कागज के नोट से करीब ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं. इससे नोट बार-बार छापने का खर्च कम हो जाता है और सरकार के पैसे भी बचते हैं. साथ ही पॉलीमर नोटों में नकली नोट बनाना कठिन होता है. हालांकि गर्मी के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में प्लास्टिक नोट मुड़ने या आपस में चिपकने की समस्या भी देखी गई है, जो एक चुनौती बनी हुई है. फिलहाल यह पूरा मामला सिर्फ ट्रायल के लिए है. जब तक RBI इन ट्रायलों के नतीजे नहीं देख लेता, तब तक न तो नोट बाज़ार में आम लोगों के लिए आएंगे और न ही ATM मशीनों में कोई बड़ा बदलाव तुरंत होने वाला है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/pm-modi-social-media-facebook-post-remove-meta-has-apologised-know-about-social-media-content-policy-through-removal-pm-and-president-post-3169641&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या PM और राष्ट्रपति की पोस्ट भी हटाई जा सकती है, क्या है पॉलिसी?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/1618ddd3f6c48ff8c0b0d73cab108ac617857577224901381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[महीनों स्पेस में बिताते, फिर वहां कपड़े कैसे धोते हैं एस्ट्रोनॉट्स?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/astronauts-spend-months-in-space-so-how-do-they-wash-their-clothes-there-know-here-3169915</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/astronauts-spend-months-in-space-so-how-do-they-wash-their-clothes-there-know-here-3169915#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 20:12:07 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/astronauts-spend-months-in-space-so-how-do-they-wash-their-clothes-there-know-here-3169915</guid><description><![CDATA[महीनों स्पेस में बिताते, फिर वहां कपड़े कैसे धोते हैं एस्ट्रोनॉट्स?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/4e46db23f163ba5b9e3f26ac17ae8e3b17857651960321307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[गुण मिले न मिले, नीयत जरूर मिले; शादी से पहले जासूस खंगाल रहे बायोडाटा]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/ketan-agarwal-lohagarh-fort-murder-case-created-trend-for-private-detective-pre-marital-private-investigations-and-background-checks-3169911</link><comments>https://www.abplive.com/gk/ketan-agarwal-lohagarh-fort-murder-case-created-trend-for-private-detective-pre-marital-private-investigations-and-background-checks-3169911#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 19:28:48 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/ketan-agarwal-lohagarh-fort-murder-case-created-trend-for-private-detective-pre-marital-private-investigations-and-background-checks-3169911</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Pre Marital Private Investigations Trend:&lt;/strong&gt; पुणे के लोहागढ़ किले में हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से ही समाज में एक अजीब सी सतर्कता देखने को मिल रही है. इस खौफनाक घटना के बाद से महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में शादी-ब्याह से पहले लड़के-लड़की का सीक्रेट तरीके से बैकग्राउंड चेक कराने का चलन तेजी से बढ़ा है. अब परिवार सिर्फ पंडित जी से कुंडलियों का मिलान कराने या रिश्तेदारों से ऊपरी बातचीत करने तक सीमित नहीं रहना चाहते हैं. लोग अब रिश्तों में भावनाओं के साथ-साथ कड़े तथ्यों की पड़ताल कर रहे हैं. यही वजह है कि आज के दौर में शादी तय करने से पहले गुण मिलने के साथ-साथ एक-दूसरे की नीयत और अतीत का साफ होना सबसे जरूरी शर्त बन गई है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों की मांग में भारी इजाफा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि मुंबई और आसपास के बड़े शहरों में निजी जासूसी एजेंसियों के पास प्री-मैट्रिमोनियल बैकग्राउंड चेक की इंक्वायरी काफी बढ़ गई है. भले ही इसका कोई आधिकारिक सरकारी डेटा उपलब्ध न हो, लेकिन जांच एजेंसियों का कहना है कि लोग अब शादियों में रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. मुंबई जैसे शहर में जहां साइबर फ्रॉड और प्रॉपर्टी विवादों के केस ज्यादा आते हैं, वहां भी जासूसों की कमाई का एक बड़ा जरिया अब मैरिज इन्वेस्टिगेशन बन चुका है. देश में बढ़ते आपराधिक केस को देखते हुए शादी से पहले परिवार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि होने वाले बहू या दामाद का कोई ऐसा छिपा हुआ पुराना रिश्ता या गंभीर अतीत तो नहीं है, जिसे उनसे पूरी तरह से छुपाया जा रहा हो.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;छोटी-छोटी बातों पर टूट रहे हैं रिश्ते&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जासूसी के इस दौर में अब बहुत ही मामूली बातों को लेकर भी तय रिश्ते टूटने लगे हैं. इन्वेस्टिगेशन के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बहुत बड़ी गड़बड़ी न होने के बावजूद सगाई तोड़ दी गई. परिवार किसी भी तरह का शक होने पर तुरंत पीछे हट रहे हैं. जासूसों की रिपोर्ट आने के बाद लोग किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए तुरंत शादी का फैसला बदल लेते हैं. परिवारों का मानना है कि बाद में पछताने और अदालती चक्कर काटने से कहीं बेहतर है कि शुरुआत में ही सतर्कता बरत ली जाए और सभी संदिग्ध पहलुओं को अच्छे से खंगाल लिया जाए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/polymer-notes-in-india-rbi-polymer-currency-secret-security-features-why-polymer-notes-are-more-secure-than-paper-notes-3169744&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/0a0958be922f5301632774121aca3d5317857653920571014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शादी से पहले जासूसी के ऐसे-ऐसे मामले&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Past Relationship Disclosure Issue:&lt;/strong&gt; एक मामले में सगाई सिर्फ इसलिए रद्द कर दी गई क्योंकि होने वाली दुल्हन का अपने पुराने कॉलेज फ्रेंड के साथ संपर्क था. हालांकि लड़की ने सफाई दी थी कि यह महज एक सामान्य दोस्ती थी, लेकिन ससुराल पक्ष ने इसे छिपा हुआ सच मानकर शादी से इनकार कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Workplace Commute Suspicion:&lt;/strong&gt; गुजरात के एक परिवार ने अपने होने वाले दामाद से रिश्ता तोड़ लिया. जासूसों की जांच में पता चला था कि लड़का अपनी एक महिला सहकर्मी के साथ रोज ऑफिस की पूल कैब शेयर करता था, हालांकि उनके बीच किसी गलत संबंध का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Concealed Debts And Legal Cases:&lt;/strong&gt; मुंबई के एक परिवार ने अपनी बेटी की सगाई उस वक्त तुरंत रद्द कर दी, जब प्राइवेट डिटेक्टिव्स ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि लड़के के सिर पर भारी-भरकम कर्ज है और उसके खिलाफ कोर्ट में कई कानूनी मामले पेंडिंग हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Educational And Job Discrepancies:&lt;/strong&gt; एक अन्य मामले में दूल्हे के परिवार ने रिश्ता आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया. जांच के दौरान होने वाली दुल्हन की शैक्षणिक योग्यताओं और पुरानी नौकरी के दावों में भारी हेरफेर और फर्जीवाड़ा देखने को मिला था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हालिया आपराधिक घटनाओं ने सबसे ज्यादा बढ़ाया खौफ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;केतन अग्रवाल की दुखद मौत और देश भर में लाइफ पार्टनर द्वारा की गई हत्याओं के मामलों ने परिवारों के मन में भारी डर पैदा कर दिया है. इंदौर के बिजनेसमैन राजा रघुवंशी हत्याकांड में भी मेघालय हनीमून के दौरान सुपारी किलर्स के जरिए उनकी जान ली गई थी. इसके अलावा मेरठ का नीला ड्रम केस भी इसकी वजह है. ऐसी सनसनीखेज घटनाओं के बाद से ही लोग अपनी संतानों के सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं. परिवार अब छिपे हुए हिंसक व्यवहार, वित्तीय धोखाधड़ी, सीक्रेट रिश्तों और आपराधिक बैकग्राउंड का पता लगाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाकर प्राइवेट डिटेक्टिव्स की पेशेवर सेवाएं ले रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे पता लगाते हैं ये जासूस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आज के दौर में प्राइवेट जासूस केवल फोन कॉल्स या दूर से निगरानी तक सीमित नहीं हैं. वे किसी भी व्यक्ति की पल-पल की हरकत को ट्रैक करने के लिए कार्यस्थल पर अपने लोग भेजते हैं और सोशल मीडिया अकाउंट्स की पूरी स्कैनिंग करते हैं. कुछ वक्त पहले जयपुर का एक मामला काफी चर्चा में रहा था, जहां एक होने वाली दुल्हन की असलियत का पता लगाने के लिए एक जासूस ने दो हफ्ते तक जौहरी बाजार में गहनों की दुकान पर हेल्पर का काम किया था. उस दौरान उसने देखा कि लड़की के फोन पर बार-बार सीक्रेट कॉल्स आते थे और वह काफी धीमी आवाज में किसी से बात करती थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/2a182b089e00d3fa25a9b668edc1ebb217857654249201014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या बिना किसी की मर्जी के उसकी जांच करना निजता का हनन नहीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या किसी की मर्जी के बिना उसकी जासूसी करना कानूनन सही है? सुप्रीम कोर्ट ने भी एक तलाक के केस में कहा था कि अगर बात एक-दूसरे की जासूसी कराने तक पहुंच जाए तो समझो रिश्ता पहले ही खत्म हो चुका है. हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि बिना अनुमति किसी की निजी जिंदगी में घुसना निजता के अधिकार का हनन हो सकता है. हालांकि जब मामला पूरे जीवन के जुड़ाव का हो, तो परिवार इसे कानूनी से ज्यादा अपनी सुरक्षा का मुद्दा मानते हैं. यही वजह है कि जासूसी का यह पूरा काम आज कानून और नैतिकता की बेहद बारीक रेखा के बीच चल रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/haldiram-london-restaurant-closed-in-25-days-first-indian-restaurant-in-london-hindoostane-coffee-house-owner-sake-din-mohammad-3169847&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/b8a3842ca82e8b757a9f3d746ec8d0c717857654909571014_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Plastic Note Refund Rules: अगर प्लास्टिक का नोट कट जाए, तो बैंक बदलेगा या नहीं?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-notes-news-know-banks-exchange-torn-plastic-notes-per-rbi-rules-3169772</link><comments>https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-notes-news-know-banks-exchange-torn-plastic-notes-per-rbi-rules-3169772#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 18:30:03 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/rbi-polymer-notes-news-know-banks-exchange-torn-plastic-notes-per-rbi-rules-3169772</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Plastic Note Refund Rules:&lt;/strong&gt; दुनिया के कई देशों में कागज के नोटों के बजाय प्लास्टिक नोट का इस्तेमाल हो रहा है. भारत भी अब प्लास्टिक के नोटों को लाने पर विचार कर रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी कुछ साल पहले पांच शहरों में ट्रायल के तौर पर प्लास्टिक के नोट जारी करने की योजना बनाई थी, लेकिन सही तकनीकी अभाव के कारण इस योजना को बंद करना पड़ा. हालांकि, अब सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों के नए फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि हमारे पास कोई प्लास्टिक का नोट हो और वह बीच से कट जाए या फट जाए, तो क्या बैंक उसे भी बदलेगा?&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या प्लास्टिक के नाेट भी फट सकते हैं?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि प्लास्टिक या पॉलीमर नोट बनाए ही इसलिए जाते हैं ताकि वे आसानी से न फटें. ये नोट एक खास तरह की प्लास्टिक फिल्म पर छपते हैं. इन्हें पानी से कोई नुकसान नहीं होता और जेब में मुड़ने पर भी खराब नहीं होते और इन्हें आसानी से हाथ से फाड़ा नहीं जा सकता. मतलब साफ है कि ये नोट आम इस्तेमाल से नहीं फटते, लेकिन अगर इन पर कैंची, चाकू या किसी नुकीली चीज से कट लग जाए, तो ये दो हिस्सों में बंट सकते हैं. साथ ही अत्यधिक गर्मी या आग के संपर्क में आने पर भी ये नोट पिघल कर खराब हो सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/delhi-laxmi-yojana-2026-registration-starts-know-in-which-state-women-receive-most-money-3169093&quot;&gt;दिल्ली में लक्ष्मी योजना शुरू, जानें कहां मिलता है सबसे ज्यादा पैसा?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नोट बदलने की शर्तें&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यदि प्लास्टिक का नोट दो टुकड़ों में कट गया है, लेकिन उसके दोनों टुकड़े आपस में जुड़ते हैं और नोट 80% से ज्यादा सुरक्षित है तो बैंक आपको उस नोट के बदले पूरे पैसे देगा. इसके अलावा नोट पर मौजूद सीरियल नंबर, गांधी जी की तस्वीर और गवर्नर के हस्ताक्षर साफ दिखने चाहिए. हालांकि, यदि नोट का बड़ा हिस्सा गायब है और आपके पास केवल 40% से 60% तक का हिस्सा ही बचा है, तो बैंक आपको उस नोट की कीमत का सिर्फ आधा पैसा ही वापस करेगा. यदि नोट का सिर्फ एक छोटा सा टुकड़ा बचा है या नोट पूरी तरह जलकर पिघल चुका है जिसे पहचानना नामुमकिन हो, तो बैंक उसे स्वीकार नहीं करेगा और आपको कोई पैसा नहीं मिलेगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया कोई भी वैध नोट चाहे वह कागज का हो या प्लास्टिक का यदि खराब होता है, तो उसे बदलने की जिम्मेदारी बैंकों की होती है. बैंक आपको नोट बदलने से मना नहीं कर सकता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/bankipur-datia-by-election-results-what-if-nota-wins-eci-rules-prashant-kishor-nitin-nabin-3169679&quot;&gt;&lt;strong&gt;बांकीपुर और दतिया में NOTA जीत जाए तो क्या होगा, कौन बनेगा MLA?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/d789a17deaa66a5206955cb7cd49dd2f17857492213571474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[वास्ते गुना हुइयां से डेलुलु...Gen Z के चैट कोड्स को ऐसे करें डिकोड]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/from-chacha-vaasteguna-huiya-to-delulu-know-how-to-decode-gen-z-chat-codes-3169865</link><comments>https://www.abplive.com/gk/from-chacha-vaasteguna-huiya-to-delulu-know-how-to-decode-gen-z-chat-codes-3169865#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 18:26:45 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ स्पर्श गोयल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/from-chacha-vaasteguna-huiya-to-delulu-know-how-to-decode-gen-z-chat-codes-3169865</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gen Z Slang:&lt;/strong&gt; अगर आपने हाल ही में इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल करने या फिर वायरल मीम्स देखने में कुछ मिनट भी बिताए हैं तो संभावना है कि आपने अपने फीड में &quot;वास्ते गुना हुइयां&quot; वाक्य को गूंजते हुए सुना होगा. इसके साथ ही आपने डेलूलू, स्ले, एब्सलूट सिनेमा और यैपिंग जैसे शब्दों को भी रोजमर्रा की ऑनलाइन बातचीत का हिस्सा बनते हुए देखा होगा. कई लोगों को इस तरह के शब्द काफी अजीब लग सकते हैं लेकिन Gen Z के लिए ये बस संचार करने का एक नया तरीका हैं. उनकी चैट पूरी तरह से नई डिजिटल भाषा बनाने के लिए छोटे शब्द, इंटरनेट स्लैंग, इमोजी और पॉप संस्कृति संदर्भों को जोड़ती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&amp;nbsp;Gen Z की इंटरनेट भाषा&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पारंपरिक हिंदी या फिर अंग्रेजी बातचीत के उलट Gen Z इंस्टाग्राम, टिकटोक और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से काफी ज्यादा प्रभावित है. छोटे वाक्यांश, मीम्स, और वायरल ट्रेंड कुछ ही घंटे में बड़े स्तर पर फैल जाते हैं. इससे युवा नए शब्दों को अपनाने और मौजूदा शब्दों को पूरी तरह से अलग मतलब देने के लिए प्रेरित होते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/65d29b8c4d53c153fe9e94b27655142217857617690931307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कुछ मशहूर Gen Z शब्द और उनके मतलब&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आज सबसे आम इंटरनेट शब्दों में से एक है डेलूलू. इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो ख्याली पुलाव में विश्वास रखता है या फिर ऐसी चीजों की कल्पना करता है जिनके घटित होने की संभावना ही नहीं है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;एक ऐसा ही शब्द और है जिसे सिनेमा कहा जाता है. यह शब्द फिल्मों का जिक्र करने के बजाय किसी घटना, तर्क या गपशप के टुकड़े को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यानी अगर किसी के साथ कोई शानदार या फिर विश्वसनीय घटना घट जाए तो वह उसे सिनेमा कहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वाइफ गाइ उस व्यक्ति को कहा जाता है जो सोशल मीडिया पर लगातार अपनी पत्नी की प्रशंसा करता है या फिर उसके बारे में बात करता है. इसी के साथ यैपिंग का सीधा सा मतलब है बिना रुके लगातार बात करना.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ऑनलाइन चैट में &quot;BC&quot;का मतलब कोई गाली नहीं बल्कि &quot;because&quot; होता है. ठीक इसी तरह literally शब्द का मतलब किसी भी बात पर जोर देने के लिए किया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इतना ही नहीं बल्कि तारीफ करने का तरीका भी विकसित हुआ है. किसी को क्वीन कहना किसी लड़की के आत्मविश्वास या फिर व्यक्तित्व की प्रशंसा करने का एक तरीका है. साथ ही किसी को स्लेय्ड कहने का मतलब होता है कि उसने असाधारण रूप से काफी ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है. वाइब शब्द किसी व्यक्ति, स्थान या फिर स्थिति की मनोदशा, वातावरण या फिर ऊर्जा को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;कोविड के बाद कैसे घटी हाईवे पर हादसों की संख्या, 4.1% की आई गिरावट?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/decline-in-national-highway-accidents-after-covid-know-why-fatalities-are-falling-despite-rising-road-crashes-3169819&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;कोविड के बाद कैसे घटी हाईवे पर हादसों की संख्या, 4.1% की आई गिरावट?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वास्ते गुना हुइयां के पीछे की कहानी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि काफी लोग यह मानते हैं कि वास्ते गुना हुइयां हिंदी, पंजाबी, या संस्कृत से जुड़ा हुआ है. लेकिन असल में इस वाक्यांश की जड़ किसी भी भारतीय भाषा में नहीं है. दरअसल यह इंटरनेट की मीम से आया है. 2015 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक छोटा सा वीडियो काफी ज्यादा मशहूर हो गया था. उस वीडियो में एक लड़का बार-बार चिल्ला रहा था &quot;can I get a hoya?&quot;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह वाक्यांश अलग-अलग देशों में तेजी से फैल गया. उन देशों की भाषा के अनुरूप इसका उच्चारण भी बदलता गया. समय के साथ भारतीय मीम बनाने वालों तक यह सिर्फ चाचा वास्ते गुना हुइयां के रूप में पहुंचा. बस यहीं से यह वीडियो वायरल हो गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/3348dd78fcb3ad011dd394f39710fc7817857617953441307_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gen Z ने इमोजी का मतलब बदल दिया&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आधुनिक इंटरनेट बातचीत अब सिर्फ शब्दों से ही नहीं चलती. इमोजी ने युवाओं के बीच बिल्कुल नए मतलब पैदा कर दिए हैं. रोते हुए चेहरे वाले इमोजी का इस्तेमाल उदासी के बजाय बेकाबू हंसी दिखाने के लिए किया जाता है. इसी तरह खोपड़ी का इमोजी अब मौत को नहीं बल्कि इस बात को दर्शाता है कि कोई व्यक्ति इतनी जोर से हंस रहा है कि वह मजाक से बच ही नहीं सकता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पिघलता हुआ चेहरा इमोजी काफी ज्यादा शर्मिंदगी या अजीब महसूस करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. नेल पॉलिश का इमोजी आत्मविश्वास या फिर किसी स्थिति को सहजता से संभालने का प्रतीक बन गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a title=&quot;हर साल कितने नोट खराब हो जाते हैं, देखें RBI का आंकड़ा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/polymer-notes-india-how-many-banknotes-become-unfit-for-circulation-every-year-rbi-data-explained-3169622&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;हर साल कितने नोट खराब हो जाते हैं, देखें RBI का आंकड़ा?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/79216f12088517f6383bee0f5d1d04aa17857596431561307_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Abhishek Sharma: अभिषेक शर्मा के पास खेती की कितनी जमीन, उगाते हैं कौन-सी फसलें?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/cricketer-abhishek-sharma-agricultural-land-know-his-family-career-net-worth-3169714</link><comments>https://www.abplive.com/gk/cricketer-abhishek-sharma-agricultural-land-know-his-family-career-net-worth-3169714#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 18:14:38 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/cricketer-abhishek-sharma-agricultural-land-know-his-family-career-net-worth-3169714</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Abhishek Sharma: &lt;/strong&gt;टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज अभिषेक शर्मा इन दिनों एक बार फिर चर्चे में हैं. उन्होंने पंजाब के एक स्थानीय टूर्नामेंट में हाल ही में शानदार दोहरा शतक जड़ा, जिसके बाद वे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस शानदार पारी के बाद फैंस उनके बारे में और ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हैं, खासकर उनकी फैमिली, बैकग्राउंड, पढ़ाई और संपत्ति को लेकर. लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि क्या अभिषेक शर्मा के पास आम किसानों की तरह खेती है? अगर हां, तो वो यहां क्या-क्या उगाते हैं?&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आपको बता दें कि अभिषेक शर्मा का जन्म 4 सितंबर 2000 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम राजकुमार शर्मा है, जो खुद एक पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं और आजकल एक बैंक में नौकरी करते हैं. उनकी माता का नाम मंजू शर्मा है, जो एक गृहिणी हैं. अभिषेक अपने परिवार में सबसे छोटे हैं और उनकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनके नाम कोमल और सानिया हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;करियर और उनकी संपत्ति के बारे में जानकारी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अभिषेक शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2017 में पंजाब की तरफ से क्रिकेट खेलकर की थी. इसके बाद वे इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL में Sunrises Hydrabad टीम से&amp;nbsp; खेले और अपनी शानदार बल्लेबाजी से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. साल 2024 में उन्होंने भारतीय टीम के लिए टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू किया और जल्द ही टीम इंडिया के अहम खिलाड़ी बन गए. साल 2025 में वे टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बने और एशिया कप 2025 में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया. उनकी शानदार फॉर्म को देखते हुए सनराइजर्स हैदराबाद ने &lt;a title=&quot;साल 2026&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/new-year-2026&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;साल 2026&lt;/a&gt; के लिए उन्हें 14 करोड़ रुपये में रिटेन किया. इससे पहले उनकी कीमत करीब 6.5 करोड़ रुपये थी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/pm-modi-social-media-facebook-post-remove-meta-has-apologised-know-about-social-media-content-policy-through-removal-pm-and-president-post-3169641&quot;&gt;क्या PM और राष्ट्रपति की पोस्ट भी हटाई जा सकती है, क्या है पॉलिसी?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अभिषेक शर्मा के पास खेती की कितनी जमीन?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अभिषेक शर्मा को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार तरह-तरह की बातें और अफवाहें फैलती रहती हैं, खासकर उनकी संपत्ति के बारे में. उनके पास पंजाब व अन्य जगहों पर खेती योग्य जमीन की जानकारी सार्वजनिक नहीं है. हालांकि, कई रिपोर्ट्स में यह जरूर बताया गया है कि अभिषेक शर्मा और उनके परिवार के नाम कई संपत्तियां दर्ज हैं. उनके परिवार की बात करें तो उनके पिता बैंक में नौकरी करते हैं, न कि खेती से जुड़े किसी काम.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/gk/ayodhya-ram-mandir-donation-case-how-is-an-sit-different-from-the-regular-police-know-how-special-investigation-teams-work-3169435&quot;&gt;आम पुलिस से कितनी अलग होती है SIT? जानें यहां&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/2ccd5f9dd4c7242651b39d731d57418b17857439060531381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[विदेशी धरती पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट कौन सा, अब उसका क्या हाल?]]></title><link>https://www.abplive.com/gk/haldiram-london-restaurant-closed-in-25-days-first-indian-restaurant-in-london-hindoostane-coffee-house-owner-sake-din-mohammad-3169847</link><comments>https://www.abplive.com/gk/haldiram-london-restaurant-closed-in-25-days-first-indian-restaurant-in-london-hindoostane-coffee-house-owner-sake-din-mohammad-3169847#respond</comments><pubDate>Mon, 3 Aug 2026 17:01:27 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निधि पाल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ जनरल नॉलेज ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/gk/haldiram-london-restaurant-closed-in-25-days-first-indian-restaurant-in-london-hindoostane-coffee-house-owner-sake-din-mohammad-3169847</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;First Indian Restaurant In London:&lt;/strong&gt; लंदन के मशहूर लीसेस्टर स्क्वायर में कुछ ही दिन पहले खुले हल्दीराम के नए आउटलेट पर उमड़ी भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि दुनिया भर में भारतीय जायके की दीवानगी कितनी ज्यादा है. हालांकि अब खबर आई है कि इस रेस्टोरेंट को अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा है. इसकी वजह वहां पर हो रहे बिजली के मरम्मत के काम को बताया गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सात समंदर पार भारतीय खाने की इस मशहूर यात्रा का पहला ऐतिहासिक कदम आज से दो सदी पहले रखा गया था? बिहार के पटना से ताल्लुक रखने वाले एक निडर बिजनेसमैन ने ब्रिटेन की धरती पर पहला भारतीय रेस्तरां शुरू करके पश्चिमी दुनिया को हमारे पारंपरिक व्यंजनों और जायके का स्वाद चखाया था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना से लंदन तक का ऐतिहासिक सफर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खान-पान का परचम लहराने वाले इस दूरदर्शी शख्स का नाम साके दीन मोहम्मद था. साल 1759 में पटना के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे दीन मोहम्मद ने शुरुआत में ईस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल सेना में अपनी सेवाएं दी थीं. साल 1782 में सैन्य सेवा छोड़ने के बाद वे अपने दोस्त के साथ आयरलैंड पहुंचे. वहां उनकी मुलाकात जेन डेली नाम की महिला से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी रचा ली. इसके कुछ साल के बाद यह कपल इंग्लैंड शिफ्ट हो गया. लंदन पहुंचकर जीवन यापन के लिए उन्होंने अपनी अलग-अलग क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए एक अनूठा बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;विदेश में पहले हिंदुस्तानी रेस्तरां की स्थापना&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विदेश में भारतीय भोजन परोसने का विचार उस दौर में एकदम नया और अनोखा था. साके दीन मोहम्मद ने साल 1810 में लंदन के पोर्टमैन स्क्वायर स्थित 34 जॉर्ज स्ट्रीट में 'हिंदुस्तान कॉफी हाउस' (Hindoostane Coffee House) के नाम से पहला रेस्तरां खोला. शुरुआती दिनों में इसे 'हिंदुस्तानी डिनर एंड हुक्का स्मोकिंग क्लब' भी कहा गया. इस आउटलेट की अंदरूनी सजावट पूरी तरह से भारतीय कलाकृतियों और नजारों पर आधारित थी. यहां आने वाले ब्रिटिश और विदेशी मेहमानों के लिए आराम से बैठकर असली चिलम तंबाकू के साथ हुक्का पीने और भारतीय माहौल में पारंपरिक देसी पकवानों का स्वाद लेने की खास व्यवस्था की गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;ट्रांसप्लांट के लिए एक जगह से दूसरी जगह कैसे जाता है हार्ट? जानें प्रोसेस&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/vande-bharat-express-transports-donor-heart-how-is-a-heart-transported-for-a-transplant-know-how-every-minute-counts-3169695&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;ट्रांसप्लांट के लिए एक जगह से दूसरी जगह कैसे जाता है हार्ट? जानें प्रोसेस&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/68a675d960ff2f88d2cc41d51e82e3dd17857564734901014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मेन्यू में शामिल लाजवाब देसी व्यंजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस ऐतिहासिक रेस्तरां का मेन्यू बहुत ही आकर्षक और विविधता से भरा हुआ था. यहां आने वाले ग्राहकों को मुख्य रूप से तीखी भारतीय करी परोसी जाती थी, जिसमें लॉबस्टर करी और स्वादिष्ट चिकन करी सबसे ज्यादा पसंद की जाती थी. इसके अलावा मेन्यू में एक खास तरह का पाइनएप्पल पुलाव, गर्म भारतीय रोटियां और विभिन्न प्रकार की खट्टी-मीठी देसी चटनियां शामिल थीं. ब्रिटेन के लोगों के लिए इस तरह के खड़े मसालों और तीखे जायके वाले खाने का एकदम नया अनुभव था, जिसे साके दीन मोहम्मद ने बेहद सलीके और मौलिक तरीके से उनके सामने पेश किया था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आखिर क्यों बंद हुआ हिंदुस्तान कॉफी हाउस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि यह अनूठी पहल अपने समय से बहुत आगे की सोच रखती थी. 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन में आम लोगों के बीच घर से बाहर जाकर रेस्तरां में खाना खाने का चलन बिल्कुल नहीं था. प्रचार-प्रसार की कमी और ग्राहकों की संख्या सीमित होने के कारण रेस्तरां को लगातार वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था. ऐसे में भारी कर्जे में डूबने की वजह से साल 1833 तक आते-आते साके दीन मोहम्मद दिवालिया घोषित हो गए. इस आर्थिक संकट के कारण इस रेस्टोरेंट को हमेशा के लिए बंद करना पड़ गया. भले ही यह आउटलेट ज्यादा दिन नहीं चला, लेकिन इसने विदेशों में भारतीय भोजन का आधार जरूर रख दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/6a84cc7b79b5e0d090d9455e36860e6917857564981941014_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वर्तमान में इस जगह की क्या स्थिति है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आज के समय में पहला भारतीय रेस्टोरेंट 'हिंदुस्तान कॉफी हाउस' भौतिक रूप से अस्तित्व में नहीं है और बंद हो चुका है. लेकिन वेस्टमिंस्टर शहर की सरकार ने इस ऐतिहासिक प्रयास और साके दीन मोहम्मद के योगदान को याद रखने के लिए खास कदम उठाया है. जिस जगह पर पहले यह रेस्टोरेंट चलता था, वहां अब एक आधिकारिक ब्लू प्लेक यानी नीली स्मृति पट्टिका लगाई गई है. यह प्लेक दुनिया भर के पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को उस साहसी कदम की याद दिलाती है, जिसने आज पूरे ब्रिटेन और दुनिया भर में भारतीय खान-पान को इतना लोकप्रिय बना दिया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;24 कैरेट से कितना सस्ता होता है 22 कैरेट सोना, कितना बचता है पैसा?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/gk/gold-price-today-24k-compared-to-22k-gold-rate-how-much-money-will-saved-3169804&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;24 कैरेट से कितना सस्ता होता है 22 कैरेट सोना, कितना बचता है पैसा?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/03/6e3092d1d5af7ef59ccb91602c83d6eb17857566384221014_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>